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टीचर की नौकरी छोड़ पिता ने शुरू किया था बिजनेस, बेटे ने कुछ घंटों में कमाए 3500 करोड़, GST रेट घटने का मिला फायदा

सरकार का कुछ आइटम्स पर GST रेट घटाने का फैसला Havells India के लिए खासा फायदेमंद साबित हुआ।

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नई दिल्ली. पिता ने टीचर की नौकरी छोड़ बिजनेस शुरू किया और अपने कारोबारी सफर के दौरान मुश्किल में फंसी कई कंपनियां खरीदकर अरबों रुपए का एम्पायर खड़ा किया। सोमवार बेटे के लिए ऐसा दिन साबित हुआ कि कुछ घंटों में ही कंपनी की वैल्थ लगभग 3500 करोड़ रुपए बढ़ गई। दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी सरकार का कुछ आइटम्स पर GST रेट घटाने का फैसला खासा फायदेमंद साबित हुआ। हम देश की बड़ी इलेक्ट्रिकल कंपनियों में शामिल Havells India की बात कर रहे हैं।

 

 

जीएसटी काउंसिल के फैसले का मिला फायदा

जीएसटी काउंसिल ने शनिवार को हुई मीटिंग में छोटे टेलीविजन, वाटर हीटर, इलेक्ट्रिक आयरनिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, हेयर ड्रायर, वैक्यूम क्लीनर, फूड अप्लायंसेज पर टैक्स रेट घटाकर 28 फीसदी से 18 फीसदी कर दिया। इसका हैवेल्स इंडिया के शेयर को खासा फायदा मिला। कंपनी का शेयर 9 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 610 रुपए के स्तर तक पहुंच गया।

 

 

3500 करोड़ रुपए बढ़ी हैवेल्स इंडिया की मार्केट वैल्यू

सरकार का जीएसटी में कमी के फैसले से प्रमोटर और सीएमडी अनिल राय गुप्ता की अगुआई वाली कंपनी हैवेल्स की मार्केट वैल्यू लगभग 3500 करोड़ रुपए बढ़ गई। शुक्रवार को स्टॉक मार्केट की क्लोजिंग के समय कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग 34,700 करोड़ रुपए थी, जो सोमवार को कुछ ही घंटों के भीतर बढ़कर 38,200 करोड़ रुपए हो गई। यहां बता दें कि हैवेल्स को नई बुलंदियों पर पहुंचाने का श्रेय सीएमडी अनिल गुप्ता के पिता कीमत राय गुप्ता को जाता है, जिन्होंने टीचर की नौकरी छोड़कर इस बिजनेस एम्पायर की नींव डाली थी। कीमत राय गुप्ता का निधन 2014 में हो गया था। इससे पहले उनका जीवन खासा मुश्किलों भरा रहा।

 

 

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कई अधिग्रहण के बाद खड़ा हुआ 38 हजार करोड़ का एम्पायर

आज हैवेल्स देश की तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिकल कंपनी है। कीमत राय गुप्ता के नेतृत्व में कंपनी ने विदेश में कई बड़े अधिग्रहण किए हैं। इसका कारोबार दुनिया के कई देशों में फैला हुआ है। हैवेल्स को 38 हजार करोड़ रुपए की कंपनी बनाने में गुप्ता का बड़ा हाथ है।

 

 

महज 10 हजार रु लेकर आए थे दिल्ली

कीमत राय गुप्ता पंजाब में टीचर की नौकरी से संतुष्ट नहीं थे। आंखों में उद्यमी बनने का सपना लिए वह महज 10,000 रुपए लेकर 1958 में दिल्ली आ गए। पुरानी दिल्ली में उन्होंने एक इलेक्ट्रिकल गुड्स ट्रेडिंग कंपनी बनाई। कुछ साल बाद उन्हें अपनी कंपनी शुरू करने का ख्याल आया।

तब हवेली राम गुप्ता की कंपनी हैवेल्स मुश्किल दौर से गुजर रही थी। कीमत राय गुप्ता को लगा कि वह इस कंपनी की तकदीर बदल सकते हैं। इस सोच के साथ उन्होंने 1971 में करीब 7 लाख रुपए में हैवेल्स को खरीद लिया।


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खरीद ली थी दुनिया की चौथी बड़ी लाइटिंग कंपनी

हैवेल्स ने सर्किट प्रोटेक्शन डिवाइस, केबल्स एंड वायर्स, मोटर्स, फैंस, मॉड्युलर स्विच, होम अप्लायंसेज, इलेक्ट्रिक वाटर हीटर्स, पावर कैपेसिटर्स, सीएफएल लैंप्स के घरेलू बाजार में मजबूत पैठ बनाने के बाद विदेशी बाजार की ओर रुख करने का फैसला किया। इस सोच के साथ उन्होंने 2007 में अपनी कंपनी के आकार से डेढ़ गुनी कंपनी सिल्वेनिया को खरीदने का फैसला किया। तब सिल्वेनिया दुनिया की चौथी सबसे बड़ी लाइटिंग कंपनी थी।

इस अधिग्रहण से हैवेल्स उस समय दुनिया की 5 सबसे बड़ी लाइटिंग कंपनियों की सूची में जगह बनाने में कामयाब हो गई। लेकिन, एक साल बाद आई आर्थिक मंदी ने सिल्वेनिया के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी कर दी। सिल्वेनिया को मुश्किल से उबारने के लिए हैवेल्स ने पूरी ताकत लगा दी। हैवल्स की कोशिशों ने रंग दिखाया और सिल्वेनिया मुश्किलों से उबर गई।

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