Home » Industry » Companiesक्‍या यूनिटेक का होगा रिवाइवल- NCLT allow govt to take control of realty firm Unitech

यूनिटेक मामला: क्‍या सत्‍यम की तरह मुमकिन है यूनिटेक का रिवाइवल

कर्ज के बोझ से दबी रियल्टी कंपनी यूनिटेक पर अब सरकार का कंट्रोल हो सकता है।

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नई दिल्‍ली. रियल एस्‍टेट कंपनी यूनिटेक का मैनेजमेंट कंट्रोल सरकार ले सकती है। नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) ने इसकी मंजूरी सरकार को दे दी है। सत्‍यम और एनएसईएल के बाद यह एक और मामला है, जब सरकार ने इन्‍वेस्‍टर्स के हितों को सुरक्षित करने के लिए सीधे दखल दे रही है। खास बात यह है कि सरकार ने यूनिटक का मैनेजमेंट कंट्रोल टेकओवर करने के लिए उसी प्रोविजन का इस्‍तेमाल किया, जिसका उसने सत्‍यम मामले में किया था। इसलिए ऐसा भरोसा बन रहा है कि जिस तरह सत्‍यम का रिवाइवल करने में सरकार सफल रही, ठीक उसी तरह की स्थिति यूनिटेक के मामले में भी दिखाई पड़ सकती है।  

 

दरअसल, 2009 में सत्‍यम घोटाला सामने आने के बाद सरकार को पुराने कंपनीज एक्‍ट 1956 में बदलाव का फैसले किया। क्‍योंकि, पुराने कानून में फ्रॉड या धोखाधड़ी जैसे मामलों से निपटने के लिए कोई स्‍पष्‍ट प्रावधान नहीं थे। नए कंपनी कानून में इसको लेकर प्रावधान किए गए। अब इन्‍हीं अधिकारों की बदौलत मिनिस्‍ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (एमसीए) को यूनिटेक के बोर्ड डायरेक्‍टर्स को बदलने के लिए कहा गया है। बता दें, यूनिटेक एक समय देश की दूसरी सबसे बड़ी रीयल एस्‍टेट कंपनी थी। शुक्रवार को एनसीएलटी ने केंद्र सरकार को अधिकार दिया कि वो कंपनी में 10 नए डायरेक्टर्स को नियुक्त करें।

 

 

सरकार के ऊपर बढ़ेगी लॉयबिलिटी

द इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के पूर्व चेयरमैन अमरजीत चोपड़ा ने moneybhaskar.com से बातचीत में कहते हैं, इन्‍वेस्‍टर्स के हितों के लिए सरकार की तरफ से यह एक अच्‍छा कदम है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि इससे सरकार के ऊपर लॉयबिलिटी भी बढ़ेगी, लेकिन सरकार इससे निपटने के उपाय बनाएगी। जैसेकि सरकार कंपनी के टोटल एसेट्स का स्‍टेटमेंट बनाएगी। जिसके आधार पर बायर्स की देनदारी निपटाने का प्‍लान तैयार हो सकता है।

 

बता दें,  कॉरपोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री (एमसीए) ने कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में कंपनी का मैनेजमेंट कंट्रोल पाने के लिए अर्जी दाखिल की थी। साथ ही कंपनी के मौजूदा बोर्ड को भंग करने की मांग की गई थी। सरकार ने कहा था कि वह यूनिटेक के बोर्ड में अपने 10 मनोनीत सदस्य लाना चाहती है। सरकार ने मौजूदा डायरेक्टर और सीएफओ की संपत्ति बेचने पर भी रोक लगा दी है।

 

और मामले आ सकते हैं सामने

चोपड़ा बताते हैं, यूनिटेक बोर्ड का मैनेजमेंट कंट्रोल सरकार करती है तो इसका असर पूरी इंडस्‍ट्री पर दिखाई देगा। आने वाले दिनों में इस तरह के मामले और सामने आ सकते हैं।

 

