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सरोगेसी के कारोबार में देश के 3000 क्लीनिक, भारत में सरोगेसी का खर्च 10 से 25 लाख, अमेरिका में लगते हैं 60 लाख

एक महिला एक ही बार सरोगेट मदर बन सकेगी

Surrogacy Bill passed in loksabha
लोकसभा में ध्वनिमत से पारित सरोगेसी (नियामक) विधेयक, 2016 का चिकित्सकों ने स्वागत किया है। चिकित्सकों का कहना है कि इससे सरोगेसी का गलत इस्तेमाल नहीं हो सकेगा और गरीब महिलाओं को पैसे के लोभ में इस काम के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने जो कानून पारित किया है उसके अनुसार एक महिला एक ही बार सरोगेट मदर बन सकेगी। इसके लिए उसका विवाहित होना और पहले से एक स्वस्थ बच्चे की मां होना जरूरी होगा। 

नई दिल्ली। लोकसभा में ध्वनिमत से पारित सरोगेसी (नियामक) विधेयक, 2016 का चिकित्सकों ने स्वागत किया है। चिकित्सकों का कहना है कि इससे सरोगेसी का गलत इस्तेमाल नहीं हो सकेगा और गरीब महिलाओं को पैसे के लोभ में इस काम के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। सरकार ने जो कानून पारित किया है उसके अनुसार एक महिला एक ही बार सरोगेट मदर बन सकेगी। इसके लिए उसका विवाहित होना और पहले से एक स्वस्थ बच्चे की मां होना जरूरी होगा। सरोगेसी करवाने वाले पुरुषों की उम्र 26 से 55 के बीच और महिला की उम्र 23 से 50 साल के बीच होनी चाहिए। शादी के पांच साल बाद ही इसकी इजाजत होगी और यह काम रजिस्टर्ड क्लीनिकों में ही होगा।

सरोगेसी के लिए विदेश से कम खर्च

फर्टिलिटी सॉल्यूशन मेडिकवर फर्टिलिटी की क्लिनिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसलटेंट डॉ. श्वेता गुप्ता के मुताबिक पिछले कुछ सालों से भारत में सरोगेसी का कारोबार बहुत तेजी से बढ़ा है। आकड़ों के अनुसार हर साल विदेशों से आए दंपती यहां 2,000 बच्चों को जन्म देते हैं और करीब 3,000 क्लीनिक इस काम में लगे हुए हैं। गर्भधारण में दिक्कत होने की वजह से जो लोग मां-बाप नहीं बन पाते, वे किराए की कोख से बच्चा पैदा करते हैं। भारत में इसका खर्च 10 से 25 लाख रुपए के बीच आता है, जबकि अमेरिका में इसका खर्च करीब 60 लाख रुपये तक आ सकता है। 

 

सिर्फ भारतीय के लिए सरोगेसी की सुविधा

नए कानून के बाद मजबूर महिला के सरोगेसी के लिए शोषण की गुंजाइश नहीं रहेगी। सरकार देश में सरोगेसी को रेगुलेट करने के लिए एक नया कानूनी ढांचा तैयार करना चाहती है। सरोगेसी का प्रावधान केवल नि:संतान दंपतियों के लिए होगा। सरोगेसी के अनैतिक इस्तेमाल पर रोक लगेगी। सरोगेसी का अधिकार सिर्फ भारतीय नागरिकों को होगा। यह सुविधा एनआरआई और सीआई होल्डर को नहीं मिलेगा। इसके अलावा सिंगल पैरेंट्स, समलैंगिक जोड़ों, लिव इन पार्टनरशिप में रहने वालों को सरोगेसी की इजाजत नहीं होगी। पहले भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने एक महिला के लिए अधिकतम तीन बार सरोगेट मदर बनने की सीमा निर्धारित की थी। हालांकि, हालिया विधेयक ने इसे अब एक कर दिया है। सरोगेसी (नियामक) विधेयक, 2016 सरोगेसी के प्रभावी नियमन को सुनिश्चित करेगा, व्यावसायिक सरोगेसी को प्रतिबंधित करेगा और बांझपन से जूझ रहे भारतीय दंपतियों की जरूरतों के लिए सरोगेसी की इजाजत देगा।

 

शौक के लिए सरोगेसी पर रोक

चिकित्सकों के मुताबिक सरोगेसी (किराए की कोख) कुछ सेलेब्रिटीज के लिए एक शौक बन गई है और जो पहले ही संतान को जन्म दे चुके हैं वे भी सरोगेसी का इस्तेमाल कर रहे हैं। आमतौर पर गर्भधारण में परेशानी होने की वजह से दंपति सरोगेसी की मदद लेते हैं। इस प्रक्रिया में पुरुष के स्पर्म और स्त्री के एग को बाहर फर्टिलाइज करके सरोगेट मदर के गर्भ में रख दिया जाता है। अब तो महिलाएं प्रेग्नेंसी के दर्द से बचने के लिए इस आसान रास्ते का इस्तेमाल करने लगी हैं। बायोलॉजिकल बच्चे की इच्छा के आधार पर सरोगेसी में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है। आमतौर पर दंपति दो से तीन बार बच्चे पैदा करने में विफल होने के बाद इस विकल्प को चुनते हैं।

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