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यूपी, हरियाणा से जीएसटी रिफंड मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी, मंथली मॉडल से बढ़ी प्रॉब्लम: विनय शर्मा

GST रिफंड की समस्या सेज एक्सपोर्ट्स के लिए केंद्र की तुलना में राज्यों से ज्यादा बनी हुई है। इसमें यूपी और हरियाणा के तर

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नई दिल्ली। GST रिफंड की समस्या सेज एक्सपोर्ट्स के लिए केंद्र की तुलना में राज्यों से ज्यादा बनी हुई है। इसमें यूपी और हरियाणा के तरफ से रिफंड मिलने में एक्सपोर्टर्स को काफी देरी का सामना करना पड़ रहा है। यहीं नहीं अभी भी ई-वे बिल को लेकर सेज एक्सपोर्ट्स को कई लेवल प्रॉब्लम का सामना करना पड़ रहा है। ये बातें एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर ईओयू और सेज के चेयरमैन विनय शर्मा ने moneybhaskar.com से विशेष बातचीत में कही है। एक्सपोर्ट्स को जीएसटी लागू होने के बाद और किस तरह की प्रॉब्लम का सामना करना पड़ रहा है और सरकार से किस तरह के आश्वासन मिल रहे हैं, इस बारे में शीतल गौड़ तंवर ने शर्मा से विस्तार से बात की है, पेश है उसके प्रमुख अंश...

 

 

राज्यों से रिफंड मिलने में ज्यादा देरी

 

विनय शर्मा ने बताया कि 80 फीसदी एक्सपोर्टर्स को सेंट्रल जीएसटी रिफंड मिल चुका है लेकिन एक्सपोर्टर्स राज्य सरकारों की तरफ से परेशान हैं। उन्हें स्टेट जीएसटी रिफंड नहीं मिल रहा है। ये परेशानी एक्सपोर्टर्स को हरियाणा और यूपी जैसे राज्यों से सबसे ज्यादा है क्योंकि ये राज्य रिफंड नहीं दे रहे हैं। कई कारोबारियों का करोड़ों रुपए का रिफंड बीते नौ महीनों से अटका हुआ है। शर्मा ने कहा कि पहले राज्यों को रोजाना के आधार पर टैक्स कलेक्शन मिलता था लेकिन अब महीने बाद पैसा आता है जिसके कारण भी रिफंड अटक रहे हैं।

 

जीएसटी पोर्टल से कारोबारी हैं परेशान

 

उन्होंने कहा कि जीएसटीएन पर रिटर्न फाइलिंग पहले से बेहतर हुई है। लेकिन अभी भी सेज एक्सपोर्टर्स सेज स्टेट्स अपडेट को लेकर परेशान है। देश के 221 सेज में काम कर रहे हजारों कारोबारियों के सामने जुलाई 2017 से स्टेट्स अपडेशन की प्रॉब्लम आ रही है। जीएसटीएन पोर्टल उन्हें सेज में काउंट नहीं करके रेग्युलर यूनिट के तौर पर काउंट कर रहा है जिसके कारण वहे सेज के बेनेफिट का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं। कारोबारियों ने स्पेशल इकोनॉमिक जोन (सेज) का ऑप्शन लिया था, वह उनके अकाउंट में शो ही नहीं कर रहा था। जिन कारोबारियों ने सेज का ऑप्शन नहीं लिया था उनके अकाउंट में सेज ऑप्शन दिखा रहा था। इस तरह की कन्फ्यूजन 9 महीने से बनी हुई है। जीएसटी पोर्टल की ऐसी टेक्निकल समस्या के कारण कारोबारियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

 

-वे बिल को लेकर भी कन्फ्यूजन

 

सेज यूनिट्स में ई-वे बिल के इस्तेमाल को लेकर सरकारी अधिकारियों से लेकर कारोबारियों को कन्फ्यूजन है। सेज यूनिट्स अगर आपस में गुड्स सप्लाई करती हैं तो उन्हें ई-वे बिल बनवाने की जरूरत नहीं है लेकिन इसके बारे में ग्राउंड पर काम कर रहे सरकारी अधिकारियों को जानकारी ही नहीं है। सरकार को पहले अपने सरकारी अधिकारियों के बीच इसे लेकर जानकारी बढ़ानी पड़ेगी।

 

 

हिंदी में जीएसटी की नहीं है जानकारी

 

 

शर्मा ने कहा कि कारोबारियों या एक्सपोर्टर्स को जीएसटी को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं है और सरकार रोज नए सर्कुलर जारी कर देती है जिसके कारण उन्हें हर नए रूल्स जानने में वक्त लग जाता है। इसके कारण उन्हें न चाहते हुए भी सीए की मदद लेनी पड़ रही है जिसके कारण उनकी कॉस्ट बढ़ गई है। सरकार को जीएसटी के रोजाना रूल्स बदलने पर कारोबारियों को समझने का समय देना होगा। सरकार को जीएसटी कानून और सर्कुलर अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी तुरंत देने चाहिए। जिससे कारोबारियों को आसानी हो सके, क्योंकि हिंदी क्षेत्र में भी लाखों की संख्या में कारोबारी हैं।

 

आगे पढ़ें - कितने हैं सेज एक्सपोर्टर्स..

 

 

6,000 से अधिक है सेज एक्सपोर्ट यूनिट

 

 

 

साल 2017-18 में 204 सेज में कारोबार बीते साल 2016-17 की तुलना में 18 फीसदी बढ़ा है। सेज से सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सेज यूनिट से कुल एक्सपोर्ट 5.51 करोड़ करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हुआ है जो कि बीते साल 4.68 करोड़ रुपए था। सेज के तहत 6,000 से अधिक सेज यूनिट है।

 

 

 

 

6,000 से अधिक है सेज एक्सपोर्ट यूनिट

 

 

 

साल 2017-18 में 204 सेज में कारोबार बीते साल 2016-17 की तुलना में 18 फीसदी बढ़ा है। सेज से सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट में 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। सेज यूनिट से कुल एक्सपोर्ट 5.51 करोड़ करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट हुआ है जो कि बीते साल 4.68 करोड़ रुपए था। सेज के तहत 6,000 से अधिक सेज यूनिट है।

 

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