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Home » Industry » CompaniesThese will be the terms for opening electric charging stations new instructions given by CEA

इलेक्ट्रिक चार्जिंग स्टेशन खोलने के लिए ये होंगी शर्तें, सीईए ने दिए नए निर्देश

देश के नौ बड़े शहरों में अगले तीन साल में सैकड़ों चार्जिंग स्टेशन लगेंगे

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नई दिल्ली। चार्जिंग स्टेशन  लगाने के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की तरफ से नए गाइडलाइंस जारी किए गए हैं। इस गाइडलाइंस में इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए बिजली की दरें तय करने के तरीकों को बताया गया है। सीईए के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों से बिजली वितरण कंपनियां सप्लाई लागत प्लस 15 परसेंट से अधिक चार्ज नहीं कर सकेंगी। मतलब अगर बिजली वितरण कंपनियों की सप्लाई लागत 10 रुपए प्रति यूनिट है तो वे चार्जिंग स्टेशन चलाने वालों से अधिकतम 13.50 रुपये प्रति यूनिट ले सकती है। अगर आप अपने घर पर इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करते हैं तो ऐसे में घरेलू बिजली की दर ही चार्जिंग के बदले लागू होंगी। पब्लिक चार्जिंग स्टेशन खोलने वालों की कमाई अपने ग्राहकों से सर्विस चार्ज से होगी। लेकिन चार्जिंग स्टेशन वाले ग्राहकों से मनमानी दरें नहीं ले पाएंगे। सरकार की नोडल एजेंसी इस दर की सीलिंग तय करेगी। गाइडलाइंस के मुताबिक पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को उस एरिया की डिस्कॉम (बिजली वितरण कंपनी) प्राथमिकता के आधार पर उन्हें कनेक्शन उपलब्ध कराएगी। हालांकि चार्जिंग स्टेशन लगाने वाला अपनी मर्जी के मुताबिक ओपन एक्सेस के तहत किसी भी डिस्कॉम से बिजली की सप्लाई ले सकता है। चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए अलग के ट्रांसफार्मर के साथ सभी प्रकार के सुरक्षा के इंतजाम अनिवार्य है। इनमें मुख्य रूप से 33 और 11 केवी लाइन, केबल्स, मीटर, चार्जिंग के लिए पर्याप्त जगह, वाहनों के आने-जाने की सुविधा शामिल हैं। इसके अलावा चार्जिंग स्टेशन लगाने वालों को ऑनलाइन ऐप भी रखना होगा ताकि चार्ज कराने आने से पहले ग्राहक अपने स्लॉट को जान सके कि कितने बजे वह चार्ज कराने जा सकता है।

 

पहले इन नौ शहरों में खुलेंगे चार्जिंग स्टेशन

इस योजना को दो फेज में तैयार किया जाएगा। पहले फेज में, तीन साल तक फैले, सभी नौ मेगा शहरों-मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरू, हैदराबाद, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता, सूरत और पुणे- और एक्सप्रेसवे और उनसे जुड़े महत्वपूर्ण राजमार्गों को कवर किया जाएगा। इसमें मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, अहमदाबाद-वडोदरा, दिल्ली-आगरा यमुना एक्सप्रेसवे, दिल्ली-जयपुर, बेंगलुरु-मसूरु और बेंगलुरु-चेन्नई जैसे गलियारे शामिल हैं। दूसरे फेज में, जो निम्नलिखित पांच वर्षों में शुरू होगा, राज्य राजधानियों, संघीय क्षेत्र मुख्यालयों और उनसे जुड़े राजमार्गों को कवर करेगा। मंत्रालय इस रोलआउट को सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्रीय नोडल एजेंसी को नामित करेगा, जबकि राज्यों की अपनी नोडल एजेंसियां ​​हो सकती हैं। 

 

अगली स्लाइड में पढ़ें सीईए को रखना होगा चार्जिंग स्टेशनों का डाटा

सभी चार्जिंग स्टेशन का होगा डाटा

सीईए को देश में स्थापित सभी पीसीएस का ऑनलाइन डेटाबेस रखना होगा। दिशानिर्देश सड़कों और राजमार्गों के दोनों किनारों पर 3 किमी या एक 25 सेमी प्रत्येक के ग्रिड में कम से कम एक पीसीएस स्थापित करने की सलाह देते हैं। लंबी दूरी की ईवी या भारी ड्यूटी ईवी जैसे ट्रकों और बसों के लिए हर 100 किमी कम से कम एक तेज़ चार्जिंग स्टेशन होना चाहिए। सार्वजनिक क्षेत्र की फ्यूल कंपनियों (इंडियन ऑयल कॉर्प लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्प लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड) की ओर से संचालित मौजूदा ईंधन खुदरा दुकानों को पीसीएस को अपने परिसर में स्थापित करने के लिए प्राथमिकता दी जा सकती है।

 

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मारुति व हुंडई पहले से ही इस दिशा में सक्रिय

मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड, हुंडई मोटर कं, वोल्वो कार और किआ मोटर्स इंडिया जैसी कंपनियां पहले ही हाइब्रिड या इलेक्ट्रिक कारों को पेश करने की योजना की घोषणा कर चुकी हैं। टाटा मोटर्स लिमिटेड और महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड पहले से ही अपनी इलेक्ट्रिक कारों को केंद्र सरकार को आपूर्ति कर रहे हैं। हालांकि, कंपनियों ने अपर्याप्त चार्जिंग प्वाइंट्स के बारे में चिंताओं को उठाया है। भारत चाहता है कि इसका ऑटोमोबाइल उद्योग अपनी जलवायु परिवर्तन प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की अपनी रणनीति के तहत विद्युत वाहनों में प्रगतिशील रूप से स्थानांतरित हो। 

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