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एक साथ बिकेगा एअर इंडिया का डॉमेस्टिक और इंटरनेशनल ऑपरेशनः जयंत सिन्हा

कर्ज के बोझ से दबी एअर इंडिया के डिसइन्वेस्टमेंट को लेकर तस्वीर साफ होती दिख रही है।

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नई दिल्ली. कर्ज के बोझ से दबी एअर इंडिया के डिसइन्वेस्टमेंट को लेकर तस्वीर साफ होती दिख रही है। स्टेट सिविल एविएशन मिनिस्टर जयंत सिन्हा ने कहा कि सरकारी एयरलाइन के डॉमेस्टिक और इंटरनेशनल ऑपरेशंस को एक साथ बेचा जाएगा।

 

सरकार ने एअर इंडिया को रिवाइव करने के प्रयासों के तहत कर्ज से दबी सरकारी एयरलाइन के स्ट्रैटजिक डिसइन्वेस्टमेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सिन्हा ने कहा, 'बिडिंग प्रोसेस के माध्यम से एक इंटिग्रेटेड एयरलाइन (एअर इंडिया) की पेशकश की जा रही है, जिसका मतलब डॉमेस्टिक और इंटरनेशनल ऑपरेशंस को मिलाना है।'

 

 

ऑपरेशन को इंटिग्रेट करने का मिलेगा मौका

डिसइन्वेस्टमेंट प्रोसेस पर उन्होंने कहा कि सरकार अभी भी एअर इंडिया की ऐसी सब्सिडियरीज की पहचान करने में लगी हुई है, जिसे अलग से ऑफर किया जाना चाहिए।

मिनिस्टर ने कहा, 'यदि उनको अलग-अलग ऑफर किया जाता है, तो भी आप उनमें से हरेक के लिए बिड करना चाहते हैं और फिर से इंटिग्रेड करना चाहते हैं तो हम आपके लिए यह आसान बना रहे हैं।'

 

 

हाल में एअर इंडिया को मिले नए सीएमडी

सीनियर आईएएस अधिकारी प्रदीप सिंह खरोला को हाल में एअर इंडिया का नया चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) नियुक्त किया गया है। खैरोला, राजीव बंसल की जगह लेंगे, जो तीन महीने से कुछ ज्यादा वक्त से एंटरिम सीएमडी की भूमिका में थे।

अगस्त में अश्वनी लोहानी के हटने के बाद बंसल को तीन महीने के लिए एयर इंडिया का एंटरिम सीएमडी बनाया गया था। लोहानी को रेलवे बोर्ड का चेयरमैन बना दिया गया था।

 

 

खरोला के पास होगी अहम जिम्मेदारी

खरोला कर्नाटक कैडर से 1985 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। फिलहाल वह बेंगलुरू मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हैं। एयर इंडिया में नए सीएमडी की नियुक्ति इस लिहाज से भी अहम है, क्योंकि सरकार फिलहाल सरकारी एयरलाइन के स्ट्रैटजिक डिसइन्वेस्टमेंट की प्रक्रिया तो अंतिम रूप देने में लगी हुई है।

प्रदीप सिंह खरोला को एअर इंडिया का पूर्णकालिक सीएमडी बनाया गया है और अगर सरकार सरकारी कंपनी के प्राइवेटाइजेशन पर आगे बढ़ती है तो खैरोला पर अहम जिम्मेदारी होगी।

 

 

नवंबर में लिया था 1500 करोड़ का लोन

सरकारी एयरलाइंस को नवंबर में ही तत्‍काल के आवश्‍यक खर्चों (वर्किंग कैपिटल) के लिए बैंक ऑफ इंडिया से 1500 करोड़ रुपए का लोन लेना पड़ा था। एअर इंडिया ने इस संबंध में टेंडर जारी किया था और एक माह से भी समय में उसे यह लोन मिल गया। पिछले कुछ महीनों में यह दूसरा मौका है जब एअर इंडिया को सरकारी बैंक से लोन मिला है।

 

दो बैंक पहले दे चुके हैं 3,250 करोड़ का कर्ज

इससे पहले, एअर इंडिया को 3,250 करोड़ रुपए का शॉर्ट टर्म लोन दो बैंकों इंडसइंड बैंक और पंजाब नेशनल बैंक से मिला था। यह लोन भी तत्‍काल वर्किंग कैपिटल जरूरतों के लिए लिया गया है। इसके लिए टेंडर सितंबर में जारी किया गया था।

पिछले तीन महीने की बात की जाए तो, कम से कम दो सरकारी बैंकों, बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक ने एअर इंडिया को लोन उपलब्‍ध कराए हैं। बीमारू एविशएशन कंपनी के रिवाइवल के लिए सरकार उसके स्‍ट्रैटजिक डिसइन्‍वेस्‍टमेंट की प्रक्रिया लगभग फाइनल करने वाली है। बता दें, एअर इंडिया पर 55 हजार करोड़ रुपए से ज्‍यादा का कर्ज है।

 

 

मिला था 30 हजार करोड़ का बेलआउट पैकेज

- 1930 में शुरू की गई एअर इंडिया की फाइनेंशियल कंडीशन 2007 से ही खराब है और उसका घाटा लगातार बढ़ रहा है।

- हालांकि, 2012 में उस वक्त की यूपीए सरकार ने एअर इंडिया को 30 हजार करोड़ का बेलआउट पैकेज भी दिया। इसके बावजूद कंपनी की खराब फाइनेंशियल कंडीशन पर काबू नहीं पाया जा सका।

 

मर्जर भी काम नहीं आया

-2007 में एअर इंडिया और घरेलू एयरलाइन कंपनी इंडियन एयरलाइंस का नेशनल एविएशन कंपनी लिमिटेड (एनएसीआईएल) में मर्जर किया गया। इसके बाद दोनों कंपनियों की देनदारी एनएसीआईएल पर आ गई। 2010 में एनएसीआईएल का नाम बदलकर एअर इंडिया लिमिटेड कर दिया गया।

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