हाकिंग जैसी स्‍मार्ट थी उनकी व्‍हीलचेयर, बिना बोले दुनिया को बताती थी सारी बातें

स्‍टीफन हॉंकिंग स्‍टीफन हॉंकिंग
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stephen hawking birthday special  फिल्म जीरो में एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने वैज्ञानिक स्‍टीफंस हाकिंग से प्रेरित रोल में उनकी व्हील चेयर काफी चर्चा में रही। साइंस से जुड़ा आकादमिक वर्ल्‍ड स्‍टीफंस हाकिंग को ऐसे वैज्ञानिक के तौर पर जानता था, जिसके पास भौतिक विज्ञान (फिजिक्‍स) की जटिल से जटिल पहेली का जवाब होता था। हालांकि आम लोगों के लिए वो खास तरह की व्‍हीलचेयर पर हमेशा बैठे रहने वाले वैज्ञानिक थे, जिसे आइंस्‍टीन की टक्‍कर का दिमागदार माना जाता था। दुनिया में जितना आइंस्‍टीन फेमस हुए उतनी ही फेमस उनकी व्‍हील चेयर भी हुई। हॉकिंग का यही घर थी। वह 24 घंटे इसी पर रहते थे।

moneybhaskar.com

Jan 08,2019 02:26:00 PM IST

नई दिल्‍ली। फिल्म जीरो में एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने वैज्ञानिक स्‍टीफंस हाकिंग से प्रेरित रोल में उनकी व्हील चेयर काफी चर्चा में रही। साइंस से जुड़ा आकादमिक वर्ल्‍ड स्‍टीफंस हाकिंग को ऐसे वैज्ञानिक के तौर पर जानता था, जिसके पास भौतिक विज्ञान (फिजिक्‍स) की जटिल से जटिल पहेली का जवाब होता था। हालांकि आम लोगों के लिए वो खास तरह की व्‍हीलचेयर पर हमेशा बैठे रहने वाले वैज्ञानिक थे, जिसे आइंस्‍टीन की टक्‍कर का दिमागदार माना जाता था। दुनिया में जितना आइंस्‍टीन फेमस हुए उतनी ही फेमस उनकी व्‍हील चेयर भी हुई। हॉकिंग का यही घर थी। वह 24 घंटे इसी पर रहते थे। दरअसल 1963 में मात्र 21 साल की उम्र में हाकिंग मोटर न्‍यूरॉन डिसीज का शिकार हो गए थे। इसके चलते वह बोलने में भी असमर्थ भी हो गए और हमेशा व्‍हीलचेयर पर आ गए। आज 8 जनवरी को उनके जन्मदिन के दिन उनकी इसी व्हीलचेयर के बारे में बता रहे हैं।

आम नहीं खास थी हॉकिंग की व्‍हील चेयर

स्‍टीफन हाकिंग की व्‍हील चेयर कोई सामान्य व्हीलचेयर नहीं थी। इसमें ऐसे इक्विपमेंट्स लगे थे, जिनके जरिए वे विज्ञान के अनसुलझे रहस्यों के बारे में दुनिया को बताते थे। उनकी व्हील चेयर के साथ एक विशेष कम्प्यूटर और स्पीच सिंथेसाइजर लगा था, इसी के सहारे हाकिंग पूरी दुनिया से बात करते थे। यह व्‍हील चेयर बिना बोले ही हाकिंग की बात समझ लेती थी और दुनिया को बता देती थी।

चश्‍मे के जरिए समझती थी हॉकिंग की बातें

हॉकिंग का सिस्टम इंफ्रारेड ब्लिंक स्विच से जुड़ा हुआ है, जो उनके चश्मे में लगाया गया था। हाकिंग अपने जबडे और आखों से इशारा करते थे और यह मशीन उनकी बातें सामने लगे डिस्‍प्‍ले बोर्ड पर लिख देती थी। इसी के माध्यम से वे बोलते थे। इसके अलावा उनके घर और ऑफिस के गेट रेडियो ट्रांसमिशन से जुड़ा हुआ था। इसी के जरिए उनकी बातें दुनिया को पता चल पाती थीं। हॉकिंग का जज़्बा ऐसा था कि वे पिछले कई दशकों से अपनी व्हील चेयर पर बैठे-बैठे अंतरिक्ष विज्ञान की जटिल पहेलियों और रहस्यों को सुलझा रहे थे।

ऐसे काम करता था काम

अपनी व्‍हीलचेयर पर हॉकिंग एक विंडो टैबलेट पीसी के जरिए दुनिया को अपनी बात बताते थे। यह एक सिंगल स्विच से चलता था। एक खास तरह का इंटरफेस यूज करता था, जिसे ई-जे कहा जाता था। यह ऑन स्‍क्रीन की बोर्ड पर हर लेटर को स्‍कैन करता था। हॉकिंग जैसे ही अपने जबडे हिलाते थे, ई-जे के सेंसर को इस मूवमेंट का पता चल जाता था। कम्‍प्‍यूटर स्‍कैनर को रोक देता था और नया अक्षर चुन लेता था। इसी के जरिए वह अपने मेल पढ़ते थे, कुछ सर्च करते थे या फिर स्‍काइप पर कॉल करते थे।

 

 

 

इंटेल ने तैयार किया था पूरा सिस्‍टम

 

दरअसल जिस मोटर मोटर न्‍यूरॉन बीमारी ने उन्‍हें बोलने लायक भी नहीं छोड़ा। इसके बाद चिप बनाने वाली मशहूर कंपनी इंटेल ने उनके लिए यह खास व्‍हीलचेयर और कम्‍प्‍यूटर तैयार किया। स्‍टीफन 1997 से इसी की मदद से बोलते थे। इसके लिए इंटेल ने ACAT नाम का एक खास ओपन सोर्स प्रग्राम तैयार किया। इसे ऐसे डिजाइन किया गया था कि इशारों के जरिए माउस को भी कंट्रोल सकता था। इंटेल ने उनके व्‍हील चेयर को स्‍पॉन्‍सर भी किया था।

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