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तीन रुपये प्रति यूनिट मिलेगी सोलर बिजली, सोलर पावर प्लांट का सबसे सस्ता प्लान

उप्र में हुई नीलामी में प्रति यूनिट 3.04 रुपए से 3.08 रुपए की बोली लगी

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नई दिल्ली।  हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार के सोलर प्रोजेक्ट्स की नीलामी में बेहद कम दामों पर बोली लगाई। उत्तर प्रदेश की New and Renewable Energy Development Agency के 550 मेगावॉट प्रोजेक्ट्स की सोमवार को हुई नीलामी में प्रति यूनिट 3.04 रुपए से 3.08 रुपए के बीच में बोली लगाई गई। नीलामी में एनटीपीसी ने 3.04 रुपए प्रति यूनिट में 85 मेगावाट बिजली के लिए बोली लगाई गई। बता दें कि अक्टूबर महीने में भी इस क्षेत्र में बोली लगाई गई थी जिसमें जीतने वाली कंपनी ने 3.17 रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली देने की बात कही थी लेकिन इस सोमवार लगी बोली में यूपी न्यू एंड रीनूअबल एनर्जी डेवलेपमेंट एजेंसी ने 3.08 रुपए प्रति यूनिट (यानी उससे भी कम रेट में) बिजली देने की बात कही है।

 

आने वाले कुछ महीनों में कम होगा सौर टैरिफ
बता दें  कि इस समय उत्तर प्रदेश में पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों की हालत काफी खराब चल रही है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश में सोलर रेडिएशन राजस्थान, गुजरात और आंध्र प्रदेश के मुकाबले काफी कम है। स्थानीय विनिर्माण का समर्थन करने के प्रयास में वित्त मंत्रालय की ओर से आयातित सौर पैनलों और मॉड्यूल पर एक वर्ष के लिए 25% की रक्षा शुल्क लगाए जाने के बाद से सौर टैरिफ बढ़ रहे हैं। लेकिन उम्मीद की जा रही है कि आने वाले 6 महीनों में सौर टैरिफ 20 पर्सेंट तक और उससे अगले 6 महीनों में 15 पर्सेंट तक कम हो सकता है। बता दें कि भारतीय परियोजनाओं में उपयोग किए जाने वाले 90% से अधिक सौर पैनल विदेशों से आयात किए जाते हैं क्योंकि स्थानीय निर्माता कीमतों के मामले में चीन और मलेशिया  से पीछे हैं। यूपी एजेंसी ने बिजली खरीद समझौते के लिए 21 महीने की समयसीमा तय की है। 

 

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बोली में शामिल थे अडानी ग्रीन एनर्जी और टाटा पावर  रीनूअबल एनर्जी
सौर परामर्श ब्रिज टू इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर विनय रुस्तगी ने कहा, "आमतौर पर पीपीए पर हस्ताक्षर करने के लिए लगभग तीन महीने का समय लगता हैं, यह डेवलपर्स को 2020 तक का समय देता है।" सोमवार को लगी इस बोली में जीतने वालों में अडानी ग्रीन एनर्जी और टाटा पावर  रीनूअबल एनर्जी भी शामिल हैं।

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इससे पहले भी हो चुकी है निलामी

रुस्तगी  ने आगे कहा कि मॉड्यूल की कीमतें वैश्विक स्तर पर नीचे आ रही हैं इलके अलावा, आधे दर्जन विजेता हैं, जिनमें से प्रत्येक ने काफी छोटी आकार की परियोजना जीती है। उन्होंने कहा कि भारतीय डेवलपर्स आम तौर पर अधिक आक्रामक होते हैं, खासकर जब परियोजना के आकार छोटे होते हैं। हाल ही में जुलाई में भी उत्तर प्रदेश में 1000 मेगा वाट बिजली की निलामी हुई थी जिसमें जीतने वाली कंपनी ने 3.48-3.55 प्रति यूनिट देने की बात कही थी लेकिन बाद में  इस निलामी को बिना की आधिकारिक कारण के रद्द कर दिया गया।

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