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राफेल डील पर बोले अनिल अंबानी- होगी सच्चाई की जीत, पर राहुल के खिलाफ मौन

सारे आरोप दुर्भावनापूर्ण, निहित स्वार्थ और कंपनी प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित

on Rafale deal Anil Ambani says truth will prevail

मुंबई। राफेल सौदे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच  रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG)के प्रमुख  अनिल अंबानी ने कहा है कि पूरे मामले में सच्चाई की जीत होगी। उन्होंने यह बात ऐसे समय कही है जब राफेल सौदे को लेकर वित्त मंत्री अरुण जेटली और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक-दूसरे पर आज ताजा आरोप लगाए। राफेल सौदे को लेकर जेटली और गांधी ने एक-दूसरे पर झूठ बोलने का आरोप लगाया है। गांधी ने इसे अब तक की सबसे बड़ी लूट बताया वहीं जेटली ने फेसबुक ब्लॉग पर कांग्रेस अध्यक्ष से 15 सवाल पूछे हैं। 

कांग्रेस का आरोप अंबानी को पहुंचाया गया फायदा 

कांग्रेस लगातार आरोप लगाती आ रही है कि कथित तौर पर इस डील से अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाया गया और डील को पहले के मुकाबले महंगा कर दिया गया। मौजूदा सरकार राफेल विमानों के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA)सरकार में तय कीमत से कहीं अधिक मूल्य चुका रही हैं। सरकार ने इस सौदे में बदलाव सिर्फ 'एक उद्योगपति को फायदा पहुंचाने के लिए' किया है। 

 

सच्चाई की जीत होगी 
आरोप को आधारहीन और दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए अंबानी ने कहा कि सचाई की जीत होगी। जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, वह दुर्भावनापूर्ण, निहित स्वार्थ और कंपनी प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित है। 

 

यह भी पढ़ें- राफेल पर अंबानी का राहुल को दूसरा जवाबी खत, कहा- कांग्रेस के बनाए नियमों पर ही काम कर रही कंपनी

 

राहुल गांधी पर केस नहीं करने का जवाब टाला 
अंबानी से मीडिया ने पूछा था कि राफेल सौदा मामले में उनकी कंपनी ने 5,000 करोड़ रुपये के मानहानि मामले में कांग्रेस अध्यक्ष को अलग क्यों रखा। अंबानी ने जवाब टालने वाले अंदाज में कहा कि मैंने व्यक्तिगत रूप से गांधी को पत्र लिखा और उनसे कहा है कि कांग्रेस के पास गलत और गुमराह करने वाली सूचना है जो दुर्भावनापूर्ण निहित स्वार्थ और कंपनी प्रतिद्वंद्विता का नतीजा है। अंबानी ने कहा, ‘सभी आरोप बेबुनियाद, गलत सूचना पर आधारित और दुर्भाग्यपूर्ण हैं।' 

 

राफेल से मिला है अंबानी की कंपनी को ठेका 
बता दें कि राफेल सौदे के तहत फ्रांस की कंपनी से अंबानी को ही विवादास्पद ठेका मिला है। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट ने रिलायंस समूह से करार अनुबंध के तहत अपनी ऑफसेट अनिवार्यता को पूरा करने के लिए किया है। रक्षा ऑफसेट के तहत विदेशी आपूर्तिकर्ता को उत्पाद के एक निश्चित प्रतिशत का विनिर्माण खरीद करने वाले देश में करना होता है। कई बार यह कार्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के जरिए किया जाता है। डिफेंस इंडस्ट्री में अफसेट का यूज काफी हो रहा है। इसके तहत आने वाले दिनों में राफेल से जुड़े जो कल पुर्जे भारत सरकार खरीदेगी उसे डसॉल्ट की मदद से अनिल अंबानी का ग्रुप तैयार करेगा।  

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