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राहुल जी! जिस शख्‍स की वजह से मैकडोनाल्‍ड फेमस हुआ, वह मिल्‍कशेक मशीन बेचता था

राहुल गांधी का दावा है कि मैकडोनाल्‍ड को शुरू करने वाला व्‍यक्ति कभी अमेरिका में ढाबा चलाता था, पर सच्‍चाई कुछ और है..

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नई दिल्ली। पार्टी के OBC कार्यकर्ताओं के सम्‍मेलन में मैकडोनाल्‍ड के संस्‍थापक को ढाबेवाला बताने के बाद राहुल गांधी सोशल मीडिया में ट्रोल हो रहे हैं। राहुल का दावा है कि कोका कोला का फॉर्मूला तैयार करने वाले जॉन एस पेम्बर्टन शिकंजी बेचा करते थे। रेस्‍त्रां चेन मैकडोनाल्‍ड की शुरुआत करने वाले रिचर्ड और मॉरिस मैकडोनाल्‍ड (Richard and Maurice McDonald) पहले ढ़ाबा चलाते थे। हालांकि यह सच नहीं है। 

 

दरअसल मैकडोनाल्‍ड बर्गर रेस्‍त्रां चेन की शुरुआत करने वाले दानों भाईयों ने इसे ग्‍लोबल ब्रांड नहीं बनाया। इसे दुनिया भर में मशहूर करने वाला शख्‍स कभी मिल्‍क शेक मशीन बेचा करता था। दरअसल रिचर्ड और मॉरिस मैकडोनाल्‍ड ने इसे शुरू तो किया था, लेकिन मैकडोनाल्‍ड को दुनिया भर का फेमस ब्रांड बनाने का श्रेय रे क्रोक ( Ray Kroc) को जाता है। क्रोक 1955 में इस कंपनी से जुड़े थे और जुड़ने के बाद उन्होंने कंपनी को शिखर पर पहुंचा दिया। क्रोक इससे पहले मिल्‍कशेक की मशीन बेचा करते थे। आइए जानते हैं कि आखिर मिल्‍कशेक बनाने वाले एक शख्‍स की बदौलत कैसे मैकडोनाल्‍ड दुनिया भर का फेसम ब्रांड बन गया... 

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1940 के दौर में शुरू होती है कहानी  
मैकडोनाल्ड की कहानी 1940 के दशक में अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्‍य स्थित एक छोटे से शहर सैन बरनार्डिनो से शुरू होती है। यहां रिचर्ड और मॉरिस मैकडोनाल्‍ड ने छोटा सा हॉट डॉग स्‍टैंड खोला। इसके लिए उन्‍होंने बैंक ऑफ अमेरिका से करीब 5000 डॉलर का कर्ज लिया था। 1 लाख लोगों की आबादी वाले इस शहर से मैकडोनाल्‍ड बंधुओं को काफी उम्‍मीदें थीं। उन्‍हें लगता था कि अगर उनका स्‍टैंड चल निकला तो आगे की लाइफ आसान हो जाएगी। इसके लिए मैकडोनाल्‍ड बंधुओं के पास आइडिया भी था। इसीके चलते कुछ वर्षों बाद उन्होंने यहां स्पीडी सर्विस सिस्टम लागू किया। इसके तहत सेल्स स्टैंड लगाए। जहां से लाइन में खड़े होकर लोग हैमबर्गर व फ्रेंच फ्राइज खरीदते थे। आगे चलकर सारी दुनिया को फास्ट फूड रेस्त्रां की सोच यहीं से मिली।

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रे क्रोक की पड़ी नजर 
मल्टी मिक्सर या मिल्‍क शेक मशीनें बेचने वाले रे क्रोक के पास जब कैलिफोर्निया के एक रेस्त्रां से एक के बाद एक करीब 6 मिल्क शेक मशीन का बड़ा ऑर्डर आया, तो उसकी जिज्ञासा बढ़ गई। वह सेन बरनार्डिनो के इस रेस्त्रां में जा पहुंचा। हैमबर्गर खरीदने के लिए लाइन में खड़े रहते रेस्त्रां का कामकाज देखा। क्रोक पारखी व्‍यक्ति थे। उन्‍होंने समझ लिया कि मैकडोनाल्‍ड बंधुओं का यह बिजनेस छा सकता है। रोचक बात यह है कि मैकडोनाल्‍ड बंधुओं को खुद के बिजनेस में इतनी क्षमता कभी नहीं दिखी। स्‍टोर पर बर्गर खरीदने वालों की लंबी कतारें और ठीकठाक आमदनी। मैकडोनाल्‍ड बंधु इससे ज्‍यादा की इच्‍छा नहीं कर रहे थे। हालांकि क्रोक ने उनका रेस्‍त्रां चलाने का तरीका देखा तो उनके दिमाग की बत्‍ती जल गई। बर्गर, फ्राइज और बेवरेज का बेहद सीमित मीनू। हर कदम पर क्वालिटी पर ध्यान केंद्रित रखने की अनुकूलता दिखाई दे रही थी। उसके दिमाग में ख्याल आया कि फास्ट डिलीवरी का यह आइडिया पूरे अमेरिका में लोकप्रिय हो सकता है।
 

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आगे पढ़ें- क्रोक ने ही ली पहली फ्रैंचाइजी.... 

