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एक बार फिर चर्चा में आई 'टॉवेल' कंपनी वेलस्पन, US से ब्रिटेन तक में है फेमस

वेलस्‍पन के एमडी ने 150 करोड़ रुपए का राजेश मांडवेवाला ने मुंबई में हाल में 150 करोड़ रुपए लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा है।

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नई दिल्ली. वेलस्‍पन के एमडी ने 150 करोड़ रुपए का राजेश मांडवेवाला ने मुंबई में हाल में 150 करोड़ रुपए लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा है। वेलस्पन सबसे बड़ी तौलिया (टॉवेल) निर्माता कंपनी है। अमेरिका में हर तीसरा और इंग्लैंड में हर दूसरा व्यक्ति जो टॉवेल इस्तेमाल करता है, वह गुजराती कंपनी वेलस्पन ग्लोबल ब्रांड्स का होता है। कंपनी विंबलडन के लिए भी टॉवेल सप्लाई करती है।

 

2006 में खरीदा था ब्रिटिश टॉवेल ब्रांड

 

वेलस्पन को उस वक्त बेहद फायदा हुआ, जब कंपनी ने अपनी ग्लोबल पहुंच बनाने के लिए साल 2006 में ब्रिटिश टॉवेल ब्रांड क्रिस्टी को खरीद लिया। इसके बाद कंपनी की सेल बढ़ गई। 2010 में कंपनी ने टॉवेल प्लांट मैनचेस्टर से वापी (गुजरात) में शिफ्ट कर लिया। कंपनी भारत में टॉवेल बिक्री 'स्पेसेज होम एंड बियॉन्ड' के जरिए करती है। इसके अलावा कंपनी 'स्पोर्ट्स 365' के जरिए युवा खिलाड़ियों के लिए टॉवेल की बिक्री करती है। अमेरिका के कुल टॉवेल इंपोर्ट में वेलस्‍पन की हिस्सेदारी 16 फीसदी है।

 

रॉयल फैमिली के लिए टॉवेल बनाती थी क्रिस्टी

 

विंबलडन सहित कई स्पोर्ट्स इवेंट और रॉयल फेमिलीज में सिर्फ ब्रिटिश कंपनी क्रिस्टी के टॉवेल ही सप्लाई होते थे। जब वेलस्‍पन इंडिया ने क्रिस्टी को खरीदा, तो इसका सीधा फायदा इसे हुआ। शुरुआत में कंपनी ने कम टॉवेल सप्लाई किए, लेकिन 2010 तक कंपनी की बिक्री में अच्‍छी-खासी तेजी आ गई। 2010 में वेलस्‍पन ने कुल 70 हजार टॉवेल सप्लाई किए थे। जबकि इस साल एक लाख टॉवेल सप्लाई करके नया रिकॉर्ड बनाया है।

 

आगे पढ़ें - खास है कंपनी के टॉवेल

इसलिए खास हैं टॉवेल

 

वेलस्पन टॉवेल के रंग और डिजाइन को लेकर खास प्रयोग करती है। विंबलडन में जो टॉवेल भेजे जाते हैं, वह ग्रीन या ब्राइट पिंक कलर के होते हैं। इन टॉवेल पर चैम्पियनशिप का चिह्न बना रहता है। उस पर टूर्नामेंट का मौजूदा और आगामी साल भी अंकित रहता है। मेल खिलाड़यों के लिए क्लासिक ग्रीन और पर्पल कलर के टॉवेल होते हैं जिन पर रैकेट प्रिंट होता है। वहीं, फीमेल खिलाडि़यों के लिए ग्रीन और लाइट ब्‍लैक कलर के टॉवेल भेजे जाते हैं।

 

विशेष तकनीक से बनते हैं विंबलडन में भेजे गए टॉवेल

 

विंबलडन में भेजे जाने वाले टॉवेल का उत्पादन खास तकनीक से होता है। इस टॉवल को अलग-अलग मूल कलर के धागे से बनाया जाता है। इसमें जेक्वार्ड लूक्स (कपड़े का प्रकार) इस्तेमाल किया जाता है। इस टॉवेल को फाइनल फिनिशिंग से पहले कई बार धोया जाता है। साथ ही पैकिंग भी खास तरीके से की जाती है। वेलस्‍पन ग्लोबल ब्रांड लिमिटेड की एएमडी दीप्ती गोयनका के मुताबिक हमारे लिए विंबलडन में टॉवेल भेजना गर्व की बात है। खिलाड़ी भी कंपनी के टॉवेल ऑर्डर कर रहे हैं।

 

यह है कीमत

 

विंबलडन में जो टॉवेल भेजे जाते हैं, उनमें बड़े टॉवेल की कीमत लगभग 1,295 रुपए और उससे छोटे टॉवेल की कीमत 995 रुपए है। यह टॉवेल ई-कॉमर्स प्‍लेटफार्म अमेजन और स्नैपडील पर भी उपलब्‍ध हैं।]

 

आगे पढ़ें - कभी थी बंद होने के कगार पर

बंद होने के कगार पर आ गई थी कंपनी

 

कंपनी की शुरुआत 1985 में पालघर में एक छोटे से उद्योग के रूप में हुई। 1990 के दशक में सरकार की एक स्कीम के तहत कंपनी के कारोबार बढ़ाया। इस स्कीम के तहत कंपनियों को आयातित मशीनों पर ड्यूटी में छूट मिलती थी। इसी के साथ वेलस्पन टेक्सटाइल कारोबार में उतरी। लेकिन शुरुआत में कंपनी को ग्राहक नहीं मिलते थे। वेलस्‍पन के संस्थापक और चेयरमैन बीके गोयनका के मुताबिक कंपनी एक समय बंद होने के कगार पर आ गई थी। उस समय ब्याज दरें बहुत ऊंची थीं और कंपनी कुल वर्किंग कैपिटल पर 22 फीसदी ब्याज ही चुकाती थी।

 

टेक्सटाइल कंपनी है वेलस्पन

 

वेलस्पन एक टेक्सटाइल कंपनी है। यह कंपनी पाइप, स्टील, एनर्जी और इन्फास्ट्रक्चर के क्षेत्र में कारोबार करती है। कंपनी का सालाना कारोबार लगभग 3.5अरब डॉलर का है। विश्व के करीब 50 देशों में कंपनी का नेटवर्क फैला था। साल 1991 में वेलस्‍पन पॉलियेस्‍टर इंडिया का आईपीओ आया था और उसके बाद वेलस्‍पन इंडिया लिमिटेड के रूप में इसकी पहचान बनी।

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