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रामसिंह परमार बने GCMMF के नए चेयरमैन, जेठा भारवाड़ एक बार फिर वाइस चेयरमैन

आणंद (गुजरात). आणंद डेयरी के चेयरमैन रामसिंह परमार को सोमवार को सर्वसम्‍मति से गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्‍क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (GCMMF) का चेयरमैन चुन लिया गया। वहीं बीजेपी एमएलए जेठा भारवाड़ GCMMF के वाइस चेयरमैन बन गए। बता दें कि GCMMF अमूल ब्रांड की मार्केटिंग बॉडी है। 

 

इन दोनों पदों के लिए सोमवार को GCMMF के हेडक्‍वार्टर में चुनाव हुआ। इस मौके पर गुजरात की 18 डेयरी को-ऑपरेटिव्‍स के चेयरमैन भी मौजूद रहे। ये सभी GCMMF बोर्ड के सदस्‍य हैं। इस चुनाव का प्रभार गुजरात सरकार ने राज्‍य मंत्री भूपेन्‍द्र सिंह चूड़ासामा और कौशिक पटेल को सौंपा था। इनके साथ-साथ GCMMF के मैनेजिंग डायरेक्‍टर आरएस सोढी और डिस्ट्रिक्‍ट रजिस्‍ट्रार को-ऑपरेटिव भी चुनाव के दौरान हेडक्‍वार्टर में मौजूद रहे। 

 

भारवाड़ दूसरी बार बने हैं वाइस चेयरमैन 

भारवाड़ को लगातार दूसरी बार GCMMF का वाइस चेयरमैन बनाया गया है। वह 2015 में पहली बार GCMMF के वाइस चेयरमैन बने थे। वहीं परमार ने जेठा पटेल की जगह ली है। पटेल पिछले ढाई साल से GCMMF के चेयरमैन थे। राज्‍य मंत्री चूड़ासामा ने बताया कि चेयरमैन पद के लिए परमार का नाम पूर्व मंत्री शंकर चौधरी ने प्रस्‍तावित किया था। चौधरी बानस डेयरी के चेयरमैन हैं। वहीं भारवाड़ का नाम जेठा पटेल ने ही प्रस्‍तावित किया था। 

 

कौन हैं रामसिंह परमार 

परमार अभी आणंद की कायरा डिस्ट्रिक्‍ट को-ऑपरेटिव मिल्‍क प्रॉडयूसर्स यूनियन के चेयरमैन हैं। इसे अमूल डेयरी के नाम से जाना जाता है। यह पूछे जाने पर कि चेयरमैन पद की रेस में पूर्व मंत्री शंकर चौधरी का नाम होने की आशाओं के बावजूद उन्‍हें क्‍यों नहीं चुना गया, चूड़ासामा ने कहा कि पार्टी ने चौधरी को अन्‍य जिम्‍मेदारियां सौंपने का फैसला किया है। इसलिए परमार को सर्वसम्‍मति से GCMMF चेयरमैन चुना गया। 

 

सभी 18 को-ऑपरेटिव्‍स की बेहतरी के लिए करेंगे काम: परमार 

चेयरमैन चुने जाने के बाद परमार ने बताया कि वह सरकार के साथ मिलकर राज्‍य की सभी 18 को-ऑपरेटिव्‍स की बेहतरी के लिए काम करेंगे ताकि दुग्‍ध उत्‍पादकों को फायदा हो सके। आगे कहा कि पिछले 33 सालों से मैं अमूल डेयरी के लिए काम कर रहा हूं। अब इस नई जिम्‍मेदारी के साथ मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि सभी स्‍टेकहोल्‍डर्स मिलकर सभी डेयरी को-ऑपरेटिव्‍स का विकास करें और दुग्‍ध उत्‍पादकों को उनके उत्‍पाद का सही दाम मिले। परमार ने यह भी कहा कि गुजरात में दुग्‍ध उत्‍पादकों को मिलने वाली दूध की कीमत में गिरावट नहीं आई है, जबकि अन्‍य राज्‍यों में ऐसा हुआ है। 

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