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कभी माल खरीदने को तैयार नहीं थे डीलर, 3 भाइयों ने हौसले से खड़ी 3000 हजार करोड़ की कंपनी

मेहरा भाइयों ने फोर्ब्‍स को बताई सेनेटरी ब्रांड जैकुआर की सफलता की कहानी

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नई दिल्‍ली. यूं तो देश में दर्जनों विदेशी सेनेटरी और बाथरूम फिटिंग ब्रांड्स हैं। हालांकि इन सबको जो देसी ब्रांड टक्‍कर देता रहा है वह है जैकुआर। आज करीब 3 हजार करोड़ के टर्नओवर वाला यह ब्रांड देश के उन चुनिंदा ब्रांड्स में शामिल है, जिसके ऊपर किसी भी तरह का कोई कर्ज नहीं है। इसकी शुरुआत करने वाले 3 मेहरा भाइयों की सफलता की कहानी बेहद हौसला देने वाली है। तीनों भाइयों ने जब भारत में प्रीमियम सेनेटरी ब्रांड की शुरुआत की, तो कोई डीलर उनका माल खरीदने को तैयार नहीं था। आज यह ब्रांड देश का नंबर-1 सेनेटरी ब्रांड बन चुका है। कंपनी का सलाना रेवेन्‍यू 3000 करोड़ रुपए से ज्‍यादा हो गया है। मेहरा भाइयों ने हाल में फोर्ब्‍स मैगजीन को अपनी सफलता की कहानी बताई।

 
कौन हैं मेहरा ब्रदर्स  
मेहरा ब्रदर्स प्रीमियम सेनेटरी ब्रांड जैकुआर के प्रमोटर और फाउंडर दोनों हैं। इसके नाम राजेश मेहरा, कृषन मेहरा और अजय मेहरा हैं। तीनों भइयों ने 1986 में जैकुआर सेनेटरी ब्रांड की नींव डाली थी। परिवार की अगली पीढ़ी भी कारोबार में आ चुकी है। मेहरा परिवार मूल तौर पर दिल्‍ली का रहने वाला है। जैकुआर सेनेटरी ब्रांड देश के टॉप सेनेटरी ब्रांड में माना जाता है।  
 
जो बिजनेस शुरू किया वह झगड़े की भेट चढ़ गया
फोर्ब्‍स से बातचीत में राजेश मेहरा ने बताया कि ऐसा नहीं कि सेनेटरी फिटिंग बिजनेस में वो लोग नए थे। उनके पिता NL मेहरा भी इसी कारोबार में थे। NL मेहरा ने 1960 के दशक में एक अन्‍य पार्टनर के साथ मिलकर दिल्‍ली से ही सेनेटरी ब्रांड Essco की शुरुआत की। हालांकि शुरुआत में दोनों पार्टनर को काफी मुश्किलों को सामना करना पड़ा। देश में सेनेटरी प्रोडक्‍ट को लेकर लोगों का माइंडसेट सामान्‍य था। बाथरूम फिटिंग से जुड़ी चीजें भी गेहूं चावल की तरह बिना ब्रांड की बिकती थी। NL मेहरा का आइडिया जाया नहीं गया। उन्‍होंने रियल एस्‍टेट से जुड़ी कंपनियों और डीलर्स का सहारा लिया। कुछ सालों बाद कंपनी चल निकली। पर कारोबार का यह हनीमून पीरियड ज्‍यादा दिनों तक नहीं टिका। एक दिन ऐसा आया, जब कारोबार के बीच 2 पार्टनर्स के आपसी हित आड़े आ गए।
 
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ऐसे झगड़े की भेंट चढ़ी कंपनी
NL मेहरा का कारोबार चल निकला था तो दोनों पार्टनर ने मिलकर 1972 में अपनी पहली फैक्‍ट्री शुरू की। 3 साल बाद कंपनी ने बाथरूम फिटिंग का दूसरा सब ब्रांड  Deluxe शुरू किया। 1980 तक आते-आते Essco का पूरे भारत में नेटवर्क हो गया। देश के हर शहर में अब कंपनी की पहुंच थी। मार्केट में लोग इस नाम को पहचानने लगे थे। उत्‍तर भारत में यह सबसे ज्‍यादा बिकने वाला ब्रांड हो चुका था। हालांकि यह सफलता ज्‍यादा दिनों तक नहीं टिक पाई। राजेश के मुताबिक, पिता NL मेहरा और उनके पार्टनर के बीच मतभेद उभर आए। राजेश के मुताबिक, उनके पिता कारोबार को नई ऊंचाई पर ले जाना चाहते थे, पर उनके पार्टनर तैयार नहीं थे। आखिर में वही हुआ जिसका डर था। Essco बंट गई। कंपनी को चलाने का मेरे पिता का अधिकार अब हिस्‍सेदारी की पेचीदगी में फंस गया।
 
