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एस्‍सार की बिडिंग से पहले न्‍यूमेटल ने चला दांव, OSPIL में खरीदी 70 फीसदी हिस्‍सेदारी

एस्सार स्टील के लिए होनेवाली दूसरे दौर की बिडिंग से पहले रूस की वीटीबी कैपिटल समर्थित न्यूमेटल ने बड़ा दांव खेला है।

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नई दिल्‍ली.. दिवालिया हो चुकी कंपनी एस्सार स्टील के लिए होनेवाली दूसरे दौर की बिडिंग से पहले रूस की वीटीबी कैपिटल समर्थित न्यूमेटल ने बड़ा दांव खेला है। दरअसल, न्‍यूमेटल ने ओडिशा स्लरी पाइपलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (OSPIL) की 70 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने का एलान किया है। हालांकि न्‍यूमेटल को इसके लिए OSPIL  के करीब 2,200 करोड़ रुपए का कर्ज चुकाना होगा। OSPI के पास 253 किलोमीटर लंबी स्लरी पाइपलाइन है, जिसके जरिए ओडिशा के दूरदराज के इलाकों से आयरन ओर एस्सार स्टील के पैलेट प्लांट तक पहुंचता है। 

 

इस डील के क्‍या है मायने


दरअसल, न्‍यूमेटल के इस एक दांव से उस कंपनी के लिए चुनौती खड़ी हो गई है जो एस्‍सार स्‍टील को खरीदेगी। हालांकि देश की दिग्‍गज स्‍टील मेकर कंपनी आर्सेलर मित्‍तल के साथ न्‍यूमेटल भी दिवालिया हो चुकी एस्‍सार स्‍टील को खरीदने की रेस में है। यानी अगर न्‍यूमेटल की बजाए आर्सेलर मित्‍तल ने एस्‍सार स्‍टील का अधिग्रहण किया तो जाहिर है उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। बता दें कि एस्‍सार स्‍टील पर लेंडर्स के 51,800 करोड़ रुपए का बकाया है जो न्‍यू बैकरप्‍सी कानून के तहत बिडिंग के जरिए रिकवर किया जाएगा। 

 

 

आर्सेलर मित्‍तल का क्‍या कहना है 
आर्सेलर मित्‍तल के स्‍पोकपर्सन ने हालांकि न्‍यूमेटल के इस डील को खास तवज्‍जो नहीं दी है। स्‍पोकपर्सन के मुताबिक कंपनी का अभी पूरा फोकस एस्‍सार स्‍टील के अधिग्रहण पर है। उन्‍होंने कहा कि वर्तमान में ये एस्सार स्टील इंडिया के लिए अहम मुद्दा है। पूरा भरोसा है कि हम एस्‍सार को अधिग्रहण करने में सफल होंगे और अगर ऐसा हुआ तो हर समस्‍याओं से निपट लेंगे। हालांकि सूत्रों ने बताया कि न्‍यूमेटल के इस दांव को आर्सेलर मित्‍तल एक बड़ी समस्‍या के रुप में देख रही है। 

 

दोनों में छिड़ी है जंग 
न्यूमेटल और लक्ष्मी मित्तल की आर्सेलर मित्तल एस्सार स्टील को खरीदने के लिए निर्णायक लड़ाई लड़ रही हैं। दोनों को बैंकरप्सी लॉ के तहत बिक रही कंपनी के लिए एक बार बिड करने के अयोग्य घोषित किया जा चुका है। संशोधित कानून के हिसाब से डिफॉल्टर्स और रिलेटेड पार्टीज दिवालिया घोषित होनेवाले एसेट्स के लिए तब तक बोली लगाने के आयोग्य होंगी जब तक कि ये अपना बकाया चुका नहीं देतीं। इसी मामले में न्‍यूमेटल ने नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) का दरवाजा खटखटाया। 

 

 

NCLT कर चुका है न्‍यूमेटल की अपील खारिज 
बता दें कि हाल ही में नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) ने दिवालिया हो चुकी कंपनी एस्सार स्टील के लिए होनेवाली दूसरे दौर की बिडिंग पर रोक लगाने या इसके लिए तय अंतिम तारीख को टालने की न्यूमेटल की अपील मानने से मना कर दिया था। 

 

 

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