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कामयाबी के लिए जरूरी नहीं कॉलेज की पढ़ाई, वॉरेन बफे के खास टिप्‍स

वॉरेन बफे का मानना है कि कामयाबी पाने के गुर क्‍लासरूम में ही मिलें, यह जरूरी नहीं।

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नई दिल्‍ली. दुनिया के इन्‍वेस्टिंग गुरू कहे जाने वाले वॉरेन बफे का मानना है कि कामयाबी पाने के गुर क्‍लासरूम में ही मिलें, यह जरूरी नहीं। इंसान क्‍लासरूम के बाहर भी बहुत कुछ सीखता है। खुद वॉरेन बफे ने सारी चीजें कॉलेज में नहीं सीखीं। CNBC की एक रिपोर्ट में वॉरेन बफे के एक ऐसे ही सेशन का जिक्र किया गया है, जब उन्‍होंने स्‍कूल और कॉलेज की शिक्षा को ही सर्वोत्‍तम मानने को लेकर अपने विचार और अनुभव साझा किए थे। आइए आपको बताते हैं कि आखिर क्‍या कहते हैं वॉरेन बफे-  

 

कहां कही थीं ये बातें 

2012 में बफे ने वेस्‍टर्न यूनिवर्सिटी में आईवे बिजनेस स्‍कूल के स्‍टूडेंट के साथ एक सेशन किया था। इस सेशन में उन्‍होंने कहा था कि कॉलेज हर किसी के लिए नहीं होता। यानी हर चीज कॉलेज या स्‍कूल में जाकर ही सीखने को मिले, यह जरूरी नहीं। सबसे अच्‍छी शिक्षा खुद में इन्‍वेस्‍ट करने से मिलती है, लेकिन इसका माध्‍यम कॉलेज या यूनिवर्सिटी ही हो यह जरूरी नहीं। 

 

 

टीचिंग से हर कोई नहीं बन सकता बुद्धिमान 

रिपोर्ट के मुताबिक, 1995 में बर्कशायर हैथवे की सालाना शेयरहोल्‍डर्स मीटिंग के दौरान भी वॉरेन बफे और उनके बिजनेस पार्टनर चार्ली मुंगेर से एक सवाल किया गया था। यह सवाल था कि क्‍या वे कभी अपनी नॉलेज को फ्यूचर जेनरेशंस तक पहुंचाने के लिए अपना बिजनेस स्‍कूल खोलने के बारे में सोचेंगे। इस सवाल को दोनों पार्टनर्स ने मजाक में उड़ा दिया था। उस वक्‍त मुंगेर ने कहा था, 'लाखों लोगों को परखने के बाद हमारे पास हमेशा से बुद्धिमान लोगों का ग्रुप रहा है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि किसी ने भी इस तरह की टीचिंग का कोई रास्‍ता खोज लिया है, जिससे हर किसी को बुद्धिमान बनाया जा सके।'  

 

आगे पढ़ें- लोग भी सिखाते हैं बहुत कुछ 

 

लोगों से सीख सकते हैं बहुत कुछ 

बफे के मुताबिक, बिजनेस में क्‍या चीज मदद करेगी और क्‍या नहीं, यह क्‍लासरूम में नहीं पढ़ाया जा सकता। अगर आप टॉप 20 बिजनेस स्‍कूलों में जाएं तो पाएंगे कि वहां एक भी ऐसा पेज नहीं है, जो किसी को भी असली और अविश्‍वसनीय सफलता के बारे में पढ़ा सके।

बफे कहते हैं कि आप अन्‍य लोगों से बहुत कुछ सीख सकते हैं। यहां तक कि अगर आप उनसे तार्किक‍ ढंग से कुछ सीख लेते हैं तो आपको किसी नए आइडिया या खुद से बहुत ज्‍यादा कुछ करने की जरूरत नहीं होती। आपने जो सीखा, उसे बस अप्‍लाई करने की जरूरत रह जाती है। 

 

आगे पढ़ें- बिजनेस स्‍कूल के लिए यह सलाह 

सक्‍सेस स्‍टोरीज पढ़ाएं बिजनेस स्‍कूल 

बफे के मुताबिक, बिजनेस स्‍कूल्‍स को कामयाबी के उदाहरण यानी सक्‍सेसफुल लोगों के बारे में पढ़ाना चाहिए। जैसे ओमाहा की नेब्रास्‍का फर्नीचर मार्ट की फाउंडर रोज ब्‍लमकिन। वह अपनी जिंदगी में एक दिन भी स्‍कूल नहीं गईं लेकिन 1937 में उन्‍होंने 500 डॉलर से अपना स्‍टोर शुरू कर दिया था।

न्‍यूयॉर्क टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुताबिक, 1998 में जब ब्‍लमकिन की मौत हुई तो नेब्रास्‍का फर्नीचर मार्ट देश का सबसे बड़ा होम फर्निशिंग्‍स स्‍टोर था। ब्‍लमकिन ने कुछ ऐसा नहीं किया, जो दुनिया पहले नहीं देख चुकी थी। 

 

आगे पढ़ें- किताबों को मानते हैं सक्‍सेस मंत्रा 

सक्‍सेस मंत्र है किताबें पढ़ना 

वॉरेन बफे के मुताबिक, मैंने बहुत कुछ खुद को पढ़कर सीखा है। खुद पर लिखी गई किताबों में से उनकी पसंदीदा ग्राहम की द इंटेलिजेंट इन्‍वेस्‍टर और फिल फिशर की कॉमन स्‍टॉक्‍स एंड अनकॉमन प्रॉफिट्स है। 
इसके अलावा बफे कहते हैं कि मैं 1 दिन में लगभग 5 या 6 घंटे किताबें और अखबार पढ़ने में बिताता हूं। अगर आप भी ज्‍यादा से ज्‍यादा सक्‍सेस पाना चाहते हैं तो मेरी यही राय है कि पढ़ने को भी टाइम दें और दिन में कम से कम 500 पेज पढ़ें। बफे का कहना है कि नॉलेज इसी तरह से बढ़ती है, यह कंपाउंड इंट्रेस्‍ट की तरह होती है। 

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