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NCLAT का टाटा संस को प्राइवेट कंपनी में बदलने पर रोक से इनकार, लेकिन मिस्त्री को दी राहत

NCLAT ने टाटा को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाने खिलाफ अंतरिम आदेश देने से किया इनकार

NCLAT declined Cyrus Mistry's plea against the conversion of Tata Sons

मुंबई। नई दिल्ली। टाटा समूह के खिलाफ इसके पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की जंग और गहराती जा रही है। नई कड़ी में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रीब्यूनल यानी NCLAT ने मिस्त्री की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने टाटा संस लिमिटेड को प्राइवेट कंपनी बनाने के फैसले के खिलाफ अंतरिम आदेश देने की मांग की थी। हालांकि  NCLAT ये सह भी साफ दिया कि जब तक मामले की सुनवाई पूरी नहीं हो जाती, जब तक टाटा समूह साइरस मिस्त्री पर टाटा संस से अपनी हिस्सेदारी बेचने का दबाव नहीं बना सकती है।  इस बारे में  NCLAT ने टाटा सन्स से 10 दिन में जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। 

 

प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बदलने के क्या हैं मायने

बता दें कि पिछले साल सितंबर में टाटा समूह को पब्लिक लिमिटेड से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में बदलने के फैसले पर शेयर होल्डर्स ने अपनी मुहर लगाई थी। इसके बाद मिस्त्री परिवार टाटा समूह की अपनी हिस्सेदारी कंपनी से अलग किसी बाहरी व्यक्ति को अपनी हिस्सेदारी नहीं बेच सकता है। हालांकि किसी पब्लिक लिमिटेड होने पर शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी कंपनी से बाहर भी किसी को भी बेच सकता है। 

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छोटे शेयरहोल्डर्स के स्टेक नहीं बेचे कंपनी 

ब्लूमबर्ग में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, NCLAT चैयरमैन जस्टिस  SJ मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली 2 जजों की पीठ ने मिस्त्री की याचिका पर किसी तरह का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि बेंच ने टाटा समूह से कहा है टाटा ग्रुप होल्डिंग कंपनियों की ओर से परेशान किए जाने के मिस्त्री के आरोप पर जब तक आखिरी फैसला नहीं आ जाता, तब वह छोटे शेयरहोल्डर्स के स्टेक को नहीं बेचे।    

 

 

NCLAT सुनेगा मिस्त्री की दलीलें 

NCLAT जल्द ही नेशनल कंपनी लॉ ट्रीब्यूनल यानी NCLT के उस फैसले के खिलाफ मिस्त्री के दलीलें सुनेगा, जिसमें NCLT ने मिस्त्री को टाटा समूह  के चैयरमैन पद से हटाए जाने को वैध ठहराया था। बता दें कि मिस्त्री को अक्टूबर, 2016 में पद से हटा दिया गया था। NCLAT में मिस्त्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता CA सुंदरम ने दावा किया कि टाटा समूह को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में तब्दील करने का कोई तत्कालिक कारण नहीं था। इसे तब के लिए रोक दिया जाए तब तक कि समूह के चेयरमैन पद से हटाए जाने की मिस्त्री की याचिका पर कोई फैसला नहीं आ जाता है। मामले में टाटा संन्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनू सिंघवी ने कोई को बताया कि रजिस्टार ऑफ कंपनीज ने टाटा संस के प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के तौर पर इसी माह 6 अगस्त को मान्यता दी है। 

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टाटा ग्रुप के साथ चल रही कॉरपोरेट जंग 
2016 में पालोनजी मिस्त्री के बेटे साइरस मिस्त्री को 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद भी मिस्त्री परिवार और टाटा ग्रुप के बीच कानूनी लड़ाई जारी है। 89 वर्षीय मिस्त्री करीब 100 अरब डॉलर से ज्यादा की वैल्यू वाले टाटा ग्रुप के सबसे बड़े शेयरहोल्डर में से एक हैं। कानूनी विवाद शुरू होने के बाद टाटा ग्रुप के खिलाफ मिस्त्री फैमिली ने कई मुकदमें दायर किए हैं। इन मुकदमों में टाटा ग्रुप में गवर्नेंस लैप्स समेत कंपनी के बोर्ड में फेरबदल को लेकर कई तरह के आरोप लगाए गए हैं। 

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यह भी पढ़ें- टाटा के साथ जंग में मिस्त्री के फंस गए 1.20 लाख करोड़, अपना ही 1 रुपया चाहकर भी नहीं खर्च कर सकते

 

 

 

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