Home » Industry » Companiesअच्‍छे विंटर सीजन से पटरी पर लौटा वुलन हौजरी कारोबार-Ludhiana woolen hosiery industry got boost from good winter season

ट्रैक पर आई लुधियाना की वुलन हौजरी इंडस्‍ट्री, अच्‍छे विंटर सीजन का मिला फायदा

पिछले कुछ सालों से वुलन हौजरी बिजनेस में आई सुस्‍ती ने हौजरी इंडस्‍ट्री को काफी नुकसान पहुंचाया था।

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नई दिल्‍ली. कम सर्दी, पिछले साल हुई नोटबंदी और GST की वजह से नुकसान झेल रही लुधियाना की वुलन हौजरी इंडस्‍ट्री वापस ट्रैक पर लौट आई है। इस साल अच्‍छी सर्दी पड़ने के चलते वुलन हौजरी कारोबारियों ने राहत की सांस ली है। बता दें पिछले कुछ सालों से वुलन हौजरी बिजनेस में आई सुस्‍ती ने हौजरी इंडस्‍ट्री को काफी नुकसान पहुंचाया था। स्थिति यह थी कि मैन्‍युफैक्‍चरर्स के पास पड़ा पुराना माल भी नहीं बिक पा रहा था। इसी को देखते हुए इस बार प्रॉडक्‍शन कम रहा लेकिन इस बार डिमांड ज्‍यादा होने के चलते कारोबारी इसे पूरा नहीं कर पा रहे हैं।  

 

40% कम रहा वुलन हौजरी का प्रॉडक्‍शन

निटवियर एंड अपैरल मैन्‍युफैक्‍चरर्स एसोसिएशन ऑफ लुधियाना (KAMAL) के प्रे‍सिडेंट सुदर्शन जैन ने moneybhaskar.com को बताया कि पिछले तीन सालों से बिक्री कम रही। 2016 में नोटबंदी इसकी वजह बनी और उससे पहले ठंड न पड़ना। इसलिए पिछले कुछ सालों में बिजनेस का हाल देखते हुए और पिछले साल का प्रॉडक्‍ट मौजूद रहने के चलते इस साल प्रॉडक्‍शन कम रहा।

 

GST भी बना वजह 

निटवियर क्‍लब के चेयरमैन विनोद थापर ने मनीभास्‍कर को बताया कि इस साल GST के चलते भी वुलन हौजरी के प्रॉडक्‍शन को नुकसान पहुंचा। पिछले साल के प्रॉडक्‍शन से तुलना करें तो इस साल प्रॉडक्‍शन में 25 फीसदी की गिरावट देखी गई। लेकिन बाकी के सालों के मुकाबले इस साल प्रॉडक्‍शन 40 फीसदी गिर गया। 

 

 

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इस साल निकल गया सारा पुराना माल 

कारोबारियों के मुताबिक इस साल अच्‍छी सर्दी से डिमांड अच्‍छी होने के कारण पिछला माल निकल गया और वर्किंग कैपिटल नहीं फंसी। हालांकि मुनाफा इस बार भी नहीं हुआ लेकिन फिर भी कारोबारी राहत महसूस कर रहे हैं। 

 

नहीं बढ़ीं कीमतें

जैन ने बताया कि भले ही इस साल इंडस्‍ट्री को 5 फीसदी जीएसटी का सामना करना पड़ रहा हो लेकिन कारोबारियों ने इसे ग्राहक पर नहीं डाला। वुलन गारमेंट्स की कीमत पिछले साल से नहीं बढ़ाई गईं। इस साल कारोबारियों का उद्देश्‍य किसी भी तरह पुराने माल को निकालना था।  

 

फरवरी अंत में पता चलेगा अगले सीजन का अनुमान 

आगे के सीजन के लिए जैन ने कहा कि अगले साल बिजनेस कैसा रहेगा, इसका अनुमान फरवरी क बाद ही लगाया जा सकेगा क्‍योंकि इस वक्‍त माल मैन्‍युफैक्‍चरर्स के पास से तो जा चुका है लेकिन रिटेलर्स के यहां अभी भी बिक्री जारी है। फरवरी के अंत तक रिटेलर्स के पास से भी बिक्री का आंकड़ा और पेमेंट आ जाएगी और तब अगले सीजन के लिए अनुमान जताया जा सकेगा। वहीं थापर ने कहा कि सारा पुराना माल निकल जाने से समर सीजन अच्‍छा रहने की उम्‍मीद है। 

 

क्‍या रही पिछले तीन सालों में एक्‍सपोर्ट की स्थिति 

वूलन गारमेंट के एक्‍सपोर्ट में लगातार गिरावट आ रही है। DGCI & S कोलकाता के आंकड़ों के मुताबिक 2014-15 में एक्‍सपोर्ट में 12 फीसदी की वृद्धि थी लेकिन 2015-16 में वूलन गारमेंट का एक्‍सपोर्ट में 1.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यही हाल 2016-17 में भी रहा। पिछले वित्‍त वर्ष वूलन गारमेंट के एक्‍सपोर्ट में 14.46 फीसदी की गिरावट आई। हौजरी कारोबारियों का कहना है कि इस साल जीएसटी के इनपुट क्रेडिट को देखते हुए सरकार ने ड्यूटी ड्रॉ बैक घटा दिया। इसका भी बिजनेस पर बुरा असर पड़ा। ड्यूटी ड्रॉ बैक घटने से कच्चा माल इंपोर्ट करने की लागत बढ़ गई है। इसके चलते इस बार एक्सपोर्ट में 50 फीसदी गिरावट की आशंका है। विदेशों में भारत के मुख्य प्रतिद्वंदी चीन, बांग्लादेश और श्रीलंका हैं।

 

कितनी बड़ी है लुधियाना की होजरी इंडस्‍ट्री 

लुधियाना की होजरी इंडस्‍ट्री 15 हजार करोड़ रुपए की है, जिसमें से 1000 करोड़ का एक्‍सपोर्ट होता है। घरेलू वूलन होजरी मार्केट में लुधियाना इंडस्‍ट्री की 90 फीसदी से ज्‍यादा हिस्‍सेदारी है। देश में यहां के वूलन गारमेंट की सबसे ज्यादा डिमांड नॉर्थ व सेंट्रल इंडिया से आती है। ईस्ट से भी डिमांड है लेकिन साउथ और वेस्ट इंडिया से डिमांड काफी कम है। वूलन होजरी के टोटल प्रोडक्‍शन में से 7-8 फीसदी का एक्‍सपोर्ट होता है। विदेशों में मलेशिया, साउथ अफ्रीका, मिडिल ईस्ट में यहां के बने गारमेंट की डिमांड है। 

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