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महंगी मैगी बेचने की सजा, नेस्ले पर 100 करोड़ का जुर्माना

ग्राहकों को नहीं दिया GST में कटौती का फायदा

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नई दिल्ली.  मैगी, किटकैट समेत कई तरह के डेली प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनी नेस्ले भारत में दोबारा नियमों के उल्लंघन का दोषी पाई गई है। नेस्ले ने जीएसटी में कटौती का फायदा ग्राहकों को न देकर मुनाफाखोरी को अंजाम दिया है। इससे पहले वर्ष 2015 में कंपनी के प्रोडक्ट मैगी में लेड की ज्यादा मात्रा पाई गई थी। इसके चलते मैगी की बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया था और कंपनी को आर्थिक तौर पर काफी नुकसान उठाना पड़ा था।

 

जांच में सच साबित हुए आरोप 

अब यह दूसरा मौका है, जब कंपनी जांच में दोषी में पाई गई है। डॉरेक्टोरेट जनरल ऑफ एंटी प्राफिटीयरिंग (डीजीपी) ने कंपनी पर लगे 100 करोड़ रुपए की मुनाफाखोरी के आरोपों को जांच में सच पाया। दरअसल जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद कंपनी ने अपने प्रोडक्ट के दाम नहीं घठाए। बता दें कि जीएसटी काउंसिल ने नवंबर 2017 में 178 उत्पादों की दरों में कटौती की थी। इस दौरान इन उत्पादों की टैक्स दर 28% से 18% कर दिया था। लेकिन नेस्ले ने इसका फायदा ग्राहकों को नहीं दिया। 

 

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नेस्ले की सफाई

हालांकि अब नेस्ले इंडिया की ओर मामले में सफाई दी गई है। कंपनी ने कहा कि जीएसटी में कटौती के बावजूद प्रोडक्ट की कीमत नहीं घटाई गई, क्योंकि कई प्रोडक्ट की अधिकतम एमआरपी रेट में तत्काल कमी नहीं की जा सकती है। कंपनी की ओर से ऐसा दावा किया गया है कि कीमत न घटाने से हुए फायदे की रकम ग्राहक कल्याण कोष में जमा कर दी गई है। 

 

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भारत में मैगी की बिक्री पर लगी थी रोक 
भारत मे एक वक्त ऐसा था, जब मैगी की खूब बोलबाला था। उस वक्त मैगी की बाजार में 75% हिस्सेदारी थी। लेकिन जून 2015 में मैगी में तय मात्रा से अधिक लेड (सीसा) पाया गया और इस वजह से मैगी पर प्रतिबंधित लगा दिया गया। इसके बाद नेस्ले को मैगी के बाजार से हटाना पड़ा था। इसके लिए नेस्ले को लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और नवबंर 2015 में मैगी की बाजार में दोबारा एंट्री हो सकी। 

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