ये 5 ट्रेंड्स 2019 में कर सकते हैं रियल एस्टेट बाजार पर राज

बहुत से ऐसे बहुआयामी रुझान हो सकते हैं जो वर्ष 2019 में भारतीय रियल एस्टेट बाजार पर अपना दबदबा बनाए रख सकते हैं लेकिन इन 5 प्रमुख रुझानों को एक व्यावहारिक तरीके से और एक बेहतर अंदाज में इस तरह से देखा जा सकता है।

Money Bhaskar

Jan 16,2019 12:46:00 PM IST

नई दिल्ली। बहुत से ऐसे बहुआयामी रुझान हो सकते हैं जो वर्ष 2019 में भारतीय रियल एस्टेट बाजार पर अपना दबदबा बनाए रख सकते हैं लेकिन इन 5 प्रमुख रुझानों को एक व्यावहारिक तरीके से और एक बेहतर अंदाज में इस तरह से देखा जा सकता है।

किफायती आवास: पिछले कुछ वर्षों में, प्रमुख जोर सस्ती आवास पर है, जो लाखों लोगों की जरूरतों को पूरा करने और ’हाउसिंग फॉर ऑल 2022’ के पीएम के मिशन को पूरा करने के लिए है और वर्ष 2019 में अफोर्डेबल हाउसिंग के रूप में इस रूझान में तेजी आएगी। सस्ते घरों की मांग सबसे अधिक है और अपने नाम के अनुसार ये व्यापक वर्ग के लिए अधिक सस्ता भी है।

आसान उपलब्धताः नए परिवहन गलियारों, एक्सप्रेसवे, फ्लाईओवर, सड़कों, पुलों के खुलने के साथ और दूर दराज के क्षेत्रों तक पहुंचने वाले मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के साथ, दूर दराज के स्थान भी मेट्रो शहरों से एक आसान नेटवर्क से जुड़ रहे हैं और लोगों को आने जाने के लिए कई विकल्प मिल रहे हैं। इन क्षेत्रों में रहने और काम करने के लिए जनता जहां से वे दैनिक आधार पर आसानी से आना जाना कर सकते हैं। यह आने वाले वर्ष में बुनियादी ढांचे के समग्र सुधार की ओर भी ले जाएगा।


कमर्शियल और ऑफिस स्पेसेजः आने वाले वर्ष में, आवास के अलावा कमर्शियल और ऑफिस स्पेसेज की उपलब्धता में भी सुधार होगा। दूर दराज के स्थानों तक आसान पहुंच और बुनियादी ढांचे के समग्र सुधार के कारण ऐसा होगा।

नई नीतियों का प्रसारः पिछले दो वर्षों में डीमॉनेटाइजेशन, जीएसटी के कार्यान्वयन और रेरा जैसी नई नीतियों के निर्माण जैसे कुछ प्रमुख कारकों ने रियल एस्टेट बाजार को प्रभावित किया है लेकिन अब बेहतर संभावनाओं के लिए हालात सामान्य हो गए हैं। रेरा का आगमन जो खरीदारों के अनुकूल है और रियल एस्अेट बाजार में व्याप्त मुद्दों और समस्याओं को संबोधित करता है, ने संपत्ति खरीदने और निवेश करने में खरीदारों का विश्वास बढ़ाया है और वर्ष 2019 में सौदे में सुधार की उम्मीद है।

चुनावी वर्षः वर्ष 2019 प्रमुख भारतीय चुनावी वर्ष है और इसके परिणामों पर लोगों की नजर है। चुनाव परिणाम ही देश में राजनीतिक और सामाजिक स्थिति को तय करेगी और इस प्रभाव ही लोगों को कुछ हद तक प्राॅपर्टी खरीदने या खरीदने में स्थगित करने या के फैसले को प्रभावित कर सकता है।

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