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सिर्फ पानी और लिथियम से 1 अरब लोगों को 10 करोड़ साल तक मिल सकती है बिजली

50 लीटर पानी एवं दो ग्राम लिथियम से एक व्यक्ति के पूरे जीवनकाल की ऊर्जा जरूरतों को कर सकते है पूरा

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नई दिल्ली, कृत्रिम ढंग से बिजली बनाने की संभावना तलाशने के लिए फ्रांस में स्थापित किये जा रहे इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रियेक्टर (आईटीईआर) के महानिदेशक और जाने माने नाभिकीय ऊर्जा वैज्ञानिक डा. बर्नाड बिगो का कहना है कि इस प्रक्रिया के जरिये धरती पर उपलब्ध पानी और लिथियम के भंडार से ही एक अरब लोगों की बिजली की जरूरतों को 10 करोड़ साल तक पूरा किया जा सकता है।

 

एजेंसी की खबरों के मुताबिक बिगो ने कहा कि फ्यूजन प्रक्रिया से पैदा होने वाली विपुल ऊर्जा का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि मात्र 50 लीटर पानी और दो ग्राम लिथियम एक व्यक्ति के पूरे जीवनकाल की ऊर्जा जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। धरती पर इन दोनों चीजों का पर्याप्त भंडार है और इसके जरिये एक अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को 10 करोड़ साल तक पूरा किया जा सकता है। 

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2035 तक पूरी हो जाएगी प्रक्रिया

बिगो ने कहा कि अब हर आदमी इतनी बिजली खर्च करता है जो हर रोज 450 लोगों के उसके लिए श्रम करने के बराबर है। इस तरह का ऊर्जा खर्च न केवल पर्यावरण को बर्बाद कर रहा है। इसलिए एक साफ सुथरे और टिकाऊ ऊर्जा विकल्प की जरूरत है।   उन्होंने कहा कि 2007 में शुरू हुए आईटीईआर का निर्माण 25 साल में पूरा करने का लक्ष्य है। अब तक इसके लिए जरूरी मुख्य उपकरण का 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। वर्ष 2025 तक पहला प्लाज्मा कहे जाना वाला महत्वपूर्ण चरण पूरा होगा और पूरी फ्यूजन प्रक्रिया 2035 तक शुरू होगी

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सूर्य के तापमान से भी ज्यादा होगा तापमान

इसके लिए चुनौती को इस तरह समझा जा सकता है कि इस प्रयोग के लिए दो ग्राम हाइड्रोजन को लगभग 1000 घन मीटर आयतन के एक विशेष बर्तन में 15 करोड़ डिग्री तक गर्म करना होगा। यह तापमान सूर्य के अंदरूनी भाग के तापमान का भी दस गुना है। इस ताप पर हाइड्रोजन का नाभिक जुड़ कर हीलियम और न्यूट्रान तथा बहुत बड़े पैमाने पर ऊर्जा छोड़ेंगे। यह ऊर्जा उस ऊर्जा से बहुत ज्यादा होगी जो फ्यूजन की इस प्रक्रिया को करने के लिए लगी होगी। यह ऊर्जा मुख्य रूप से ताप के रूप में होगी जिसे बिजली में बदलना होगा।  उन्होंने कहा कि इसके अलावा चुनौती यह भी होगी कि यह प्रयोग केवल प्रयोगशाला के स्तर तक सीमित न हो और आर्थिक रूप से प्रतिस्पर्धी हो और औद्योगिक तौर पर कर सकने योग्य हो। उन्होंने कहा कि यह सब एक सपना है और यह सपना सच होना जरूरी है।

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