Home » Industry » CompaniesKumar Mangalam Birla wants purchasing of US aluminum maker Aleris but Donald Trump is big hurdel

जिसे खरीदने में नाकाम रहा चीन, उसके लिए आगे आए बिड़ला, अमेरिकी कंपनी के लिए दिया 18 हजार करोड़ का ऑफर

हिंडाल्‍को ने Aleris को खरीदने की दिया प्रस्‍ताव, अब ट्रम्‍प की मंजूरी का इंतजार....

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नई दिल्‍ली. अगर राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्‍प का प्रशासन मेहरबानी करता है तो कर्ज में डूबी अमेरिकी एल्‍यूमिनियम कंपनी एलेरिस (Aleris) का मालिकाना हक आने वाले दिनों में कुमार मंगलम बिड़ला की अगुआई वाले आदित्‍य बिड़ला समूह के पास होगा। बिड़ला की कंपनी हिंडाल्‍को इसे खरीदने की योजना बना रही है। Aleris को पहले एक चाइनीज कंपनी ने खरीदने की योजना बनाई थी, लेकिन राष्‍ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए ट्रम्‍प प्रशासन ने इस सौदे को मजूरी देने से इनकार कर दिया था। ऐसे में बड़ा सवाल उठता है कि क्‍या चीनी कंपनी को इनकार करने के बाद ट्रम्‍प प्रशासन बिड़ला पर मेहरबानी करेगा। 

 

... तो दुनिया की दूसरी टॉप एल्‍यूमिनियम कंपनी बन जाएगी हिंडाल्‍को   
बृहस्‍पतिवार को ही आदित्‍य बिड़ला ग्रुप ने Aleris की खरीद प्रक्रिया में शामिल होने की घोषणा की थी। हिंडाल्‍को 2.6 अरब डॉलर (करीब 18 हजार करोड़) में इसका अधिग्रहण करना चाहती है। इसमें कंपनी पर बकाया कर्ज भी शामिल होगा। हिंडाल्‍को अगर यह अधिग्रहण करने में सफल होती है तो वह चीन के Hongqiao ग्रुप के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी एल्‍यूमिनियम प्रोड्यूसर हो जाएगी।  

 

...क्‍या ट्रम्‍प प्रशासन देगा सौदे की इजाजत 
अमेरिका के संघीय कानून के मुताबिक, इस डील के लिए अमेरिका में विदेशी निवेश पर बनी कमेटी (CFIUS) की मंजूरी की जरूरत होगी। यह अमेरिकी सरकार के अधिकारियों का एक सीक्रेट पैनल है। इस पैनल की सलाह पर ही एक विदेशी कंपनी को अमेरिकी कंपनी के अधिग्रहण को मंजूरी दी जाती है। हाल के दिनों में कम्‍प्‍यूटर चिप बनाने वाली और फाइनेंशियल सर्विस से जुड़ी अमेरिकी कंपनियों के अधिग्रहण की चीनी कंपनियों कोशिशों को CFIUS की नामूंजूरी का सामना करना पड़ा है। इसी कड़ी में चीन की फेमस मेेटल कंपनी Liu Zhongtian ने Aleris को भी खरीदने का मन बनाया था, लेकिन CFIUS  ने मंजूरी देने इसे इनकार कर दिया था। Liu Zhongtian ने Aleris के सौदे के लिए 2.3 अरब डॉलर का ऑफर दिया था। इसी के बाद Aleris के निवेशकों को नया खरीददार खोजने के लिए विवश होना पड़ा। 

 

आगे पढ़ें- बिडला को ट्रम्‍प से क्‍यों लग रहा है डर 

 

ट्रम्‍प कुछ भी कर सकते हैं 
हिंडाल्‍को के अधिकारी मान रहे हैं कि चीनी लोगों की तरह उन्‍हें मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि कुमार मंगलम बिड़ला को लगता है कि ट्रम्‍प के बारे में कुछ भी कयास नहीं लगाया जा सकता है। यानी वो सौदे को मंजूरी देने से इनकार भी कर सकते हैं। इस बाबत मुंबई में पत्रकारों से बातचीत में बिड़ला ने कहा भी था कि उन्‍हें खुद नहीं पता कि ट्रम्‍प क्‍या सोचते हैं।

 


ट्रेड पर दोनों देशों में तल्‍खी बढ़ी है 
चीन को काउंटर करने के लिए ट्रम्‍प प्रशासन भारत के साथ मजबूर रिश्‍ते बनानी की कोशिश कर रहा है। हालांकि इसी बीच दोनों देशों के बीच ट्रेड वार के चलते टेंशन भी बढ़ रही है। भारत सरकार की ओर से हार्ले डेविडसन बाइक पर ऊंची कस्‍टम ड्यूटी वसूले जाने की ट्रम्‍प खुले तौर पर आलोचना कर चुके हैं। भारत से इम्‍पोर्ट होने वाले स्‍टील और एल्‍यूमिनियम पर उनका प्रशासन टैरिफ भी लगा चुका है। इसका भारतीय उत्‍पादकों पर प्रतिकूल असर भी पड़ा है। ट्रम्‍प के इस कदम ने भारत को भी अमेरिका से आने वाले बदाम, सेब, सीफूड और ऑयरन-स्‍टील प्रोडक्‍ट्स पर ज्‍यादा टैरिफ लगाने को मजबूर कर दिया।  

 

आगे पढ़ें- Novelis के साथ होगा सौदा 

 

Novelis के साथ होगा सौदा 
अमेरिका में हिंडाल्‍को के पास पहले से ही बड़ी सब्‍सीडरी नोवेलिस (Novelis) मौजूद है। अगर सौदे पर बात बनती है तो Aleris का मर्जर Novelis में होगा। अमेरिका में एल्‍यूमिनियम कैन बनाने में Novelis एक प्रभावशाली कंपनी है। यह अमेरिकी ऑटो इंडस्‍ट्री की बड़ी सप्‍लायर है। Aleris इसके साथ आती है तो कंपनी को बिल्डिंग और एयरप्‍लेन में यूज होने वाले एल्‍यूमिनियन की सप्‍लाई में बड़ी बढ़त मिल सकती है। Aleris इस क्षेत्र की बड़ी प्‍लेयर है। 


 Novelis का दावा- हम अमेरिका में दे रहे नौकरी 
मर्जर के सवाल पर Novelis के चीफ फाइनेंस ऑफिसर देवेंद्र आहूजा कहते हैं कि उनकी कंपनी अमेरिका में निवेश कर रही है। लोगों के लिए रोजगार के मौके मुहैया करा रही है। आखिर अमेरिकी प्रशासन को और क्‍या चाहिए। अधिग्रहण के बाद Novelis Aleris के कर्मचारियों की छंटनी भी नहीं करेगी। हालांकि टॉप मैनेजमेंट और कॉरपोरटे बैक ऑफिस में डूप्‍लीकेशन की स्थिति में ले ऑफ जरूर दिया जाएगा। यही नहीं हिंडाल्‍को Aleris की कुछ एडवांस टेक्‍नोलॉजी को भारत में भी लाना चाहती है, ताकि इंडियन ऑपरेशन को और मजबूत तथा बेहतर बनाया जा सके।   

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