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खास खबर: ब्रांड श्रीदेवी ने बदल दिया बॉलीवुड का इकोनॉमिक्स, बनीं पहली फीमेल सुपरस्‍टार

इंडियन सिनेमा में सुपरस्टार एक ऐसी पोजिशन है जो नंबर के रेस से बाहर है।

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नई दिल्‍ली. श्री अम्मा यंगर अय्यपन यानी श्रीदेवी का अचानक दुनिया से चले जाना सबको चौंका गया। फिल्‍मी जुबान में कहें तो 'सदमा' दे गई 'चांदनी'। 50 साल के फिल्‍मी करियर में 300 से ज्‍यादा फिल्‍में करने वाली श्रीदेवी के आकस्मिक निधन से फिल्‍म इंडस्ट्री से लेकर उनके प्रशंसकों में गहरा शोक है और सभी स्‍तब्‍ध हैं। श्रीदेवी को सिर्फ मशहूर या बेहतरीन अदकारा ही नहीं कहा जा सकता है, बल्कि वह इससे भी आगे थीं। इसकी वजह भी है, उन्‍होंने बॉलीवुड में फीमेल एक्‍टर (हीरोइन) को लेकर बनाई गईं सीमाओं को तोड़ा, और एक नई लकीर खींच दी। उनकी अदाकारी ने उन्‍हें पहली महिला 'सुपरस्‍टार' बनाया। यहां तक की उन्‍हें 'लेडी अमिताभ' तक कहा जाने लगा।  

 

इंडियन सिनेमा में सुपरस्टार एक ऐसी पोजिशन है जो नंबर के रेस से बाहर है। इसका अपना ग्लैमर है। जिससे स्टार की फैन फॉलोइंग से लेकर उसकी इंडस्ट्री के लिए इकोनॉमिक हैसियत भी तय होती है। श्रीदेवी यहीं अपने समय की सभी एक्ट्रेस से काफी आगे निकल जाती है। क्योंकि उन्होंने फैन फॉलोइंग में तो नया मुकाम बनाया ही साथ ही इकोनॉमिक हैसियत  अपने समय के पुरुष एक्टर से आगे बढ़ा ली। वह पहली अभिनेत्री थी, जिन्हें एक करोड़ रुपए फीस मिलती थी। यहीं नहीं उन्होंने ऐसा ट्रेंड सेट किया, कि उनके जरिए पुरुष एक्टर फेमस होते थे। जीतेंद्र, ऋषि कपूर यहां तक की साउथ के सुपरस्टार रजनीकांत को हिंदी सिनेमा में और शुरूआत दौर में सनी देओल के पहचान में श्रीदेवी की हिट फिल्मों का काफी हाथ रहा है। 


हिम्मतवाला के बाद करीब 12 फिल्में हुईं सफल

श्रीदेवी के स्टारडम को इस तरह समझा जा सकता है कि जब बालीवुड में उनकी पहली हिट फिल्म हिम्मतवाला आई, तो उसके बाद से उनकी 16 फिल्में काफी कम समय में आई। उसमें से उनकी 10-12 फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल  रहीं। खास बात यह थी कि इन फिल्मों की सफलता का क्रेडिट पूरी तरह से श्रीदेवी को दिया गया। जानेमाने फिल्‍म समीक्षक अजय ब्रह्मात्मज ने moneybhaskar.com को बताया कि श्रीदेवी ने बॉलीवुड में सबसे पहले इस मिथक को तोड़ा कि एक्ट्रेस का रोल केवल पेड़ के पीछे गाना-गाने तक ही होता है। उनको ध्यान में रखकर फिल्म की कहानी लिखी गई। हिंदी फिल्‍मों में फीमेल एक्‍टर की पोजिशनिंग को श्रीदेवी ने बदल दिया। 

 

ब्रहमात्‍मज कहते हैं, यह दो तरह से मुमकिन हो पाया। पहला, 1983 में रिलीज हुई उनकी फिल्‍म 'हिम्‍मतवाला' ब्‍लॉकबस्‍टर साबित हुई। इस फिल्म के सुपरहिट होने के बाद श्रीदेवी ने करीब 16 फिल्‍में साइन की। इनमें से करीब 10-12 फिल्‍में सफल रही। इसका सीधा मतलब यह की श्रीदेवी की फिल्‍में चलीं और उन्‍होंने अपने समय की दूसरी फिल्‍मों के मुकाबले बेहतर या अच्‍छा बिजनेस किया। दूसरी, हिंदी फिल्‍मों में उस दौर में फीमेल एक्‍टर के ज्‍यादातर रोल सपोर्टिव या हीरो के मुकाबले कम प्रभावी होते थे। जबकि, श्रीदेवी के साथ ऐसी स्थिति नहीं रही। श्रीदेवी का रोल फिल्‍म की स्क्रिप्‍ट में काफी प्रभावी रहा। यानी, डॉमिनेट करने वाला रहा। इसमें एक बड़ा पक्ष गानों का भी है। श्रीदेवी की फिल्‍मों में जितने भी गाने रहे, उनमें हर गाने में अपनी खास वैरायटी रही। 

