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कभी साइकिल पर माचिस बेचता था आइकिया का मालिक, खड़ी कर दी दुनिया की सबसे बड़ी फर्नीचर रिटेल कंपनी

आइकिया ने हैदराबाद में अपना पहला स्‍टोर 9 अगस्‍त से शुरू कर दिया है...

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नई दिल्‍ली. दुनिया की सबसे बड़ी फर्नीचर रिटेल कंपनी आइकिया ने भारत में एंट्री कर ली है। आइकिया ने हैदराबाद में अपना पहला स्‍टोर 9 अगस्‍त को शुरू कर दिया है और इसे लोगों से अच्‍छा रिस्‍पॉन्‍स भी मिल रहा है। दुनिया के 49 देशों में 412 स्टोरों की मौजूदगी वाली आइकिया को स्‍वीडन के इंगवार कैंपरैड ने शुरू किया था। एक छोटे से फार्म एल्‍मतरीड पर जन्‍मे इंगवार ने शुरू से ही गरीबी का सामना किया। लेकिन व्‍यवसाय के प्रति उनके रुझान ने उन्‍हें दुनिया की नंबर वन फर्नीचर कंपनी का मालिक बना दिया। 

 

6 साल में ही शुरू कर दिया था काम

इंगवार ने केवल 6 साल की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था। वह बाजार से थोक में माचिस उधार खरीदते और घर-घर जाकर बेचते। उसके बाद जो पैसे आते, उससे उधार चुका देते। जब इंगवार 10 साल के हुए तो वह यह काम साइकिल पर करने लगे और अपने गांव के अलावा पड़ोस के गांवों में भी जाने लगे। बाद में उन्‍होंने माचिस के साथ मछली, क्रिसमस ट्री सजाने की चीजें, बीज, बॉलप्‍वॉइंट पेन, पेंसिल आदि बेचना भी शुरू कर दिया। इंगवार काम के साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखते। 

 

ऐसे शुरू हुई आइकिया

इंगवार को बचपन से ही डिस्‍लेक्सिया की बीमारी थी। लेकिन उन्‍होंने इसे अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। एक बार जब उन्‍होंने क्‍लास में अच्‍छा प्रदर्शन किया तो उन्‍हें पिता से कुछ पैसे इनाम में मिले। इन्‍हीं पैसों से इंगवार ने 1943 में आइकिया शुरू की। उस वक्‍त वह केवल 17 साल के थे। 

 

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होती चली गई पॉपुलर

आइकिया ने किचन टेबल बेचने से शुरुआत की थी। उसके बाद जल्‍द ही वह फर्नीचर बिजनेस में उतर गई। इंगवार स्‍थानीय कारीगरों से सस्‍ते में फर्नीचर खरीदकर उन्‍हें महंगे में कस्‍टमर्स को बेचते थे। आइकिया के शुरू होने के 2 साल पूरे होते-होते कंपनी पॉपुलर हो चुकी थी और काफी ऑर्डर मिलने लगे थे। यहां तक कि इंगवार को फर्नीचर पहुंचाने के लिए दूध के ट्रक का इस्‍तेमाल करना पड़ा। 

 

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कंजूस अंकल के नाम से थे मशहूर

भले ही आइकिया दुनिया की नंबर वन फर्नीचर कंपनी बन गई लेकिन इंगवार ने कभी भी अपनी अमीरी को नहीं दर्शाया। इंगवार अपने गांव में माइजर (कंजूस) अंकल के नाम से फेमस थे। उन्‍होंने जिंदगी भर सेकंड हैंड और पुरानी कार का इस्‍तेमाल किया। वह खुद ही ड्राइव करते थे और हवाईजहाज में इकोनॉमी क्‍लास से सफर करते थे। यहां तक कि वह कबाड़ी बाजार से कपड़े पहनकर खरीदते थे और सस्‍ते रेस्‍टोरेंट में खाना खाते थे। इसी साल जनवरी में 91 साल की उम्र में कैंपरैड दुनिया को अलविदा कह गए। 

 

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