Home » Industry » Companiesएयरएशिया टाटा अंबानी बिडला चौखट तक पहुंची चुकी हैं जांच एजेंसियां अजित सिंह

टाटा ही नहीं, अंबानी बिड़ला जैसे कॉरपोरेट की चौखट तक पहुंच चुकी हैं जांच एजेंसियां

टाटा एयर‍एशिया मामले से पहले भी जांच एजेंसियां इंडियन कॉरपोरेट वर्ल्‍ड के खिलाफ रेड डाल चुकी हैं...

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नई दिल्‍ली। कथित तौर पर अंतरराष्ट्रीय उड़ान का लाइसेंस पाने के लिए यूपीए सरकार के एक पूर्व मंत्री को रिश्‍वत देने का मामला सामने आने के बाद देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने एयरएशिया के कई ठिकानों पर छापेमारी की है। एयर एशिया इंडिया में टाटा संन्‍स की भी 49 फीसदी की हिस्‍सेदारी है। इस मामले में टाटा ट्रस्‍ट के एक ट्रस्‍टी का भी नाम सामने आया है। एयर एशिया और टाटा ग्रुप के सीनियर अधिकारियों के बीच ईमेल से हुई बातचीत के आधार पर ही सीबीआई ने इस मामले में मुकदमा दर्ज किया है। इसके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय उड़ान का लाइसेंस पाने के लिए 500 करोड़ रुपए की रिश्‍वत दी गई।  

टाटा की चौखट पर पहुंची जांच एजेंसी  

मामला सामने आने के बाद टाटा की साख पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बेहद साफ सुथरी छवि वाली कंपनी के 100 साल से ज्‍यादा के इतिहास में पहली बार हो रहा है, जब फाइनेंशियल फ्रॉड के आरोप में उसकी चौखट पर कोई जांच एजेंसी पहुंची है। अगर ये आरोप साबित होते हैं तो टाटा की छवि को बड़ा झटका लगेगा। 

 

पहले भी फंसी कई कंपनियां 
चौखट तक जांच एजेंसी के पहुंचने का टाटा के लिए यह भले ही पहला एक्‍सपीरियंस हो,  किन एक दौर ऐसा आया था जब देश के कई बड़े कॉरपोरेट घरानों को एक साथ जांच अधिकारियों की ऐसी ही छापे की कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। राजीव गांधी के दौर में वीपी सिंह के वित्‍त मंत्री रहते हुई इन कार्रवाई ने देश के मीडिया में तहलका मचा दिया था। इन कॉरपोरेट घरानों पर सरकार से करोड़ों रुपए की टैक्‍स चोरी के आरोप थे। जिन कॉरपोरेट घरानों पर वीपी सिंह की कार्रवाइयों का कहर टूटा था, उसमें रिलायंस से लेकर बिड़ला और किर्लोस्‍कर जैसे कारोबारी घराने शामिल थे। इन छापों के चलते वीपी सिंह को अपनी कुर्सी तक गंवानी पड़ी थी। आइए जानते हैं आखिर क्‍या था पूरा मामला....   

 

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टैक्‍स चोरी और भ्रष्‍टाचार में डूबा था इंडियन कॉर्पोरेट वर्ल्‍ड
वीपी सिंह ने ऐसे दौर में देश के वित्‍त मंत्री का ओहदा संभाला, जब इंडियन कॉरर्पोरेट वर्ल्‍ड टैक्‍स चोरी और भ्रष्‍टाचार में बुरी तरह डूबा था।  यही नहीं अदालती आदेशों के बाद भी कई बड़े कॉरपोरेट घरानों ने टैक्‍स नहीं अदा किया था। यहीं नहीं उस दौर में कई कॉरपोरेट हाउसों पर गलत तरीके से सरकारों से छूट हासिल करने के आरोप लग रहे थे। जिन लोगों पर आरोप थे, उनमें अंबानी, बिड़ला, टाटा, किर्लोस्‍कर, थापर और जैसे उस दौर के दिग्‍गज करोबारी शामिल थे। 


