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सिर पर आफत आते ही भिड़ गए 2 करोड़पति भाई, कभी दुनिया में जमाई थी धाक

10 हजार करोड़ में कंपनी बेचकर देश को कर दिया था हैरान, अब घर में ही शुरू हुई कलह

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नई दिल्ली। रैनबैक्सी और फोर्टिस हेल्थकेयर और रेलीगेयर जैसी नामी कंपनियों के प्रमोटर रहे सिंह भाइयों में कलह शुरू हो गई है। छोटे भाई शिविंदर सिंह ने अपने बड़े भाई मलविंदर सिंह और रेलीगेयर के पूर्व चीफ सुनील गोधवानी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। शिविंदर सिंह ने इन दोनों से अलग होने के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का दरवाजा भी खटखटाया है। मलविंदर ने कहा कि उन्होंने खुद को अपने बड़े भाई के साथ किसी भी पार्टनरशिप से अलग कर लिया है। बता दें कि खातों में धांधली को लेकर फोर्टिस हेल्थकेयर की ओर से स्वतंत्र जांच का निर्णय लिए जाने के बीच छोटे भाई नेे यह कदम उठाया है। 

 

परिवार में विवाद नहीं फैलाना चाहता था 

शिविंदर सिंह ने एक बयान में कहा कि उन्होंने मलविंदर और सुनील गोधवानी के खिलाफ एनसीएलटी में मामला दायर किया है। यह मामला आरएचसी होल्डिंग, रेलिगेयर और फोर्टिस में उत्पीड़न और कुप्रबंधन को लेकर दायर किया गया है। शिविंदर के मुताबिक, मलविंदर और गोधवानी के साझा कदमों से समूह की कंपनियों और शेयरधारकों के हितों को नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से यह कार्रवाई करना चाहते थे, लेकिन इस उम्मीद में रुके हुए थे कि उन्हें सद्बुद्धि आएगी और पारिवारिक विवाद का एक नया अध्याय नहीं लिखना पड़ेगा। इस बारे में फिलहाल मलविंदर सिंह की ओर से इस बारे में कोई बयान नहीं आया है।  

 

 

भरोसा तोड़ने का लगाया आरोप  
दो दशक से लोग मलविंदर और मुझे एक दूसरे का पर्याय समझते थे। हकीकत यह है कि मैं हमेशा उनका समर्थन करने वाले छोटे भाई की तरह था। मैंने सिर्फ फोर्टिस के लिए काम किया। 2015 में राधास्वामी सत्संग, ब्यास से जुड़ गया। मैं भरोसेमंद हाथों में कंपनी छोड़ गया था। लेकिन दो साल में ही कंपनी की हालत खराब हो गई। परिवार की प्रतिष्ठा के कारण अब तक चुप रहा। ब्यास से लौटने के बाद कई महीनों से कंपनी संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन विफल रहा। 

 

आगे जानें- आखिर क्या है दोनों भाइयों में विवाद की जड़..... 

 

विवाद की जड़ 10 साल पुरानी 
परिवार का यह झगड़ा रैनबैक्सी कंपनी को जापान की दाइची सांक्यो को बेचे जाने के बाद से शुरू हुआ था। इस कंपनी को एक दशक पहले 4.6 अरब डॉलर (तक करीब 1000 हजार करोड़)  में बेचा गया था। इसके बाद दोनों भाइयोंं ने मिलकर कई कारोबार में हाथ आजमाया, लेकिन ग्रुप भारी घाटे में आ गया और उस पर करीब 13,000 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया। समय पर कर्ज नहीं चुका पाने के चलते ग्रुप की कुछ कंपनियों को अटैच कर लिया गया। इसके चलते दोनों भाइयों को फोर्टिस हैल्थकेयर की अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ी। बिक्री के बाद फोर्टिस के खातों में धांधली के आरोप लगे। कहा गया कि दोनों भाइयों ने फोर्टिस के खातों से करीब 500 करोड़ रुपए ग्रुप की दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किए। 

 

आगे जानें-  फोर्टिस करा रही सिंह ब्रदर्स के खिलाफ जांच 

 

 

बाहरी एजेंसी से जांच कराएगी फोर्टिस 
इससे पहले फोर्टिस हेल्थकेयर ने कहा था कि वह एक बाहरी एजेंसी से कंपनी के फंड को गलत तरीके से दूसरी जगह ट्रांसफर किए जाने की स्वतंत्र जांच कराएगी। इससे पहले फरवरी में शुरू की गई जांच में कंपनी के खातों में कई तरह की गड़बड़ियां पाई गई थीं। फोर्टिस का कहना है कि कंपनी के खातों से करीब 500 करोड़ रुपए की रकम लगत तरीकों से दूसरी जगह ट्रांसफर की गई। सिंह बंधुओं ने फोर्ट‍िस हॉस्प‍िटल को बेंगलुरू स्थ‍ित मणिपाल हॉस्प‍िटल एंटरप्राइज को बेचा था। इसके साथ ही मणिपाल हॉस्प‍िटल ने सिंह बंधु की डायग्नोस्ट‍िक कंपनी SRL में भी हिस्सेदारी खरीदी थी। शिविंदर के ताजा कदम को नई जांच से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 

 

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