 

पुरुष एक्टर से ज्यादा फीस

अब यदि आम आदमी की जुबान में 'सुपरस्‍टार' के अर्थशास्‍त्र को समझे तो इसके दो मायने हैं। पहला, स्‍टारडम और दूसरा, उसकी फीस। श्रीदेवी इन दोनों ही मायनों में अपने दौर में पुरुष एक्‍टर्स पर भारी थीं। हिंदी सिनेमा के 80 के दशक की बात करें तो अपने एक्टिंग के दम पर श्रीदेवी उस समय की सबसे पॉपुलर अभिनेत्री बन गई थीं। कहा यह भी जाता है कि उस समय उनकी फीस उस समय के सबसे लोकप्रिय एक्‍टर ऋषि कपूर से भी अधिक थी। फिल्‍म नगीना में उन्हें ऋषि से अधिक मेहनताना दिया गया था। 1980 और 1990 के दशक की बात करें तो उस दौर में श्रीदेवी सबसे अधिक मेहनताना पाने वाले एक्‍टर्स में थीं।


स्‍टारडम ने बनाया ब्रांड

moneybhaskar.com से बातचीत में ब्रांड गुरु हरीश बिजूर ने बताया कि  श्रीदेवी का अपने समय में स्‍टारडम वैसा ही था जैसा राजेश खन्‍ना का था। उन्‍होंने अपने दम पर फिल्‍में हिट कराई। स्‍टारडम की वजह से वह एक ब्रांड बन गईं। उनके नाम पर रेस्‍त्रां खुले। डिशेज के नाम रखे गए। हिंदी फिल्‍मों के अलावा उनका केनवास भी बड़ा हो गया उनका स्‍टारडम तमिल, तेलुगु फिल्मों भी एक जैसा बना रहा।

फिल्में हिट होती रही डॉमिनेंस बढ़ता चला गया

 

ओम प्रकाश मेहरा की आने वाली फिल्‍म 'मेरे प्‍यारे प्रधानमंत्री' के लेखक मनोज मैरता कहते हैं, हिंदी सिनेमा में फिल्‍मों का अर्थशास्‍त्र सीधा है- फिल्‍में चलेंगी तो एक्‍टर चलेंगे और उनकी फीस उसी तरह बढ़ेगी। श्रीदेवी के साथ भी 80 के दशक में ऐसा हुआ, उनकी फिल्‍में चलीं। उन्‍हें 'लेडी अमिताभ' का दर्जा दिया जाने लगा। श्रीदेवी के साथ एक्टिंग, स्क्रिप्‍ट, रोल, डायरेक्‍शन सबकुछ बेहतर तरीके से काम किया। मैरता का मानना है कि श्रीदेवी को अपने दौर में एक सबसे बड़ा फायदा यह मिला कि उनके सामने कोई दमदार मेल एक्‍टर नहीं आया। उनके सामने राजेश खन्‍ना, अमिताभ बच्‍चन जैसे बड़े स्‍टारडम वाले मेल एक्‍टर्स का कॉम्पिटीशन नहीं रहा। शायद यह भी एक वजह थी कि वह पहली महिला सुपरस्‍टार बनीं। 

 

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श्रीदेवी की कुछ चर्चित फिल्‍में और बॉक्‍स ऑफिस 

 

हिम्‍मतवाला: श्रीदेवी ने हिंदी फिल्‍मों में भले ही सोलहवां सावन से बतौर हीरोइन एंट्री की लेकिन असल पहचान हिम्‍मतवाला से मिली। इस फिल्‍म ने उन्‍हें ऑलटाइम हिट करा दिया। इस फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस कलेक्‍शन करीब 12 करोड़ रुपए था। 

