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Home » इंडस्ट्री » कम्पनीजFICCI President Sandip Somany Interview

लेबर एवं स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री को बंद कर इंप्लॉयमेंट जेनरेशन मिनिस्ट्री की जरूरतः सोमानी

देश में हर साल 1.2-1.4 करोड़ रोजगार क्रिएट करने की जरूरत पर दिया जोर

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राजीव कुमार

सेनेटरी वेयर फर्म एचएसआईएल के सीएमडी संदीप सोमानी ने हाल ही में फेडरेशन ऑफ इंडियन चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के नए अध्यक्ष का कार्यभार संभाला है। देश की आर्थिक दशा से जुड़े सभी मसलों पर सोमानी ने मनी भास्कर को दिए इंटरव्यू में बेबाक राय रखीं। पेश हैं बातचीत के अंश:

 

प्रश्नः नए साल में आर्थिक विकास दर के लिए आप क्या अनुमान लगा रहे हैं, क्योंकि तेल के दाम भी बढ़ने की आशंका है और फिसकल डिफसिट (राजकोषीय घाटा) भी बढ़ता हुआ दिख रहा है?

उत्तरः देखिए, फिसकल डिफसिट नहीं बढ़ रहा है, वित्त मंत्री ने हाल ही में कहा है कि यह इस वित्त वर्ष के लिए फिसकल डिफसिट जीडीपी का 3.3 फीसदी रहेगा। जहां तक क्रूड का सवाल है तो मेरा मानना है कि यह इस साल 58-65 डॉलर प्रति बैरल के आस-पास रहेगा जो भारत के लिए ठीक है। ऐसे में, मेरा अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के लिए हमारा ग्रोथ रेट 7.3 फीसदी रह सकता है जबकि अगले वित्त वर्ष (2019-20) के लिए यह 7.5-7.6 फीसदी तक जा सकता है।

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प्रश्नः अगले साल केंद्रीय चुनाव है, इस दौरान काफी पैसे खर्च होते हैं, इससे इकोनॉमी को कितना बूस्ट मिल सकता है?

उत्तरः निश्चित रूप से चुनाव से इकोनॉमी को बूस्ट मिलता है, उपभोग बढ़ता है। गाड़ी से लेकर कई चीजों की बिक्री बढ़ती है, लेकिन यह बताने का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है कि इसका हमारे जीडीपी पर कितना असर होता है। चुनाव में कितना खर्च होता है, इस बारे में चुनाव आयोग की तरफ से तय खर्च के आधार पर जानकारी निकाली जा सकती है, लेकिन अलग से इस संबंध में कुछ नहीं कहा जा सकता है और न ही फिक्की में ऐसा कोई आंकड़ा होता है। हम ट्रैक भी नहीं करते हैं।


 

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प्रश्नः किसानों की लोन माफी को लेकर पिछले दिनों काफी चर्चाएं रहीं, आप क्या राय रखते हैं

उत्तरः हमारे ग्रामीण भारत की आर्थिक दशा उन्नत नहीं है, हमारे किसान मेहनत कर रहे हैं, लेकिन अगर उनके प्रोडक्ट का प्राइस गिर गया तो उन्हें मदद करना बनता है। किसानों की लोन माफी पहली बार नहीं हुई है और मेरे विचार में यह सही भी है, लेकिन यह स्थाई हल नहीं है। विभिन्न राज्यों को मिलाकर किसानों के 2 लाख करोड़ रुपए माफ किए गए अगर इनमें से 1 लाख करोड़ रुपए भी एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर में लगा दिए जाए तो किसानों की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। 35-38 फीसदी जो फूड बर्बाद होते हैं, वह नहीं होंगे। किसान अपने प्रोडक्ट को सालों तक रख सकेंगे और सही दाम मिलने पर उसे बेचेंगे। लोन माफी आसान मूव है, लेकिन इससे कहीं न कहीं डेवलपमेंट प्रोजेक्ट से कंप्रोमाइज करना पड़ता है। 


प्रश्नः अभी मिनिमम वेज को लेकर माहौल तैयार किया जा रहा है, संसदीय समिति ने भी हाल ही में अपनी रिपोर्ट सौंपी है, फिक्की क्या मिनिमम वेज को सपोर्ट करेगी क्योंकि इसे लागू करने से लागत बढ़ने की आशंका है?

उत्तरः देखिए, मिनिमम वेज स्टेट का सब्जेक्ट होना चाहिए, सेंट्रल की तरफ से कोई मिनिमम वेज नहीं होना चाहिए। सभी राज्यों की स्थिति अलग-अलग है। मान लीजिए, महाराष्ट्र एवं बिहार में समान वेज हो जाए तो कोई उद्यमी बिहार में जाकर यूनिट क्यों लगाएगा। किसी भी देश में ऐसा नहीं है। यूरोपीयन यूनियन को ही देख लीजिए। स्पेन में 30000 यूरो मिनिमम वेज है तो जर्मनी में 50 से 55 हजार यूरो।


 

प्रश्नः देश में रोजगार का सृजन जरूरत के मुताबिक नहीं हो पा रहा है, क्या करना चाहिए?

उत्तरः भारत में 1.2-1.4 करोड़ रोजगार हर साल क्रिएट करने की जरूरत है। अगर अप्रेंटिसशिप एक्ट में बदलाव कर दिया जाए तो देश में आसानी से 5 करोड़ नौकरी निकल सकती है क्योंकि देश में 7.2 करोड़ स्मॉल यूनिट है और हर यूनिट अगर एक-एक अप्रेंटिस रखती है तो सोचिए कितने लोगों को काम मिलेंगे। सरकार अप्रेंटिसशिप के नाम पर 1500 रुपए की सब्सिडी भी देती है। दूसरी महत्वपूर्ण बात है कि लेबर मिनिस्ट्री, स्किल डेवलपमेंट जैसी मिनिस्ट्री को खत्म कर मिनिस्ट्री ऑफ लेबर इंप्लायमेंट जेनरेशन बनाने की जरूरत है। कांट्रैक्ट इंप्लायमेंट कानून को राज्यों द्वारा अपनाया जाना चाहिए और सबसे बड़ी बात है शिक्षा को उद्योग से जोड़ा जाना चाहिए। क्योंकि इंडस्ट्री को जिस प्रकार की शिक्षित बच्चे चाहिए, वे नहीं मिल रहे हैं। शिक्षा प्रणाली को औद्योगिक एवं सर्विस सेक्टर की जरूरतों के मुताबिक बदलने की आवश्यकता है।


प्रश्नः इनोवेशन में हम पिछड़ गए हैं, इसे प्रोत्साहित करने के लिए क्या किया जाना चाहिए

उत्तरः हमारे यहां इनोवेशन का कल्चर नहीं है। इसके लिए सबसे पहले फियर ऑफ फेल्योर को निकालना होगा। हम सोचते हैं किसी चीज में फेल कर जाएंगे तो हमारी बेइज्जती होगी। विदेश में फेल्योर से सीखने की संस्कृति है। हमारे यहां आरएंडडी भी सीमित है। विलायत में इस पर काफी अच्छे इंसेंटिव मिलते हैं।

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