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दाइची-रैनबैक्सी विवाद: दिल्ली HC ने सिंह ब्रदर्स को विदेशी बैंक अकाउंट, एसेट्स का खुलासा करने का दिया निर्देश

दाइची ने दलील दी थी कि मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह ने 2008 में रैनबैक्सी बेचते समय उससे कई जानकारियां छिप

HC directs Singh brothers to disclose foreign bank accounts, assets

नई दिल्ली.  दिल्ली हाईकोर्ट ने रैनबैक्सी लैबोरेटरीज के पूर्व प्रमोटर्स मालविंदर और शिविंदर सिंह को अपने विदेशी बैंक अकाउंट्स और ओवरसीज एसेट्स का खुलासा करने का निर्देश दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने जापान की ड्रग मेकर कंपनी दाइची सैंक्यो के 3500 करोड़ रुपए के आर्बिट्रल अवार्ड को लागू करने के मामले में सिंह ब्रदर्स को ये निर्देश दिए हैं। जस्टिस राजीव शकधर ने सिंह ब्रदर्स को RHC होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड या ट्रेडमार्क में उनकी शेयरहोल्डिंग  किसी थर्डपार्टी को ट्रांसफर न करने या बनाने का आदेश भी दिया।

 

सीलबंद कवर में हलफनामा देने का आदेश

कोर्ट ने कहा कि दोनों भाई सीलबंद कवर में एक हलफनामे में भारत के बाहर उनके एसेट्स और बैंक अकाउंट्स के साथ आर्ट एंड पेंटिंग के ब्योरे का खुलासा करेंगे। जब सिंह ब्रदर्स के लिए कोर्ट में एडवोकेट अनुराधा दत्त ने अधिकार क्षेत्र से बाहर के आधार पर विदेशी एसेट्स और अकाउंट्स का खुलासा करने पर आपत्ति जताई, तो कोर्ट ने कहा कि वह सिर्फ डिटेल्स देने के लिए कह रहे थे और अधिकार क्षेत्र के मुद्दे को बाद में निपटाया जाएगा। यह आदेश दाइची की ओर से दायर की गई याचिका पर सीनियर एडवोकेट अरविंद निगम के जरिए आया था।

कोर्ट को यह भी सूचित किया गया था कि इस मामले में एक चार्टर्ड एकाउंटेंट ने इस मामले में लोकल कमिश्नर नियुक्त किया था। जिसने लिस्टेड कंपनियों में प्रतिवादी के अनिन्कम्बड शेयरों को बेचने में परेशानी हुई थी। कोर्ट ने आगे की सुनवाई के लिए 25 सितंबर तय की है।

 

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3500 करोड़ रुपए जमा कराने का आदेश

पिछले 31 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने ही फोर्टिस की याचिका खारिज करते हुए रैनबैक्सी को बेचने के दौरान जानकारियां छिपाने पर 3,500 करोड़ रुपए जमा कराने का आदेश दिया है। बता दें कि जापान की कंपनी दाइची और सिंह ब्रदर्स के बीच रैनबैक्सी को लेकर विवाद चल रहा था।

 

रैनबैक्सी पर मिलावटी दवाएं बेचने के लगे थे आरोप

दाइची सैंक्यो ने आर्बिट्रल अवार्ड को लागू करने के लिए सिंगापुर ट्रिब्यूनल में पिटीशन फाइल की थी और 2016 में केस जीत भी लिया था। जापान की दवा कंपनी ने दलील दी थी कि मलविंदर सिंह और शिविंदर सिंह ने 2008 में रैनबैक्सी बेचते समय उससे कई जानकारियां छिपाई थीं। 2013 में कंपनी अमेरिका में मिलावटी दवाएं बेचने और गलत आंकड़े वितरित करने की दोषी पाई गई थी। उसे 50 करोड़ डॉलर का भुगतान करना पड़ा था। बाद में दाइची से सन फार्मास्युटिकल लिमिटेड ने रैनबैक्सी का अधिग्रहण कर लिया था।

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