बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Companiesटूटने की कगार पर थी कॉरपोरेट जगत के करन-अर्जुन की यह जोड़ी, मां ने दिखाया रास्ता तो आई अकल

टूटने की कगार पर थी कॉरपोरेट जगत के करन-अर्जुन की यह जोड़ी, मां ने दिखाया रास्ता तो आई अकल

2 करोड़पति भाइयों की महाभारत में कूदी मां, तो छोटे बेटे ने ले लिया बड़ा फैसला

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नई दिल्ली।  रैनबैक्सी और फोर्टिस हेल्थकेयर तथा रेलीगेयर जैसी नामी कंपनियों के प्रमोटर रहे सिंह भाइयों की कलह में नया मोड़ आ गया है। अपने बड़े भाई मलविंदर सिंह पर धोखाधड़ी का आरोप लगाने वाले छोटे भाई  शिविंदर सिंह ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) से केस वापस लेने की घोषणा कर दी है।  यही नहीं  NCLT ने उन्हें  इस बात की इजाजत दे भी दी है कि वह अपने बड़े भाई के खिलाफ केस वापस ले लें। भारतीय कॉरपोरेट जगत के 'करन-अर्जुन' की इस जोड़ी के बीच अनबन में मां के कूदने के बाद यह चौंकाने वाला मोड़ आया है। इससे पहले शिविंदर ने अपने बड़े भाई के साथ हर तरह की पार्टनरशिप से अलग होने का ऐलान कर दिया था। खातों में धांधली को लेकर फोर्टिस हेल्थकेयर की ओर से स्वतंत्र जांच का निर्णय लिए जाने के बीच छोटे भाई शिविंदर ने अपने बड़े भाई मलविंदर और रेलीगेयर के पूर्व चीफ सुनील गोधवानी पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए NCLT में  अर्जी दी थी। 

मैं केस वापस ले रहा हूं 
शिविंदर मोहन सिंह ने गुरुवार को कहा की वो अपने बड़े भाई मलविंदर सिंह के खिलाफ केस वापस लेने जा रहे हैं। वो NCLT में दायर अपने बड़े भाई मलविंदर सिंह और रेलिगेयर के पूर्व सुनील गोधवानी के खिलाफ दी गई अर्जी को वापस ले रहे हैं। इस बारे में उन्होंने NCLT में आवेदन दे दिया है। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की गई है। 

 

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बीच में कूदी मां तो बनी बात 

 

शिविंदर ने केस वापस लेने का कारण अपनी मां को बताया है। शिविंदर की ओर से दिए गए आवेदन में कहा गया है कि मां के सम्मान की वजह से दोनों पक्षों ने मध्यस्थता की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी है। शिविंदर की वकील रंजना आर गवई ने कहा कि यह याचिका अभी तक वापस नहीं ली गई है, लेकिन इसे वापस लिया जा रहा है। NCLT ने फिलहाल केस वापस लेने की इजाजत दे दी है। शिविंदर की बीमार मां चाहती हैं कि इस मामले को मध्यस्थता के जरिए घरेलू मंच पर ही सुलझाया जाए। शिविंदर ने कहा, ‘हमारी मां ने दोनों भाइयों से परिवार के बड़ों की मध्यस्थता में यह मामला सुलझाने को कहा है।  

 

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एक-दूसरे की परछाई की तरह थे   

NCLT में हाल में याचिका दायर करने के बाद शिविंदर ने कहा कि 2 दशक से लोग मलविंदर और मुझे एक दूसरे का पर्याय समझते थे। हकीकत यह है कि मैं हमेशा उनका समर्थन करने वाले छोटे भाई की तरह था। मैंने सिर्फ फोर्टिस के लिए काम किया। 2015 में राधास्वामी सत्संग, ब्यास से जुड़ गया। मैं भरोसेमंद हाथों में कंपनी छोड़ गया था। लेकिन दो साल में ही कंपनी की हालत खराब हो गई। परिवार की प्रतिष्ठा के कारण अब तक चुप रहा। ब्यास से लौटने के बाद कई महीनों से कंपनी संभालने की कोशिश कर रहा था, लेकिन विफल रहा। 

 

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बात नहीं बनी तो फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा 
शिविंदर के मुताबिक, दोनों भाइयों के बीच मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू की गई है। यदि इससे बात नहीं बनती है तो मेरे पास अपील दोबारा दायर करने का विकल्प होगा। शिविंदर की पहले की याचिका पर अंतरिम आदेश जारी करते हुए NCLT की प्रधान पीठ ने 6 सितंबर को आरएचसी होल्डिंग की शेयरधारिता और संरचना के मामले में यथास्थिति कायम रखने को कहा था। 

 

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विवाद की जड़ 10 साल पुरानी 
परिवार का यह झगड़ा रैनबैक्सी कंपनी को जापान की दाइची सांक्यो को बेचे जाने के बाद से शुरू हुआ था। इस कंपनी को एक दशक पहले 4.6 अरब डॉलर (तक करीब 1000 हजार करोड़)  में बेचा गया था। इसके बाद दोनों भाइयोंं ने मिलकर कई कारोबार में हाथ आजमाया, लेकिन ग्रुप भारी घाटे में आ गया और उस पर करीब 13,000 करोड़ रुपए का कर्ज हो गया। समय पर कर्ज नहीं चुका पाने के चलते ग्रुप की कुछ कंपनियों को अटैच कर लिया गया। इसके चलते दोनों भाइयों को फोर्टिस हैल्थकेयर की अपनी हिस्सेदारी बेचनी पड़ी। बिक्री के बाद फोर्टिस के खातों में धांधली के आरोप लगे। कहा गया कि दोनों भाइयों ने फोर्टिस के खातों से करीब 500 करोड़ रुपए ग्रुप की दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किए। 

 

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बाहरी एजेंसी से जांच कराएगी फोर्टिस 
इससे पहले फोर्टिस हेल्थकेयर ने कहा था कि वह एक बाहरी एजेंसी से कंपनी के फंड को गलत तरीके से दूसरी जगह ट्रांसफर किए जाने की स्वतंत्र जांच कराएगी। इससे पहले फरवरी में शुरू की गई जांच में कंपनी के खातों में कई तरह की गड़बड़ियां पाई गई थीं। फोर्टिस का कहना है कि कंपनी के खातों से करीब 500 करोड़ रुपए की रकम लगत तरीकों से दूसरी जगह ट्रांसफर की गई। सिंह बंधुओं ने फोर्ट‍िस हॉस्प‍िटल को बेंगलुरू स्थ‍ित मणिपाल हॉस्प‍िटल एंटरप्राइज को बेचा था। इसके साथ ही मणिपाल हॉस्प‍िटल ने सिंह बंधु की डायग्नोस्ट‍िक कंपनी SRL में भी हिस्सेदारी खरीदी थी। शिविंदर के ताजा कदम को नई जांच से भी जोड़कर देखा जा रहा है। 

 

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