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महंगे स्टील ने बढ़ाई कारोबारियों की इन्पुट कॉस्ट, 2 महीने में 15 फीसदी तक बढ़ी कीमतें

इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ती स्टील कीमतों का असर अब घरेलू बाजार पर भी दिखने लगा है।

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नई दिल्ली। इंटरनेशनल मार्केट में बढ़ती स्टील कीमतों का असर अब घरेलू बाजार पर भी दिखने लगा है। पिछले दो महीने में घरेलू कंपनियों ने स्टील की कीमतों में 15 फीसदी तक बढ़ोतरी की है। जबकि एक साल में इंटरनेशन मार्केट में कीमतों में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस समय घरेलू मार्केट में 22500 रुपए से लेकर 31600 रुपए प्रति टन तक पहुंच गए हैं। जिसका असर कंस्ट्रक्शन कंपनियों से लेकर सेकंड्री मार्केट की कंपनियों पर हुआ है। कारोबारियों केे अनुसार लगातार बढ़ रही प्राइस की वजह से उनकी इन्पुट कॉस्ट में 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।

 

कंपनियों ने बढ़ाए स्टील के दाम

 

जिंदल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने moneybhaskar.com को बताया कि कंपनी ने मार्च में दो फीसदी स्टील के दाम बढ़ाए थे। कंपनी अब दाम बढ़ाने के बारे में नहीं सोच रही है। अधिकारी के मुताबिक स्टील के दाम अब दिवाली जैसे त्योहार के समय में बढ़ा सकती है। कारोबारियों के अनुसार कंपनियों ने करीब 4500 रुपए प्रति टन तक कीमतें कर दी है। इसमें सेल ने करीब 3000 रुपए टन तक कीमतें बढ़ाई हैं।

 

इंटरनेशनल मार्केट में बढ़े स्टील के दाम

 

इंटरनेशनल मार्केट में बीते एक महीने में स्टील के दाम 3.92 फीसदी और बीते एक साल में 19 फीसदी तक बढ़े हैं। इंटरनेशनल मार्केट का असर घरेलू बाजार में भी नजर आ रहा है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपए के कमजोर होने के कारण भी इंपोर्ट महंगा हुआ है। स्टील बनाने के लिए रॉ-मैटेरियल इंपोर्ट भी होता है जिसका असर स्टील की कीमतो में नजर आ रहा है।

 

 

कारोबारियों का दावा - सरकार के फैसलों से भी बढ़ी कीमतें

 

 

मेटल एंड स्टेनलेस स्टील मर्चेंट एसोसिएशन (एमएसएमए) के प्रेसिडेंट जितेंद्र शाह ने moneybhaskar.com को बताया किसरकार के एंटी डंपिंग ड्यूटी और एमआईपी लगाने से इंपोर्टेड स्टील की कीमत बढ़ गई हैं, जिसका फायदा भी घरेलू मैन्युफैक्चरर्स को तो मिला लेकिन सेकंड्री मार्केट की इंडस्ट्री पर निगेटिव इम्पैक्ट हुआ है। जिसकी वजह से इन्पुट कॉस्ट बढ़ गई है। बीते एक साल में एचआर क्वॉयल और सी आर क्वॉयल की कीमतों में भी 15 से 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।

 

 

अगली स्लाइड में जानें – सरकार ने स्टील इंपोर्ट रोकने के लिए उठाए ये कदम

 

 

 

स्टील पर लगी है कई तरह की ड्युटी

 

सरकार ने पहले ही स्टील इंपोर्ट पर सेफगार्ड ड्यूटी, काउंटरवेलिंग, एंटी डंपिंग ड्युटी और इंपोर्ट ड्युटी लगाई हुई है। कोल्ड रोल्ड स्टील पर 4.6 से 57.4 पर्सेंट तक एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाई है। एंटी डंपिंग ड्यूटी चीन, अमेरिका, साउथ अफ्रीका थाइलैंड और ताइवान से आने वाले स्टील उत्पादों पर लगी है। स्टील प्रोडक्ट पर 20 सेफगार्ड ड्यूटी लगाई हुई है। स्टील के अलग अलग प्रकार पर 12.5 से 20 पर्सेंट इंपोर्ट ड्यूटी लगी हुई है। स्टील और स्टील अलॉय प्रोडक्ट पर 10-12% की काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगी हुई है।

 

स्टील के एंड यूजर के मार्जिन पर पड़ा असर

 

घरेलू कंपनियों के दाम बढ़ाने और इंडिया में चीन से इंपोर्ट होने वाले स्टील पर ड्यूटी से इंपोर्ट महंगा हो चुका है। इंजीनियरिंग, ऑटो पार्ट्स, यूटेन्सिल्स बनाने वाली कंपनियों को घरेलू कंपनियों से ही स्टील खरीदना पड़ रहा है। इंजीनियरिंग गुड्स कारोबारी आर सी रल्हान ने moneybhaskar.com को बताया कि पहले ही गिरते एक्सपोर्ट और कम डिमांड को झेल रहे कारोबारियों का प्रॉफिट मार्जिन और कम हो गया है। कारोबारियों की लागत 15 फीसदी तक बढ़ गई है।

 

कारोबारियों की बढ़ी लागत

 

स्टेनलेस स्टील एक्सपोटर्स वेलफेयर एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी देवकीनंदन बागला ने moneybhaskar.com को बताया कि कंपनियों के 15 फीसदी कीमतें बढ़ाने से उनकी लागत सीधे 20 फीसदी तक बढ़ती है क्योंकि यूटेंसिल्स मेकर रॉ मैटेरियल का 75 फीसदी इस्तेमाल कर पाते हैं, बाकि वेस्टेज होती है। बीते एक साल में स्टील के दाम 45 रुपए तक बढ़ने लागत 20 से 25 फीसदी तक बढ़ी है।

 
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