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300 तक वर्कर वाली कंपनियों के लिए छंटनी करना होगा आसान, इंडस्ट्रियल डिस्‍प्‍यूट्स एक्‍ट में बदलाव की तैयारी

नई दिल्‍ली. केन्‍द्रीय श्रम मंत्रालय ने कुछ राज्‍यों द्वारा इंडस्ट्रियल डिस्‍प्‍यूट्स एक्‍ट में संशोधन किए जाने को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन का उद्देश्‍य 300 तक वर्कर्स वाली फैक्ट्रियों को सरकार की मंजूरी लिए बिना लेबर को हटाने या छंटनी करने का अधिकार प्रदान करना है। 

 

बता दें कि राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और असम पहले ही इंडस्ट्रियल डिस्‍प्‍यूट एक्‍ट में संशोधन कर चुके हैं। महाराष्‍ट्र में भी संशोधन के लिए कानून पास होने वाला है, जबकि अन्‍य तीन राज्‍य बदलाव की तैयारी कर रहे हैं। पहले की सरकारें इंडस्ट्रियल डिस्‍प्‍यूट एक्‍ट में बदलाव न करने की इच्‍छा जताती रहीं लेकिन देश में 29 में से 19 राज्‍यों, जिनमें से ज्‍यादातर इंडस्ट्रियल स्‍टेट हैं, में बीजेपी सरकार बनने के बाद उन्‍होंने इस एक्‍ट में बदलावों को आसान बना दिया। 

 

फिक्‍स्‍ड टर्म लेबर कॉन्‍ट्रैक्‍ट के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन हुआ जारी 

श्रम मंत्रालय ने देश के सभी सेक्‍टर्स में वर्कर्स के लिए फिक्‍स्‍ड टर्म इंप्‍लॉयमेंट लागू करने के लिए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। यह नोटिफिकेशन इंडस्ट्रियल इंप्‍लॉयमेंट (स्‍टैंडिंग ऑर्डर्स) सेंट्रल (अमेंडमेंट) रूल्‍स, 2018 का हिस्‍सा है। फिक्‍स्‍ड टर्म लेबर कॉन्‍ट्रैक्‍ट कंपनियों को शॉर्ट टर्म असाइनमेंट्स के लिए वर्कर्स नियुक्‍त करने और प्रोजेक्‍ट पूरा होने के बाद उन्‍हें हटाने का अधिकार प्रदान करता है। केन्‍द्र की ओर से नोटिफाई हो जाने के बाद राज्‍य इन नियमों में अपने हिसाब से संशोधन कर सकते हैं। ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को मंत्रालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है।  

 

फिक्‍स्‍ड टर्म वर्कर को मिलेंगे स्‍थायी वर्कर वाले लाभ 

फिक्‍स्‍ड टर्म इंप्‍लॉयमेंट के तहत किसी फैक्‍ट्री में नियुक्‍त वर्कर्स को काम के घंटे, वेतन, अलाउंसेज आदि के मामले में वही सब लाभ मिलेंगे जो एक स्‍थायी वर्कर को मिलते हैं। लेकिन इसमें इंप्‍लॉयर को यह अधिकार होगा कि वह कॉन्‍ट्रैक्‍ट खत्‍म हो जाने के बाद वर्कर को बिना नोटिस दिए निकाल सके। साथ ही इम्‍प्‍लॉयर किसी वर्कर को बिना किसी कॉन्‍ट्रैक्‍टर की मदद से सीधे तौर पर नियुक्‍त कर सकता है। 

 

नीति आयोग भी कर चुका है सिफारिश

अभी फिक्स्‍ड टर्म कॉन्‍ट्रैक्‍ट केवल अपैरल मैन्‍युफैक्‍चरिंग सेक्‍टर में लागू है। नीति आयोग ने पिछले साल पेश किए अपने तीन साल के एक्‍शन प्‍लान में इस कॉन्‍ट्रैक्‍ट को अपैरल के अलावा अन्‍य सेक्‍टर्स में भी लागू करने की सिफारिश की थी। कैबिनेट भी कह चुका है कि इस कॉन्‍ट्रैक्‍ट को फुटवियर, लेदर और एक्‍सेसरीज सेक्‍टर में भी लागू किया जाएगा ताकि ग्‍लोबल स्‍केल पर बड़े पैमाने पर इन्‍वेस्‍टमेंट लाए जा सकें। 

 

क्‍या है सरकार के इन कदमों का उद्देश्‍य 

सरकार चाहती है कि देश में इन्‍वेस्‍टमेंट बढ़ाने, रोजगार पैदा करने और लॉन्‍ग टर्म इकोनॉमिक हेल्‍थ सुनिश्चित करने के लिए स्‍ट्रक्‍चरल रिफॉर्म लाए जाएं, इसके लिए लेबर पॉलिसी में बदलाव भी एक अहम भूमिका रखता है। केन्‍द्र सरकार राज्‍यों को जहां तक संभव हो नियमों में बदलाव कर सुधार लाने के लिए प्रोत्‍साहित कर रही है। इसके लिए सरकार नोटिफिकेशन भी जारी कर रही है। लेबर कानून में जिन संशोधनों को केन्‍द्र लागू नहीं कर सकता, उन्‍हें राज्‍यों को मुख्‍यमंत्री स्‍तर पर हस्‍तक्षेप कर लागू करने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे प्रस्‍तावों को केन्‍द्र सरकार तुरंत मंजूरी भी दे रही है। इंडस्ट्रियल डिस्‍प्‍यू‍ट्स एक्‍ट में राज्‍यों द्वारा बदलाव इसी का उदाहरण है। सरकार को उम्‍मीद है कि इन उपायों से भारत की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग सुधरेगी और नियुक्तियों को प्रोत्‍साहन मिलेगा। सरकार के कामों की लिस्‍ट में रोजगार सृजन सबसे अहम है क्‍योंकि नौकरी ढूंढने वालों की संख्‍या में हर रोज इजाफा हो रहा है। 

 

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