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OMG! तो इन चीजों पर पानी की तरह पैसे बहा रहे हैं भारत के अरबपति

हर कोई जानना चाहता है कि भारत के रईस लोग अपने पैसों को कैसे खर्च करते होंगे।

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नई दिल्‍ली. हर कोई जानना चाहता है कि भारत के रईस लोग अपने पैसों को कैसे खर्च करते होंगे। क्‍या वे बहुत ज्‍यादा ज्‍वेलरी खरीदते हैं या फिर घर-जमीन खरीदते हैं या फिर अपने पैसों को इन्‍वेस्‍ट करते हैं। इन सारे सवालों के जवाब कोटक वेल्‍थ मैनेजमेंट की रिपोर्ट में है।

 

टॉप ऑफ द पिरामिड रिपोर्ट के 7वें एडिशन में देश के अल्‍ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्‍स यानी बहुत ज्‍यादा अमीर लोगों के पिछले साल के खर्च पर स्‍टडी की गई है। इस रिपोर्ट से सामने आया कि सुपर रिच इंडियंस अपनी इनकम का 45 फीसदी सेविंग्‍स और इन्‍वेस्‍टमेंट में लगाते हैं, जबकि 55 फीसदी खर्च कर देते हैं। रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि किस शौक पर रईसों ने खर्च घटाया और किस पर बढ़ाया। आइए आपको बताते हैं कि पिछले साल देश के सुपर रिच इंडियंस के खर्च और इन्‍वेस्‍टमेंट का पैटर्न कैसा रहा और किस चीज पर उन्‍होंने सबसे ज्‍यादा खर्च किया- 

 

सबसे ज्‍यादा खर्च बढ़ा कपड़ों और एक्‍सेसरीज पर 

2017 में देश के सुपर रिच लोगों ने अपने जिस खर्च में सबसे ज्‍यादा 16 फीसदी का इजाफा किया, वह था कपड़ों और एक्‍सेसरीज पर। इसकी वजह भारत में युवा अमीरों की संख्‍या में हर साल हो रहा इजाफा है। स्‍टडी में सामने आया कि 60 फीसदी से ज्‍यादा रईसों की उम्र 64 साल से कम है। यह आंकड़ा पिछले साल 47 फीसदी था। युवाओं का क्रेज फैशन की तरफ ज्‍यादा होता है। वह बदलते फैशन के साथ अपनी लाइफस्‍टाइल में बदलाव चाहते हैं। अमीरों में जैसे-जैसे युवाओं की संख्‍या बढ़ रही है, वैसे-वैसे रईसों के लाइफस्‍टाइल में बदलाव आ रहा है और इसीलिए कपड़ों और एक्‍सेसरीज पर खर्च बढ़ा है। 

 

आगे पढ़ें- दूसरे नंबर पर क्‍या है पसंदीदा

छुट्टियां हैं दूसरे नंबर पर 

दूसरे नंबर पर अमीर सबसे ज्‍यादा खर्च अब छुट्टियों पर करने लगे हैं। देश के रईसों का विदेश में जाने और वहां छुट्टियां बिताने पर खर्च 13 फीसदी बढ़ा है। 

 

आगे पढ़ें- कम हुआ ज्‍वेलरी का शौक 

ज्‍वेलरी पर कम किया खर्च 

देश में काले धन पर लगाम लगाने के लिए किए गए उपायों का असर अमीरों पर भी हुआ है। रईसों का ज्‍वेलरी पर किया जाने वाला खर्च घटकर अब 12 फीसदी हो गया है, जो कि पिछले साल 17 फीसदी था। इसकी एक वजह गोल्‍ड की कीमतों में बढ़ोत्‍तरी भी है। 

 

आगे पढ़ें- मानने लगे हेल्‍थ इज वेल्‍थ

हेल्‍थ का रखने लगे ज्‍यादा ध्यान 

इसके अलावा रईस अब अपनी हेल्‍थ और फिटनेस का भी ज्‍यादा ध्यान रखने लगे हैं। हेल्‍थ क्‍लब या चुनिंदा जिम की मेंबरशिप को वे प्राथमिकता दे रहे हैं। वर्चुअल बॉक्सिंग, 360 फिटनेस, वाटर वर्कआउट्स जैसे नए ट्रेंड्स के बजाय अमीर लोग योग और वॉकिंग को ज्‍यादा अच्‍छा मानते हैं। 

आगे पढ़ें- स्‍पा को मारी गोली

स्‍पा नहीं है पसंदीदा शौक 

ज्‍यादातर लोगों का यही मानना है कि स्‍पा रईसों का पसंदीदा शौक है। लेकिन सर्वे में केवल 1 तिहाई अमीरों ने कहा कि वह हर महीने स्‍पा जाते हैं। ये लोग 25 से 40 एज ग्रुप वाले थे। 51 से 60 साल की उम्र वाले अमीरों में से 50 फीसदी कभी स्‍पा नहीं गए। अन्‍य एज ग्रुप की बात करें तो उसमें से भी एक बड़ा हिस्‍सा रेगुलरली स्‍पा नहीं जाता। 41 से 50 साल की उम्र वाले रईसों का कहना है कि वे महीने में 2 बार स्‍पा जाते हैं।  

 

आगे पढ़ें- नहीं हैं फिटनेस गैजेट फ्रीक

फिटनेस गैजेट का क्रेज नहीं 

भले ही फिटनेस को मॉनिटर करने वाली टेक डिवाइसेज ट्रेंडिंग हों लेकिन भारतीय अमीरों के शौक में वे भी शामिल नहीं होतीं। स्‍टडी में शामिल बहुत कम रईस किसी फिटनेस ट्रैकर गैजेट का शौक रखने वाले रहे। 

 

आगे पढ़ें- आम आदमी और इनमें सिर्फ ये एक शौक कॉमन

आम आदमी की तरह इंटरनेट का रखते हैं शौक  

भारत में केवल एक ही शौक ऐसा है जो आम आदमी और अमीरों के बीच समान है। वह है इंटरनेट। हर तरह के एजग्रुप के अमीर एक आम भारतीय नागरिक की तरह ही फेसबुक और व्‍हाट्सएप को पसंद करते हैं। उनमें से ज्‍यादातर दिन में कम से कम एक बार सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल जरूर करते हैं। रईसों में 52 फीसदी ऐसे रहे, जो दिन में तीन बार व्‍हाट्सएप इस्‍तेमाल करते हैं, वहीं 86 फीसदी दिन में कम से कम एक बार फेसबुक पर जरूर जाते हैं। 

 

आगे पढ़ें- देश में कितने रईस 

कितने सुपर रिच हैं देश में 

2017 में देश के सुपर रिच लोगों की संख्या 10 फीसदी बढ़कर 1,60,600 हो चुकी है। ऐसा अनुमान है कि भारत में अल्‍ट्रा रिच लोगों की संख्‍या 2022 तक दोगुनी होकर 3,30,400 हो जाएगी और उनकी दौलत दोगुने से भी ज्‍यादा बढ़कर 3.52 लाख अरब रुपए हो जाएगी। देश के सुपर रिच लोगों में से 56 फीसदी 4 मेट्रो शहरों से हैं। 18 फीसदी अगली टॉप 6 शहरों बेंगलुरू, अहमदाबाद, पुणे, हैदराबाद, नागपुर और लुधियाना में रहते हैं। 

 

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