भाजपा शासित UP-महाराष्ट्र समेत कई राज्यों की वजह से खतरे में बिजली कंपनियों के 3 लाख करोड़ रुपए

Rupees 3 lakh crore private power investment at risk as discoms delay payments: बिजली मंत्रालय के प्राप्ति पोर्टल के अनुसार जीएमआर और अडाणी समूह की कंपनियों के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी को दिसंबर, 2018 तक राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) से 41,730 करोड़ रुपए की वसूली करनी थी। अब यह बकाया करीब 60,000 करोड़ रुपए का है।

 

Money Bhaskar

Mar 24,2019 06:50:00 PM IST

नई दिल्ली। राज्यों की ओर से महीनों से बिजली का भुगतान नहीं किए जाने की वजह से करीब एक दर्जन बिजली संयंत्रों में तीन लाख करोड़ रुपए का निजी निवेश जोखिम में है। सूत्रों ने यह जानकारी दी। बिजली मंत्रालय के प्राप्ति पोर्टल के अनुसार जीएमआर और अडाणी समूह की कंपनियों के अलावा सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी को दिसंबर, 2018 तक राज्यों की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) से 41,730 करोड़ रुपए की वसूली करनी थी। अब यह बकाया करीब 60,000 करोड़ रुपए का है। इनमें से आधी राशि बिजली क्षेत्र की स्वतंत्र उत्पादक इकाइयों को वसूलनी है।

उत्तर प्रदेश पर सबसे अधिक 6497 करोड़ का बकाया
पीटीआई के अनुसार, भाजपा शासित उत्तर प्रदेश पर सबसे अधिक 6,497 करोड़ रुपए का बकाया है जबकि महाराष्ट्र पर 6,179 करोड़ रुपए का बकाया है। जो अन्य राज्य समय पर बिजली उत्पादक कंपनियों को भुगतान नहीं कर रहे हैं उनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पंजाब शामिल हैं। प्राप्ति पोर्टल के अनुसार, उत्तर प्रदेश को अपने बकाया को चुकाने में 544 दिन लगते हैं जबकि महाराष्ट्र इसके लिए 580 दिन का समय लेता है। देश के सबसे अधिक औद्योगीकृत राज्य मसलन महाराष्ट्र और तमिलनाडु पर कुल का 80 प्रतिशत से अधिक का बकाया है। ये बिजली के सबसे बड़े उपभोक्ता राज्य हैं। शीर्ष दस राज्य भुगतान के लिए औसतन 562 दिन का समय लेते हैं।

बकाया नहीं मिलने से कंपनियों के सामने पूंजी का संकट
सूत्रों ने कहा कि भुगतान में देरी की वजह से निजी क्षेत्र की बिजली कंपनियों के समक्ष कार्यशील पूंजी का संकट पैदा हो रहा है। सूत्रों ने बताया कि बजाज समूह के स्वामित्व वाली ललितपुट पावर जेनरेशन कंपनी उत्तर प्रदेश की डिस्कॉम पर 2,185 करोड़ रुपए के बकाये की वजह से अपने करीब तीन हजार कर्मचारियों के वेतन का भुगतान नहीं कर पा रही है। यही नहीं कंपनी अपने पास जरूरी कोयले का भंडार भी रखने में विफल है।

एनपीसी का 17,187 करोड़ रुपए बकाया
दिसंबर, 2018 तक कुल 41,730 करोड़ रुपए के बिजली बकाए में से अडाणी समूह को 7,433.47 करोड़ रुपए और जीएमआर को 1,788.18 करोड़ रुपए की वसूली करनी है। सेम्बकॉर्प को 1,497.07 करोड़ रुपए वसूलने हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी को 17,187 करोड़ रुपए का बकाया वसूलना है।

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