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3S फॉर्मूला यूज कर TCS को बनाया नंबर-1, जानें चंद्रशेखरन के सक्‍सेज मंत्र

चंद्रशेखर के लिए सफलता के मायने थोड़े अलग हैं। वह खास तरह के सक्‍सेज मंत्र पर काम करते हैं...

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नई दिल्‍ली। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस ने एक बार फिर से आम भारतीयों को गर्व करने का मौका दिया है। कंपनी 100 अरब डॉलर की मार्केट वैल्‍यू हासिल करने वाली देश की पहली कंपनी बन गई है। इसी के साथ ही उसने यह साबित कर दिया है कि सही रणनीति और बेहतर परफॉर्मेंस आपको नईं ऊंचाईयों पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है।

टीसीएस को इस मुकाम पर पहुंचाने में जिस शख्‍स की भूमिका रही वो हैं टाटा सन्‍स के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन। चंद्रशेखरन लंबे समय तक टीसीएस के चेयरमैन रहे और उन्‍हीं की अगुआई में टीसीएस टाटा ग्रुप की नंबर वन कंपनी बनने के साथ ही देश की सबसे वैल्‍यूएबल कंपनी भी बनी। चंद्रशेखरन के बेहतरीन परफॉर्मेंस का ही नतीजा था कि सायरस मिस्‍त्री को हटाने के बाद उन्‍हें पूरे ग्रुप की कमान दे दी गई।

 

3S फॉर्मूले पर भरोसा 
चंद्रशेखर के लिए सफलता के मायने थोड़े अलग हैं। वह खास तरह के सक्‍सेज मंत्र पर काम करते हैं। कई मौकों पर अपनी सफलता के मंत्र लोगों के सामने शेयर भी करते रहे हैं। इस शार्ट फॉर्म में 3S फॉर्मूला भी कह सकते हैं। इसमें हर S के अलग अलग मायने हैं। इसकी चर्चा उन्‍होंने टाटा सन्‍स का चेयरमैन बनने के मौके पर की थी, साथ ही नए साल पर टाटा के 7 लाख कर्मचारियों को दिए संदेश में भी वह इन बातों का जिक्र करना नहीं भूले थे।  

 

सिम्प्लिीफिकेशन (S) 
यानी 3S फॉर्मूले का पहला S। चंद्रशेखरन के मुताबिक, चीजों को जटिल करने की बजाय सरल करो, सफलता का यही मंत्र है। टाटा सन्‍स का चेयरमैन बनने के बाद भी उन्‍होंने कहा था कि वह गुप के जटिल पैटर्न को सरल करना चाहते हैं। साथ ही उन्‍होंने कर्मचारियों को दिए अपने संदेश में भी सरलता का जिक्र किया था।  

 

 

सिनर्जी (S) 
यानी 3S फॉर्मूले का दूूूूसरा S। चंद्रशेखरन के मुताबिक, सिनर्जी यानी तालमेल के बिना कोई बिजनेस बड़ा नहीं होता है। अगर आपको ग्रो करना है तो इनोवेशन और इम्प्लिमेंटेशन के बीच तालमेल जरूरी है।  

 

 

स्‍केल (S)  
यानी 3S फॉर्मूले का तीसरा  S।  चंद्रा के मुताबिक, जब दुनिया बदल रही हो तो जटिलता को खत्‍म करने के साथ आपसी तालमेल जरूरी है। यह स्‍केल के बिना नहीं हो सकता है। बिना इसके आप गोल नहीं सेट कर सकते हैं और गोल के बिना ग्रोथ नहीं आती है। 

 

मुश्किल से डरो मत, मौका भुनाना सीखो 

चंद्रशेखरन के मुताबिक, मुश्किल से डरो नहीं, बल्कि मिले मौकों को भुनाने की कोशिश करों, सफलता इसी से मिलती है। बड़े बदलाव के दौर में यह रूल काम करता है। चंद्रशेखरन के मुताबिक, बिजनेस में चुनौतियां तो हमेशा बनी रहती हैं, लेकिन बढ़ता वही है जो मौकों को भुनाने की कोशिश करता है। 

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