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हाथ लगाने की हिम्‍मत नहीं कर पाता था कोई वित्‍त मंत्री

जैसा की ऊपर बताया जा चुका है, उस दौर के लगभग सभी बड़े कारोबारी घरानों पर इकोनॉमिक भ्रष्‍टाचार और टैक्‍सचोरी के आरोप लग रहे थे। हालांकि इससे पहले के कई वित्‍त मंत्री इनके खिलाफ हाथ लगाते डर रहे थे, क्‍योंकि इन बड़े घरानों की पहुंच सीधे पीएम ऑफिस तक थी। वीपी सिंह दूसरी मिट्टी  के बने थे, उन्‍होंने सारा खेल और भविष्‍य दोनों भाप लिया था। यही कारण है कि जब वक्‍त आया जो वह इन कॉरपोरेट घरानों के खिलाफ कदम उठाने से पीछे नहीं हटे।  ऐसा नहीं था कि इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई का अंजाम वीपी सिंह को पता नहीं था, लेकिन उन्‍हें इसकी परवाह नहीं थी।
वीपी सिंह के बाद के कई इंटरव्‍यू से यह बात साबित भी होती थी, जहां उन्‍होंने कहा कि वह राजनीति में पैसे या प्रतिष्‍ठा के लिए नहीं आया।

 

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वीपी  सिंह ने किसी को नहीं छोड़ा
वीपी सिंह इंडियन कॉरर्पोरेट वर्ल्‍ड से गंदगी साफ करना चाहते थे, ऐसे में गेहूं के साथ घुन का पिसना तय था। लिहाजा वीपी सिंह ने किसी भी बड़े कॉरपोरेट हाउस को नहीं छोड़ा। क्‍या अंबानी, क्‍या बिड़ला और क्‍या टाटा। हर बड़े कॉरपोरेट हाउस में सिंह के आदेश पर रेड डाली गई।  जो कॉरपोरेट घराने कभी देश के सरकारों को लोन देने की हैसियत रखते थे और अपनी दखल के चलते सरकारों से उनके फैसले तक बदलवा लेते थे, वही कारपोरेट सरकार की चौखट पर फरियादी थे।


 

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शुरू हुआ विरोध का दौर

 इधर वीपी सिंह इंडियन कॉरर्पोरेट वर्ल्‍ड की गंदगी पर सर्जिकल इस्‍ट्राइक कर रहे थे, उधर कॉरपोरेट वर्ल्‍ड ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया।  अपने दौर के दिग्‍ग्‍ज कारोबारी और तब फिक्‍की के चेयरमैन वीपी गोयनका ने वीपी सिंह के इस कदम को 'रेड राज' का नाम दिया। राजीव गांधी पर लगातार दबाव बढ़ता गया कि वह  सिंह को वित्‍त मंत्रालय से हटाएं। और एक दिन ऐसा आया जब राजीव दबाव में झुक गए और वीपी सिंह को वित्‍त मंत्रालय से हटाकर रक्षा मंत्रालय दे दिया गया। हालांकि कहा गया गया कि रक्षा मंत्रालय को सबसे बेहतरीन मिनिस्‍टर की जरूरत है और वीपी इस खांचे में फिट  बैठते हैं। 


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हालांकि सही साबित हुए वीपी सिंह
वीपी सिंह ए‍क मझे प्रशासक थे, उन्‍हें पता था वह कहां हाथ डाल रहे हैं, यहीं कारण है कि इतने बड़ पैमाने पर रेड डालने का फैसला लेने से उन्‍होंने किसी तरह का परहेज भी नहीं किया। लंबी रेड के बाद जो देश के सामने आया वह आखें खोल देने वाला था। रेड के चलते टैक्‍स अधिकारियों ने उस दौर में 500 करोड़ रुपए की टैक्‍स चोरी के मामले पकड़े। उन्‍होंने इंडियन कॉर्पोरेट वर्ल्‍ड के करीब 5000 ठिकानों पर छापे मारे। इसमें से करीब 300 करोबारी घरानों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की गई।  

 

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