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बेटों ने जीरो से की शुरुआत
NL मेहरा उम्र के आखिर पड़ाव की ओर बढ़ रह थे। तीनों भाइयों ने ऐसे में बड़ा फैसला लिया। उन्‍होंने Essco ब्रांड को बढ़ाने की बजाय अब अपना एक नया ब्रांड शुरू करने का निर्णय लिया, ताकि अब फिर से किसी पार्टनरशि की पेचीदगी उनकी हौसले की उड़ान न रोक सके। राजेश बताते हैं कि तीनों भाइयों ने मिलकर कर तय किया कि वे नया लग्‍जरी ब्रांड जैकुआर शुरू करेंगे। राजेश के मुताबिक, हमारे पिता सेनेटरी फिटिंग के जाने माने कारोबारी थी, लेकिन हमें जीरो से शुरुआत करनी थी। हालांकि मुश्किल यह थी कि इंडियन मार्केट ने ऐसा कोई प्रयोग किया नहीं था। हालांकि तीनों भाइयों ने अपने आइडिया पर ही आगे बढ़ने का निर्णय लिया। उन्‍हें लगा कि पहले से स्‍थातिप कंपनी के प्रमोटर होने के नाते वे आसानी से अपने ब्रांड को आगे बढ़ा लेंगे। लेकिन यहां एक नई मुसीबत उनका इंतजार कर रही थी।
 
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माल भी खरीदने का तैयार नहीं हो रहे थे डीलर
अजय मेहरा बताते हैं कि हमने जैकुआर ब्रांड की शुरुआत कर दी। पर जब डीलर्स के पास गए तो उन्‍होंने माल लेने से मना कर दिया। उनका कहना था कि जिस देश में आम सेनेटरी बाथरूम फिटिंग खरीदने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं, वहां लग्‍जरी सेनेटरी फिटिंग आखिर कौन खरीदेगा। हालांकि एक रास्‍ता जब बंद होता है तो हजार रास्‍ते खुलते हैं। मेहरा भाइयों के लिए डीलर्स का इनकार भी कुछ ऐसा ही साबित हुआ।   
 
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अपने आइडिया से बदल दिया मार्केट  
डीलर्स के इनकार के बाद तय किया कि वे अपना ब्रांड बेचने के लिए अब डीलर्स का सहारा ही नहीं लेंगे। उन्‍होंने एक कस्‍टमर केयर सेंटर की शुरुआत की। इसी के जरिए ही उन्‍होंने कस्‍टमर क्रैक करने शुरू किए। कंपनी ने इंस्‍टालेशन और रीपेयर दोनों सेवाएं देनी शुरू कीं। कंपनी को इसके दो फायदे हुए। इंस्‍टालेशन से जहां ग्राहको के बीच जैगुआर ब्रांड का भरोसा बढ़ा, वहीं दूसरी ओर बिल्‍डर्स और डीलर्स के बीच यह मैसेज भी गया कि यह ब्रांड लंबी योजना के साथ मार्केट में उतरा है।
 
30 लाख से 3000 करोड़ पर पहुंचा रेवेन्‍यू
अजय मेहरा के मुताबिक, पहले साल कंपनी का रेवेन्‍यू 30 लाख रुपए रहा। हालांकि जैसे जैसे मार्केट बढ़ा कंपनी पॉपुलर होती चली गई। कंपनी ने भारतीय जरूरतों के हिसाब से वाशरूम डेवलप किए। अपने प्रोडक्‍ट में रोज नए इनोवेशन किए। पिछले वित्‍त वर्ष में कंपनी का टर्नओवर 3100 करोड़ से ज्‍यादा पहुंच गया।
 
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