सदमा: 1983 की ही फिल्‍म सदमा में श्रीदेवी के रोल की काफी सराहना मिली। बॉक्‍स ऑफिस पर इस फिल्‍म ने करीब 2 करोड़ बनाए लेकिन इसके गाने 'ए जिंदगी गले लगा ले' और 'सुरमयी आखियों में' ब्‍लॉकबस्‍टर साबित हुए।
जांबाज: 1986 में आई जांबाज में श्रीदेवी ने एक संक्षिप्‍त रोल किया। लेकिन इस फिल्‍म का गाना 'हर किसीन को नहीं मिलता यहां प्‍यार जिंदगी में' सबकी जुबां पर चढ़ गया। इस फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस से करीब 4 करोड़ रुपए कमराएं। 

नगीना: 1986 में आई इस सुपर हिट फिल्‍म ने श्रीदेवी की छवि एक 'स्‍नैक वुमन' के रूप में गढ़ दी। बॉक्‍स ऑफिस पर इस फिल्‍म ने करीब 5 करोड़ का आकंड़ा हुआ। 'मैं तेरी दुश्‍मन, दुश्‍मन तू मेरा' गाने ने भारतीय हिंदी सिनेमा को स्‍नैक डांस दिया। 

मिस्‍टर इंडिया: 1987 में रिलीज यह फिल्‍म साइंस फिक्‍शन पर बनी संभवत: पहली हिंदी फिल्‍म थी। बॉक्‍स ऑफिस इस फिल्‍म का कलेक्‍शन करीब 5 करोड़ रहा। इसमें श्रीदेवी ने एक पत्रकार का किरदान निभाया। इस फिल्‍म का गाना 'काटे नहीं कटते ये दिन ये रात' सुपरहिट रहा। 

चालबाज: 1989 की इस फिल्‍म में श्रीदेवी ने डबल रोल किया। बॉक्‍स ऑफिस पर इस फिल्‍म ने 4 करोड़ कमाए। इस  फिल्‍म के गाने 'न जाने कहां से आई है' ने श्रीदेवी के साथ सनी देयोल और रजनीकांत को भी एक अलग पहचान दी। 

चांदनी: 1989 में ही रिलीज हुई चांदनी ने सिल्‍वर स्‍क्रीन पर तहलका मचा दिया। 2 करोड़ के बजट वाली इस फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस पर 5 करोड़ कमाए। 

लम्‍हे: 1991 में रिलीज हुई इस फिल्‍म में श्रीदेवी ने मां और बेटी देनों का रोल किया। बॉक्‍स ऑफिस पर इस फिल्‍म का कलेक्‍शन 3 करोड़ रहा। 

जुदाई: 1996 में रिलीज हुई यह फिल्‍म उन आखिरी फिल्‍मों में रही, जिसके बाद श्रीदेवी ने अपने को लाइमलाइट से दूर कर लिया। इस फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस से 14 करोड़ कमाए। 

इंग्लिश विंग्लिश: करीब 15 साल बाद श्रीदेवी ने इंग्लिश विंग्लिश से हिंदी फिल्‍मों में दोबारा वापसी की। यह फिल्‍म बिना किसी हीरो और आइटम नंबर के थी। इस फिल्‍म में श्रीदेवी ने एक मां और हाउसवाइफ का दमदार रोल निभाया। बॉक्‍स ऑफिस पर इस फिल्‍म ने 40 करोड़ रुपए बनाए। 

मॉम: 2017 में श्रीदेवी की यह आखिरी रिलीज फिल्‍म साबित हुई। 40 करोड़ रुपए की लागत से बनी मॉम फिल्‍म ने पूरी दुनिया में 64 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की कमाई की। इस फिल्‍म में एक बार फिर श्रीदेवी की एक्टिंग की तारीफ हुई लेकिन एक ऐसा किस्‍सा भी हुआ कि यह फिल्‍म और श्रीदेवी पड़ोसी मुल्‍क पाकिस्‍तान में भी चर्चा में आ गए। 

 

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24 फरवरी को हुआ था निधन

श्रीदेवी का निधन 24 फरवरी की देर रात दुबई में हुआ था। फोरेंसिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि उनकी मौत कार्डिएक अरेस्ट से नहीं, बल्कि बाथटब में डूबने से हुई थी। इसे महज संयोग या त्रासदी ही कहा जाएगा कि आज श्रीदेवी को अंतिम विदाई दी जा रही है और आज से ठीक 21 साल पहले 28 फरवरी 1997 के दिन ही श्रीदेवी की फिल्‍म 'जुदाई' रिलीज़ हुई थी। यह श्रीदेवी का स्‍टारडम ही है कि उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होने चेन्नई और हैदराबाद से 40 बसों में सवार होकर फैन्स मुंबई पहुंचे।

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