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शिकंजे में विजय माल्या: ब्रिटिश सरकार की मंजूरी के बाद भी भारत लाने में लग सकते हैं कई साल, ये हैं कारण

बैंकों का 9000 करोड़ का लोन लेकर 2016 में ब्रिटेन भाग गया था माल्या

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नई दिल्ली। ब्रिटिश सरकार ने भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी है। ब्रिटिश गृहमंत्री साजिद जाविद ने सोमवार को माल्या को प्रत्यर्पित करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए, जिसकी अनुमति लंदन की एक अदालत ने पहले ही दे दिया था। लेकिन इस मंजूरी के बाद भी माल्या को भारत लाने में सालों का वक्त लग सकता है। 

 

इसलिए हो सकती है माल्या को भारत लाने में देरी
ब्रिटेन के कानून के जानकारों के अनुसार , माल्या के पास ब्रिटेन गृहमंत्रालय के आदेश को चुनौती देने के लिए 14 दिनों का समय है। यदि उनकी अपील स्वीकार कर ली जाती है तो उसकी सुनवाई 5-6 महीने में पूरी होगी। यदि माल्या यहां भी केस हार जाते हैं तो वह ब्रिटेन के सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई पूरी होने में महीनों या कई साल लग सकते हैं। कानून के जानकारों का कहना है कि अगर ब्रिटेन सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई के लिए अपील करता है तो इसके लिए भी उसे कारण बताने होंगे। यदि ब्रिटेन ने उपयुक्त कारण नहीं बताया तो सुप्रीम कोर्ट अपील खारिज कर सकता है। ऐसे में ब्रिटेन सरकार की मंजूरी के बाद भी माल्या को लाने में लंबा वक्त लग सकता है। 

2 मार्च 2016 को भारत से भाग गया था माल्या


ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत ने 10 दिसंबर के अपने फैसले में माल्या को प्रत्यर्पित करने के आदेश दिए थे। माल्या (63) ने 9,000 करोड़ रुपए के ऋण की धोखाधड़ी के बाद 2 मार्च, 2016 को भारत से भाग गया था। उसने यह ऋण इस समय बंद हो चुकी अपनी कंपनी किंगफिशर के लिए लिया था। भारतीय स्टेट बैंक एसबीआई के नेतृत्व वाले 13 बैंकों का एक संघ माल्या के खिलाफ ऋण वसूली कार्यवाही शुरू करने की तैयारी कर रहा है। माल्या के खिलाफ मुंबई की एक विशेष अदालत में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम के तहत सुनवाई जारी है। भारत ने 2017 के अंत में माल्या के खिलाफ प्रत्यर्पण की कार्यवाही शुरू की थी, जिसका उसने विरोध किया था। वह फिलहाल लंदन में जमानत पर बाहर है।

ब्रिटिश फैसले का भारत ने स्वागत किया


भारत ने सोमवार को उद्योगपति विजय माल्या के प्रत्यर्पण पर ब्रिटिश सरकार के फैसले का स्वागत किया। भारतीय शराब कारोबारी माल्या बैंकों को 9000 करोड़ रुपए का चूना लगाने के आरोपों में वांछित हैं। सरकार के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने विजय माल्या को भारत को सौंपने के आदेश पर ब्रिटेन के गृहमंत्री साजिद जाविद द्वारा हस्ताक्षर किए जाने को संज्ञान में लिया है। सूत्रों ने कहा कि हम ब्रिटिश सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। हमें उनके प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया जल्द पूरी होने का इंतजार है। 

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