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कोठारी बदर्स: एक भाई जेल में तो दूसरा जेम्‍स बॉन्‍ड को खिला रहा पान मसाला

तो विक्रम कोठारी से काफी लग्‍जरी लाइफ जी, ले‍किन उनके पिता एमएम कोठारी का जन्म एक छोटे से गांव निराली में हुआ था...

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नई दिल्‍ली। मीडिया रिपोर्ट की मानें तो रोटोमैक पेन के मालिक विक्रम कोठारी को सीबीआई ने सोमवार को ही अरेस्‍ट कर लिया। उनके ठिकानों पर मंगलवार को भी छानबीन जारी रही। विक्रम कोठारी पर अलग-अलग बैंकों का करीब 3700 करोड़ रुपए के गबन के आरोप हैं। विक्रम कोठारी कि पिता एमएम कोठारी को कानपुर के एक नामी आदमी थे। पूरा शहर उन्‍हें बाबूजी के नाम से जानता था। बेहद मेहनत और लगन से उन्‍होंने पान मसाला और स्‍टेशनरी का कारोबार स्‍टैबेलिस्‍ट किया। उनकी मौत के बाद बिजनेस दो भाइयों में बंट गया। आज एक भाई सीबीआई की गिरफ्त में है, ज‍बकि दूसरा जेम्‍स बॉन्‍ड को पान मसाला खिला रहा है। आइए जानते हैं कोठारी भाइयों और उनके परिवार की पूरी स्‍टोरी 

 

छोटे से गांव में पैदा हुए थे विक्रम के पिता 
यूं तो विक्रम कोठारी से काफी लग्‍जरी लाइफ जी, ले‍किन उनके पिता एमएम कोठारी का जन्म एक छोटे से गांव निराली में हुआ था। मामूली सी नौकरी से उन्‍होंने अपना कॅरियर शुरू किया था। अपने कॅरियर का आगाज करने वाले मनसुख भाई ने अपने जीवन में काफी संघर्ष किया और वह पान मसाले के कारोबार में एक बड़ा नाम बनकर सामने आए। बाद में उन्‍होंने स्‍टेशनरी कारोबार में भी हाथ आजमाया और इसमें भी सफल हुए। खासकर कंपनी के पेन रोटोमैक ने काफी शोहरत बटोरी। 90 वर्ष उम्र में उनकी मौत हुई। मनसुख के दो पुत्र विक्रम और दीपक व एक पुत्री रीता हैं। दीपक और विक्रम ने बिजनेस बांट लिया। 

 

 

ऐसे हुआ बंटवारा 
दीपक कोठारी और विक्रम कोठारी के बीच बंटवारा उनके पिता एमएम कोठारी के जाने के बाद हुआ। कोठारी ब्रदर्स ने तय किया पान पराग और रोटोमैक दो हिस्सों में बटेगा। दीपक कोठारी ने कोठारी प्रोडक्ट्स फ्लैगशिप में 22.5 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी खरीदी ली। दीपक ने इसके लिए भाई विक्रम को शेयर के पैसे दे दिए। इसके बाद विक्रम कोठारी ने रोटोमैक इंडस्ट्री में कदम जमाया, जिसमें उन्होंने पेन, स्टेशनरी और ग्रीटिंग्स कार्ड्स इत्यादी बनाने चालू किए। एमएम कोठारी हालांकि यह तय कर गए थे कि 

कोठारी प्रोड्क्टस में दोनों भाई बराबर के चेयरमैन रहेंगे, लेकिन विक्रम कोठारी समेत उनकी पत्नी साधना कोठरी ने बोर्ड छोड़ दिया। उस समय एक अंग्रेजी अखबार को उन्होंने कहा था कि यह फैसला उन्होंने आपसी सहमति से लिया है। 
 
 

रोटोमैक ब्रांड तो बना, पर विक्रम हुए फेल 
विक्रम कोठारी ने स्टेशनरी बिजनेस को अपनाया तो वहीं दीपक ने पान मसाला बिजनेस को संभाले रखा। ऐसा नहीं है कि विक्रम कोठारी को सबकुछ संपत्ति के बतौर मिला हो। उन्होंने बराबर मेहनत की और अपनी कंपनी रोटोमैक ग्रुप को बड़ा नाम दिया। 2000 के दौर में उन्‍हें तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें सम्मानित भी किया। बाद में कंपनी ने सलमान खान को अपना ब्रांड एंबेसेडर भी बनाया। मीडिया रिपोर्ट का दावा है कि विक्रम बाद में इसपर ध्‍यान नहीं दे पाए और बिजनसे को डायर्सिफाई करने के चक्‍कर में कोर बिजनेस भी डूब गया। नतीजा यह हुआ कि आज वह सीबीआई की गिरफ्त में हैं।  

 

 

पर भाई बढ़ता रहा 
दूसरी तरफ भाई दीपक कोठारी पान पराग की बदौलत दिन दौगुनी रात चौगुनी तरक्की करते गए। 'पान पराग' आज किसी परिचय का मोहताज नहीं है। ऐसे एक तरफ दीपक बिजनेस की दुनिया में बड़ा नाम बनता चला गया और दूसरी तरफ विक्रम इसी दुनिया में डूबता चला गया।

 

 

जेम्‍स बॉन्‍ड को बनाया ब्रांड एंबेसेडर
दीपक कोठारी की कंपनी ने हाल में जेम्‍स बांड का किरदार निभाने वाले पीयर्स ब्रॉसनेन को अपना ब्रांड एंबेसेडर बनाया था। हालांकि बाद में इसके विज्ञापनों को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया। दरअसल पीयर्स का आरोप था  कि माउथ प्रेशनर बताकर उनसे गुटखे का विज्ञापन करवा लिया गया।  

 

 

अब तक कुल कर्ज बैंक कर्जा
फिलहाल, इंडियन ओवरसीज बैंक ने रोटोमैक ग्रुप के मालिक विक्रम कोठारी के करीब 650 करोड़ रुपये के डिपॉजिट (एफडीआर) जब्त कर लिए हैं। बैंक ने यह कार्रवाई 1400 करोड़ रुपये का कर्ज न चुका पाने की वजह से की है। विक्रम कोठारी का इसी बैंक पर अब भी 750 करोड़ रुपये बकाया है। रकम की वसूली के लिए अब बैंक डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल (ऋण वसूली अधिकरण) जाने की तैयारी कर रहा है।

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