विज्ञापन
Home » Industry » CompaniesThese Three International Companies Allowed Employees To Wear Casual Dress At Work

सूट-बूट पहनकर ऑफिस आना अब जरूरी नहीं, इन तीन बड़ी कंपनियों ने Employees को दी अपनी मर्जी से कपड़े पहनने की छूट

खुद को युवाओं के मुताबिक ढालने के लिए कंपनियों ने पारंपरिक पहनावे को कहा अलविदा

1 of

नई दिल्ली.

डिजिटल युग में लोगों की लाइफ स्टाइल और कपड़ों की पसंद भी तेजी से बदल रही है। इसका असर बड़ी कंपनियों पर भी हो रहा है। फाइनेंस कंपनी Goldman Sachs सहित तीन बड़ी कंपनियों ने पिछले एक महीने में अपने ड्रेस कोड में बदलाव किया है। गोल्डमैन साक्स के पहले के ड्रेस कोड के मुताबिक स्टाफ के लिए सूट पहनकर ऑफिस आना अनिवार्य था। गोल्डमैन साक्स के अलावा एयरलाइंस Virgin Atlantic और इंटरनेशनल रिटेल ब्रांड Target ने भी अपने ड्रेस कोड में बदलाव कर दिया है।

 

Goldman Sachs ने हटाई पाबंदी

गोल्डमैन साक्स ने नए नियमों में सूट पहनकर ऑफिस आने की पाबंदी हटा दी है। कंपनी ने अपने इंटरनल नोट में कहा है, ‘हमारा क्लाइंट बेस दुनियाभर में फैला हुआ है। हम चाहते हैं कि जब कोई क्लाइंट हमारे स्टाफ से मिले तो उसे ज्यादा से ज्यादा सहजता महसूस हो। हम जानते हैं कि हर दिन कैजुअल ड्रेस नहीं पहना जा सकता है। लेकिन, हम तय कर सकते हैं कि कब किस मौके पर किस तरह का ड्रेस पहनना चाहिए।’

 

Target ने दी जींस और चिनोज पहनने की छूट

पिछले महीने इंटरनेशनल रिटेल ब्रांड टार्गेट ने भी ड्रेस कोड में बदलाव किया। इसने अपने कर्मचारियों को जींस और चिनोज पहनकर वर्क प्लेस पर आने की इजाजत दे दी है। पहले कंपनी सिर्फ शुक्रवार को कैजुअल ड्रेस पहनने की इजाजत देती थी। अब इसे हर दिन के लिए लागू कर दिया गया है।

 

Virgin Atlantic में महिला अटेंडेंट के लिए स्कर्ट पहनना अनिवार्यता नहीं

एयरलाइंस कंपनी वर्जिन अटलांटिक ने भी अपना ड्रेस कोड बदला था। कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अब महिला फ्लाइट अटेंडेंट के लिए स्कर्ट की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। वे फ्लाइट में पैंट पहनकर भी आ सकती हैं। पहले महिला अटेंडेंट को पैंट पहनने की इजाजत तभी मिलती थी जब वे इसके लिए पहले से आवेदन करती थीं। वर्जिन अटलांटिक के एक्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट मार्क एंडरसन ने कहा, ‘कंपनी ने हाल ही में अपने कर्मचारियों की पसंद को लेकर एक सर्वे कराया था। ड्रेस कोड में बदलाव से हमारी महिला कर्मचारियों को अपनी पहचान बेहतर तरीके से जाहिर करने का मौका मिलेगा।’

 

नई जेनरेशन के चलते कंपनियां बदल रहीं अपने नियम

सोसाइटी फॉर ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट के एक सर्वे के मुताबिक 2018 में कैजुअल ड्रेस पहनने की इजाजत देने वाली कंपनियों की संख्या 2014 की तुलना में 18% बढ़ी है। सर्वे के मुताबिक वर्क फोर्स में जेनरेशन वाई (1980 से 1994 के बीच पैदा होने वाले) और जेनरेशन जेड (1995 या इसके बाद पैदा होने वाले) की संख्या बढ़ने के कारण कंपनियों में ड्रेस कोड बदलने का ट्रेंड बढ़ा है। इन पीढ़ियों के युवा ज्यादा आजादी चाहते हैं। इसमें कपड़ों से जुड़ी आजादी भी शामिल है।

 

Google, Facebook जैसी टेक कंपनियां पहले से दे रही हैं छूट

सोसाइटी फॉर ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट के मुताबिक ग्लोडमैन साक्स जैसी फाइनेंस कंपनियों को टैलेंट हंट के लिए गूगल, फेसबुक जैसी टेक कंपनियों से मुकाबला करना होता है। इन टेक कंपनियों में पहले से ही कैजुअल ड्रेस पहनने की आजादी है। अगर फाइनेंस या एयरलाइंस कंपनियां अपने पुराने ढर्रे पर ही अटकी रहीं तो युवा टैलेंट इन्हें ज्वाइन करने से कतराने लगेंगे। इसी को भांपते हुए ये कंपनियां भी अब खुद को बदल रही हैं।

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट
विज्ञापन
विज्ञापन