बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Companiesमुकेश अंबानी की होने वाली बहू श्‍लोका पैसों को बस एक साथी मानती हैं, कमाई से ज्‍यादा फोकस मानस सेवा पर है

मुकेश अंबानी की होने वाली बहू श्‍लोका पैसों को बस एक साथी मानती हैं, कमाई से ज्‍यादा फोकस मानस सेवा पर है

श्‍लोका हीरा कारोबारी और रोजी ब्लू के मालि‍क रसेल मेहता की बेटी हैं।

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नई दि‍ल्‍ली। देश के अमीर शख्‍स मुकेश अंबानी के बेटे आकाश अंबानी की शादी श्‍लोका मेहता से होने जा रही है। श्‍लोका हीरा कारोबारी और रोजी ब्लू के मालि‍क रसेल मेहता की बेटी हैं। इनकी शादी की चर्चा पि‍छले दो माह से चल रही है। शुक्रवार को इनका प्री इंगेजमेंट फंक्‍शन हुआ और शनि‍वार देर रात तक उनकी सगाई का फंक्‍शन जारी था। दोनों की शादी इस साल दिसंबर में हो सकती है।

आकाश अंबानी को जहां एक बेहतरीन बिजनेसमैन के तौर पर देखा जाता रहा है वहीं श्‍लोका की छवि एक परोपकारी लड़की की है, जि‍सका फोकस मानव सेवा पर है। आइए जानते हैं कि श्‍लोका मेहता आखि‍र क्‍या करती हैं। बिजनेस फैमिली से आने के बाद भी श्‍लोका मेहता ने फैमिली बिजनेस ज्‍वाइन नहीं किया है।  श्‍लोका के मुताबिक, पैसा निश्चित तौर पर आपका बड़ा साथी है, लेकिन इंसानी रिसोर्स की वैल्‍यू कहीं ज्‍यादा है। आगे पढ़ें 

रोजी ब्लू फाउंडेशन की निदेशक हैं श्‍लोका 
श्‍लोका मेहता रोजी ब्लू फाउंडेशन की निदेशक हैं। यह फाउंडेशन उनकी पारिवारिक कंपनी रोजी ब्‍लू डायमंड की परोपकार से जुड़ी इकाई है। 2014 में एग्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर बनने से पहले श्‍लोका के पास इस तरह के कामों का कोई अनुभव नहीं था। यह फाउंडेशन शिक्षा के क्षेत्र में इनोवेशन और सस्‍टेनेबिलिटी पर फोकस करता है। श्‍लोका ने 2009 में धीरूभाई अंबानी इंटरनेशन स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से मानवशास्त्र की पढ़ाई की। इसके बाद लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस से विधि शास्त्र में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की। 


पैसे कमाने पर कम फोकस 
करीब 3 साल पहले अंग्रेजी बिजनेस डेली मिंट से बातचीत में श्‍लोका ने बताया था कि बिजनेस फैमिली से आने के बाद भी उनका फोकस पैसे कमाने से ज्‍यादा परोपकार पर था। बकौल श्‍लोका जब उन्‍होंने अपने ग्रैंड फादर अरुण कुमार रमनिकलाल मेहता को फाउंडेशन से जुड़ने की बात बताई तो उन्‍होंने साफ सलाह दी कि तुम इस फाउंडेशन से जुड़कर दिमागी संतुष्‍टी तो हासिल कर सकती हो मगर बहुत कमाई की उम्‍मीद मत करना।  आगे पढ़ें 

 

पैसा जरूरी नहीं 
श्‍लोका के मुताबिक, शुरू शुरू में उन्‍हें लगता था कि बिना पैसे के चैरिटी शायद मुश्किल होती है। हालांकि अब उनकी सोच बदल चुकी है। श्‍लोका के मुताबिक, पैसा निश्चित तौर पर आपका बड़ा साथी है, लेकिन इंसानी रिसोर्स की वैल्‍यू कहीं ज्‍यादा है। परोपकार दूसरों की  मुश्किलें आसान करने के लिए होता है और इसे आप अपना समय देकर भी कर सकते हैं।  

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