गौरतलब है कि पहले से ही मंदी झेल रहे रियल एस्टेट सेक्टर की हालत नोटबंदी ने और बिगाड़ दी है। कई कंपनियां अपने बकाया कर्ज और प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर पा रही हैं। जेपी एसोसिएट्स, आम्रपाली जैसी नामी-गिरमी कंपनियों पर दिवालिया घोषित होने की तलवार लटक रही है।

 

क्रेडिटर्स को कुछ तो मिलेगा

सरकार का कहना है कि यूनिटेक छोटे डिपॉजिटर्स और लोन का 723 करोड़ रुपए का डिफॉल्ट कर चुकी है। कंपनी इस स्थिति में नहीं है कि वह बकाएदारों के पैसे वापस कर पाए। कंस्ट्रक्शन का काम बंद है, ऐसे में करीब 19 हजार खरीददारों का भविष्‍य साफ नहीं है। प्रमोटर्स की होल्डिंग 17 फीसदी रह गई है, जिसमें से 75 फीसदी गिरवी है।

अमरजीत चोपड़ा कहते हैं, सरकार की ओर से कंपनी मैनेजमेंट कंट्रोल लेने के बाद एक बात तो साफ है कि क्रेडिटर्स को जहां कुछ भी मिलने की उम्‍मीद नहीं थी, वहां कुछ तो जरूर मिल पाएगा।

 

मुमकिन है कि यूनिटेक का रिवाइवल

अमरजीत चोपड़ा का मानना है कि सरकार के पास यूनिटेक का मैनेजमेंट कंट्रोल आने के बाद उसके रिवाइवल की उम्‍मीद है। सत्‍यम के मामले में यह देखने में आया था। उस समय सरकार ने सत्‍यम के बोर्ड में डायरेक्‍टर्स बनाए थे और नजीता यह रहा कि उसमें रिवाइवल आया।

 

यूनिटेक का क्या है मामला

यूनीटेक से फ्लैट खरीदने के इच्छुक लोगों ने फर्म के पास काफी पहले धनराशि जमा करा दी थी, लेकिन उन्हें न तो तय समय पर फ्लैट मिल सका और न ही फर्म ने उनके पैसे लौटाए। इस मामले में खरीददारों ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था। कुछ लोग फ्लैट का मलिकाना हक चाहते हैं जबकि कुछ अपनी धनराशि लेना चाहते हैं।

शुक्रवार को 2 सदस्यों वाली एनसीएलटी बेंच में सरकार ने कंपनी का कंट्रोल अपने पास लेने के लिए पिटीशन दायर की थी। कंपनी के मैनेजमेंट पर खरीददारों से जुटाए गए फंड का मिसयूज करने का आरोप है। एनसीएलटी ने यूनिटेक को भी नोटिस भेजकर मामले में जवाब मांगा था। यह भी कहा गया है कि कंपनी के मौजूदा डायरेक्टर्स न तो कंपनी के और न ही पर्सनल एसेट्स बेच सकते हैं।

 

सुप्रीम कोर्ट में भी होनी है प्रमोटर्स की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर को रियल इस्टेट कंपनी यूनिटेक को आदेश देते हुए कहा है कि वो 31 दिसंबर तक कोर्ट की रजिस्ट्री में 750 करोड़ रुपये जमा कर दें, ताकि घर खरीदने वाले बायर्स को पैसा रिफंड किया जा सके। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि वो इस मामले की अगली सुनवाई अगले साल जनवरी महीने के दूसरे हफ्ते में करेगा।

 

यूनिटेक के प्रमोटर संजय चंद्रा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जेल से बाहर आने के लिए उन्हें कुछ निश्चित राशि जमा करनी होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने चंद्रा की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए कहा था कि 16,300 फ्लैट खरीदारों के आंसू बिल्डर की आजादी की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। शीर्ष कोर्ट ने चंद्रा से कहा था कि अगर उन्होंने खरीददारों को फ्लैट या रिफंड नहीं दिया तो कोर्ट यह काम नीलामी करके खुद करेगा। कोर्ट ने फ्लैट या पैसे की चाहत रखने वालों की लिस्ट भी मांगी थी।

 
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