क्रोक ने ही ली पहली फ्रैंचाइजी 
क्रोक मैकडोनाल्‍ड बंधुओं के पास पहुंचे। क्रोक ने दोनों भाईयों को पूरे अमेरिका में फास्ट डिलीवरी वाले फास्ट फूड रेस्त्रां खोलने की सलाह दी। रिचर्ड और मॉरिस ने इसमें रुचि नहीं दिखाई तो क्रॉक ने खुद रेस्त्रां का फ्रैंचाइजी एजेंट बनने के लिए उन्हें राजी कर लिया। इसके बाद डेस प्लेनेस (इलीनॉय) में क्रोक ने 5 अप्रैल 1955 को पहला फ्रेंचाइजी रेस्त्रां खोला। यहां लोगों की भीड़ जुटने लगी। देखते ही देखते उनकी अच्छी सर्विस ,कम पैसे और तेज डिलीवरी की वजह से वह रेस्टोरेंट तेजी से चल पड़ा। 

 

क्रोक ने मैकनोडाल्‍ड बंधुओं ने कंपनी खरीद ली 
क्रोक ने और भी मैकडोनाल्‍ड बंधुओं से और भी फ्रैंचाइजी लेने की बात की। ताकि जिससे McDonald’s को अमेरिका के और शहरों में फैलाया जा सके। हालांकि मैकडोनाल्‍ड बंधुओं ने अब की फ्रैंचाइजी देने से मान कर दिया। मैकडोनाल्‍ड बंधुओं ने कहा कि उनके पास जितने पैसे हैं वो काफी हैं। वो और काम नहीं करना चाहते। अगर तुम्हें McDonald’s की चैन बढ़ाने का इतना ही शौक है तो तुम इस कंपनी को खरीद लो और अपने हिसाब से काम करो। क्रोक पारखी थे, उन्‍होंने भविष्‍य भांप लिया था। इसलिए उन्‍होंने देर नहीं की। कुछ सालों तक पैसा जोड़ा और 1961 में कंपनी को 2.7 डॉलर और हर साल 1.9% रॉयल्टी देकर खरीद लिया


आगे पढ़ें- ऐसे खुला पहला मैकडोनाल्‍ड 

 

 

ऐसे खुला पहला मैकडॉनल्ड्स
रे क्रोक का विजन एक ऐसी रेस्त्रां चेन विकसित करना था, जो खाने की क्‍वालिटी और हर जगह एक जैसे स्‍वाद के लिए जाना जाए। वह बर्गर, बन्स, फ्राइज और पेय परोसना चाहते थे, जिसका स्वाद अलास्का और अल्बामा में एक जैसा हो। ऐसा करने के लिए उसने अपने विजन में फ्रेंचाइजी और सप्लायर दोनों को शामिल कर ‘थ्री लेग स्टूल’ के सिद्धांत पर काम किया- जिसमें एक लेग मैकडॉनल्ड्स, दूसरा फ्रेंचाइजी और तीसरा मैकडॉनल्ड्स सप्लायर बने। तीन मजबूत पायों की ताकत पर यह स्टूल टिका था। इस विचार के साथ सन् 1955 में मैकडॉनल्ड्स कॉरपोरेशन जन्मा और अमेरिका में जगह-जगह मैकडॅानल्ड्स रेस्त्रां खुलने लगे।

 

आगे पढ़ें-भारत को भी भाया मैकडोनाल्‍ड 

 

 

दुनियाभर में पहुंचा, भारत को भी भाया

 चार वर्षो में ही शिकागो में सौवां मैकडॉनल्ड्स खुल गया। सन् 1965 में अमेरिका के बाहर कनाडा में पहला मैकडॉनल्ड्स खुला। इसी साल रे क्रोक ने मैकडॉनाल्‍ड को पब्लिक लिमिटेड कंपनी बनाया। आज कई देशों के स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्‍टेड है। 1994 तक 79 देशों में 15 हजार मैकडॉनल्ड्स रेस्त्रां स्थापित हो गए। 1996 में भारत दुनिया का 95वां देश था जहां मैकडॉनाल्‍ड पहुंचा। आज दुनिया के 100 से भी ज्‍यादा देशों में 31 हजार से ज्यादा काउंटर सर्विस, वॉक व ड्राइव-थ्रू सर्विस के इनडोर व आउटडोर सीटिंग वाले 31 हजार से ज्यादा मैकडॉनल्ड्स रेस्त्रां हैं जिनकी सालाना बिक्री 23 बिलियन डॉलर से ज्यादा है।

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