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मिलेनियल्स और बूमर्स तय करते हैं किसी भी नए प्रोडक्ट का भविष्य

दुनिया में बूमर्स की संख्या 7.7 करोड़ है जबकि मिलेनियल्स की संख्या 9.9 करोड़ है।

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नई दिल्ली। वर्तमान में कंपनियां अपने प्रोडक्ट के विज्ञापन के लिए अलग-अलग उपाय सोच रही हैं। एक समय था जब कंपनियां अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन करने के लिए बड़ी हस्ती को चुनती थी। लेकिन अब यह तरीका पुराना हो चुका है और कंपनियों ने अपने प्रोडक्ट का विज्ञापन करने के लिए मिलेनियल्स (18-35 वर्ष) और बूमर्स (35-45 वर्ष) को टारगेट करना शुरू कर दिया है। डेलोएट की एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया में मिलेनियल्स की सख्यां बूमर्स की संख्या से ज्यादा है। दुनिया में बूमर्स की संख्या 7.7 करोड़ है जबकि मिलेनियल्स की संख्या 9.9 करोड़ है। यह मिलेनियल्स बाजार के एक बहुत बड़े हिस्से को प्रभावित करते हैं। 

 

लोगों को आकर्षित करने के लिए कंपनियां ले रही डिजिटल दुनिया का सहारा
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बूमर्स की संख्या कम होने के कारण उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि जहां एक और मिलेनियल्स ट्रेंड को आगे बढ़ाते हैं वहीं बूमर्स के पास खर्च करने की क्षमता होती है। आजकल पूरी दुनिया डिजिटलाइज हो गई है और मिलेनियल्स की डिजिटल दुनिया में एक अलग पहचान होती है। इसी के चलते कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के विज्ञापन के लिए डिजिटल दुनिया का सहारा ले रही हैं। कंपनियों का मानना है कि डिजिटल दुनिया में वह आसानी से ग्राहकों को अपने प्रोडक्ट्स की तरफ आकर्षित कर सकती हैं। 


प्रोडक्ट की ब्रांडिंग का सबसे अच्छा ऑप्शन है सोशल मीडिया
आजकल युवाओं में फेसबुक, इंस्टाग्राम का क्रेज काफी हद तक बढ़ गया है। वह फैशन से लेकर अपनी लाइफ के स्पेशल मूमेंट्स को सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं। साथ ही इन युवाओं की सोशल मीडिया पर जबरदस्त फैन फॉलोइंग भी होती है जिससे इनके द्वारा डाले गए पोस्ट को कुछ ही समय में लाखों लाइक्स मिल जाते हैं। इसी के चलते कंपनियों ने इन युवाओं को टारगेट किया है और इनके द्वारा अपने ब्रांड का विज्ञापन करवाने की कोशिश की जा रही है। इस तरह से मिलेनियल्स जिस भी ब्रांड को इंडोर्स करेंगे इससे कंपनी के प्रोडक्ट की बिक्री में बढ़ोतरी होगी। कंपनियों  ने इस बात पर गौर किया है कि सोशल मीडिया किसी भी प्रोडक्ट की ब्रांडिंग का सबसे अच्छा ऑप्शन है। 

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ग्राहकों को आकर्षित करती है प्रभावशाली लोगों की बातें
 एक रिसर्च में पाया गया है कि ग्राहक किसी बड़ी हस्ती द्वारा किए गए इंजोर्समेंट के बजाए प्रभावशाली लोगों की बातों पर ज्यादा यकीन करते हैं। कुछ लक्जरी ब्रांड्स की अगर बात की जाए तो बाकी सालों के मुकाबले पिछले साल अपनी रणनीतियों में बदलाव करके और डिजिटल दुनिया में उतरकर उन्होंने ऑनलाइन बाजार में अपना एक अलग मुकाम बना लिया है और मल्टी ब्रांड ऑनलाइन शॉप का आकार ले लिया है। 

 

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भारत में बड़े ब्रांड्स की राह अभी भी मुश्किल
भारत की बात की जाए तो यहां कुछ  विदेशी कंपनियां भारतीय बाजार में अपने पांव पसारने की कोशिश कर रही हैं। इसके साथ ही भारत में इन कंपनियों ने अपनी रणनीति में भी बदलाव किया है। यहां पर कुछ छोटे ब्रांड्स ने तो अपनी जगह बना ली है लेकिन बड़े ब्रांड्स को अपने पांव पसारने में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही भारत में नोटबंदी का भी असर कंपनियों पर पड़ा है। 

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