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Parle-G, मैरी और मिल्‍क शक्ति बिस्किट के दाम बढ़ाएगी पारले, GST का असर

पारले प्रोडक्‍ट्स अपने ग्‍लूकोज, मैरी और मिल्‍क बिस्किट्स के दाम 4-5 फीसदी बढ़ाने जा रही है।

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मुंबई.  बिस्किट्स और कन्‍फेक्‍शनरी बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्‍ट्स अपने ग्‍लूकोज, मैरी और मिल्‍क बिस्किट्स के दाम 4-5 फीसदी बढ़ाने जा रही है। कंपनी का कहना है कि वह 2018 की पहली तिमाही तक दाम बढ़ा सकती है।

 

पारले प्रोडक्‍ट्स- कैटेगरी के हेड मयंक शाह ने न्‍यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि अभी तक हमने कीमतें बढ़ाने का कोई फैसला नहीं लिया था, लेकिन टैक्‍स में बढ़ोत्‍तरी के बाद कंपनी दाम बढ़ाने पर विचार कर रही है। अगले साल की पहली तिमाही यानी जनवरी-मार्च में कंपनी कीमतें बढ़ा देगी। 100 रुपए प्रति किलो से नीचे वाले बिस्किट ब्रांड्स की कीमतों में 4 से 5 फीसदी की बढ़ोत्‍तरी हो सकती है।

 

ये बिस्किट होंगे महंगे

मयंक शाह ने बताया कि शुरुआत में ग्‍लूकोज, मिल्‍क और मैरी कैटेगरी के बिस्किट के दाम बढ़ेंगे। एक बार में कंपनी एक ही कैटेगरी के बिस्किट के दाम बढ़ाएगी। ग्‍लूकोज सेगमेंट में सबसे ज्‍यादा बिकने वाले बिस्किट ब्रांड पारलेजी, बेकस्‍िमथ इंग्लिश मैरी और मिल्‍क शक्ति ब्रांड के दाम बढ़ेंगे।  

 

पारले क्‍यों बढ़ा रही है कीमत?

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्‍स (जीएसटी) लागू होने के बाद कंपनी ने इन प्रोडक्‍ट्स के दाम नहीं बढ़ाए थे। जीएसटी काउंसिल ने बिस्किट पर यूनिफार्म टैक्‍स रेट रखा है। 100 रुपए प्रति किलो से नीचे के बिस्किट, ग्‍लूकोज कैटेगरी समेत, और 100 रुपए प्रति किलो से ऊपर के बिस्किट्स दोनों को  जीएसटी में 18 फीसदी टैक्‍स स्‍लैब में रखा।

 

पहले क्‍या था टैक्‍स स्‍ट्रक्‍चर?

जीएसटी से पहले, 100 रुपए प्रति किलो वाले बिस्किट पर कोई एक्‍साइज टैक्‍स नहीं लगता था लेकिन इफेक्टिव टैक्‍स करीब 9-10 फीसदी था। मयंक शाह ने बताया कि मास कैटेगरी के बिस्किट ब्रांड्स पर पहले कम टैक्‍स था, अब वह अधिक हो गया है। इसलिए अब इसका असर हो रहा है। उन्‍होंने बताया कि 100 रुपए प्रति किलो की कैटेगरी वाले बिस्किट की ग्रोथ धीमी है, यह 6-7 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। वहीं, इंडस्‍ट्री की ग्रोथ 14-15 फीसदी की दर से हो रही है।

 

आगे पढ़ें... पारले की रूरल डिमांड बढ़ी

 

नोटबंदी, जीएसटी से उबर जाएगी इंडस्‍टी

मयंक शाह ने बताया कि बिस्किट्स नोटबंदी और जीएसटी से उबरने में सक्षम है। बिस्किट्स पर पहले सबसे ज्‍यादा टैक्‍स रेट था, जिसे अब 18 फीसदी के दायरे में लाया गया है। उन्‍होंने बताया कि रुरल डिमांड इस साक बढ़ी है। इसमें करीब 60-70 फीसदी की ग्रोथ देखी गई।

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