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571 दिनों से दिवालियापन की कार्यवाही में फंसी इस कंपनी की बिक्री का रास्ता सुप्रीम कोर्ट ने किया साफ

दिवालिया प्रक्रिया की समयसीमा 270 दिन है

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नई दिल्ली. 

उच्चतम न्यायालय ने कर्ज में फंसी एस्सार स्टील लिमिटेड के 28 परिचालन ऋणदाताओं की याचिका को आज खारिज कर दिया। इसमें मांग की गई थी कि आर्सेलरमित्तल की बोली पर कोई फैसला लिए जाने से पहले राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) में उनका पक्ष सुना जाए। शीर्ष अदालत ने साथ ही परिचालन ऋणदाताओं की उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें एनसीएलएटी के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। पंचाट ने एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ से कहा था कि वह 11 फरवरी तक आर्सेलरमित्तल की बोली पर फैसला करे।

 

270 दिन है दिवालिया प्रक्रिया की समयसीमा 

न्यायालय ने कहा कि एस्सार स्टील के प्रवर्तक दिवालिया प्रक्रिया में देरी के लिए परिचालन ऋणदाताओं और छद्म लोगों के जरिये काम कर रहे हैं। कंपनी के खिलाफ दिवालिया कार्यवाही को शुरू हुए 571 दिन हो चुके हैं और इसमें अब देरी नहीं होनी चाहिए। दिवालिया प्रक्रिया की समयसीमा 270 दिन है।

 

 

एनसीएलटी लेगा आर्सेलरमित्तल की बोली पर फैसला

इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड और गुजरात सरकार जैसे परिचालन साझेदारों ने क्रमश: 3,500 करोड़ रुपए और 500 करोड़ रुपए के बकाये के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय ने कहा कि एनसीएलएटी ने भी कहा है कि परिचालन ऋणदाताओं के केवल एक ही प्रतिनिधि को एस्सार स्टील पर आर्सेलरमित्तल की समाधान योजना पर कोई भी आपत्ति जताने का मौका दिया जा सकता है। न्यायालय के आज के आदेश के बाद एनसीएलटी के आर्सेलरमित्तल की बोली पर फैसला लेने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

 

 

ऋणदाताओं को 13 फरवरी तक लिखित में देना होगा आवेदन 

एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ ने परिचालन ऋणदाताओं द्वारा आर्सेलरमित्तल की बोली पर उठाई गई आपत्तियों पर आज अपना आदेश सुरक्षित रखा और परिचालन ऋणदाताओं को 13 फरवरी तक अपना आवेदन लिखित में देने को कहा। एस्सार स्टील के ऋणदाताओं की समिति ने इससे पहले एनसीएलटी में तर्क दिया था कि जिन परिचालन ऋणदाताओं का एक करोड़ रुपए से कम बकाया है उन्हें कुल मिलाकर 196 करोड़ रुपए मिलेंगे जबकि जिनका एक करोड़ रुपए से अधिक बकाया है उन्हें सांकेतिक राशि के रूप में एक रुपया मिलेगा। अगर एस्सार स्टील का परिसमापन होता तो परिचालन ऋणदाताओं को कुछ नहीं मिलता। ऐसे में उनके लिए आर्सेलरमित्तल की 42,000 करोड़ रुपए की बोली सर्वश्रेष्ठ विकल्प थी।

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