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एक किताब ने वॉरेन बफे को बना दिया इन्‍वेस्‍टमेंट गुरू, 1936 में हुई थी पब्लिश

वन थाउजेंड वेज टू मेक 1000 डॉलर है नाम...

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नई दिल्‍ली. दुनिया के तीसरे सबसे अमीर शख्‍स वॉरेन बफे को पूरी दुनिया इन्‍वेस्‍टमेंट गुरू मानती है। उन्‍हें अमेरिकी इतिहास का सबसे सफलतम इन्‍वेस्‍टर माना जाता है। वॉरेन बफे अपनी इस कामयाबी का श्रेय 1936 में पब्लिश हुई एक किताब को देते हैं। उनका कहना है कि इसी किताब ने उन्‍हें अपने करियर की प्रेरणा दी। 

 

वन थाउजेंड वेज टू मेक 1000 डॉलर है नाम

जब बफे सात साल के थे तो उन्‍हें 'वन थाउजेंड वेज टू मेक 1000 डॉलर' नामक यह किताब एक लाइब्रेरी में मिली थी। किताब के मुख्‍य लेखक एफसी मिनाकर हैं, हालांकि उनके अलावा कुछ अन्‍य लोगों का भी इसमें योगदान है। 

 

7 साल की उम्र में लाइब्रेरी में मिली थी

इस किताब ने ही बफे के करियर को दिशा दी। बफे कहते हैं कि इस किताब की पब्लिशिंग सालों पहले बंद हो चुकी है। हाल ही में उन्‍हें यह किताब मिली। जब उन्‍होंने इसे पढ़ा तो आज भी वह उतने ही प्रभावित हुए जितना सालों पहले हुए थे। 

 

30 साल पहले पहली बार किया था खुलासा

बफे ने पहली बार इस किताब से अपने लगाव का जिक्र 30 साल पहले किया था, जब उन्‍हें फॉर्च्‍यून की लिस्‍ट में जगह मिली थी। बफे को इस किताब से 3 चीजें सीखने को मिलीं। आइए आपको बताते हैं क्‍या हैं वे चीजें-

 

कल का इंतजार मत करो, जो करना है आज करो

इस किताब में कुछ ऐसे लोगों के उदाहरण हैं, जिन्‍होंने बहुत कम स्‍तर से लेकिन जल्‍दी शुरुआत की और बाद में बड़ी-बड़ी कंपनियां खड़ी कर दीं। इसलिए बफे ने भी यह बात गांठ बांध ली कि अगर आप कम उम्र में किसी इन्‍वेस्‍टमेंट या बिजनेस की शुरुआत करते हैं तो मुनाफा कमाने के लिए आपके पास ज्‍यादा वक्‍त होता है। आपका इन्‍वेस्‍टमेंट आपको ज्‍यादा पे करता है। 

 

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वही काम करो, जो आपको आता हो

बफे को इस किताब से यह भी सीख मिली कि आपको उसी काम में आगे बढ़ना चाहिए, जिसकी आपको अच्‍छी जानकारी हो। जिस फील्‍ड में आपकी रुचि या जानकारी नहीं है, उसमें हाथ डालने से बचना चाहिए। 

 

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आम लोग बन सकते हैं खास

इस किताब में जिन लोगों का जिक्र है, उनमें से कोई भी शुरू से या पैदायशी पैसे वाला नहीं था। कोई भी हार्वर्ड या येल यूनिवर्सिटी से नहीं था और न ही किसी ने बाहर से इन्‍वेस्‍टमेंट लेकर कंपनी शुरू की। लगभग सभी लोग आम आदमी थे और सभी ने जीरो से शुरुआत की थी। बफे ने भी अपनी जिंदगी में इस सीख को अपनाया कि कोई भी आम आदमी खास बन सकता है।

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