बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Companiesइंडियन्स ने अंग्रेजो से खरीदी थी ये कंपनियां, आज भारत में कर रही है राज

इंडियन्स ने अंग्रेजो से खरीदी थी ये कंपनियां, आज भारत में कर रही है राज

ब्रिटिशर्स की शुरू की ऐसी कंपनियां जिसे इंडियन चला रहे हैं, जो देश के बड़े ब्रांड में गिनी जाती हैं।

1 of

नई दिल्ली। देश में ब्रिटिशर्स ने आकर कई कंपनियां खोली, इसमें शराब से लेकर होटल शामिल हैं। इनमें से कुछ कंपनियों को भारतीयों ने आजादी से पहले ही अंग्रेजों से खरीदकर इनकी सत्ता अपने हाथों में ले ली। इसमें मोहन मेकिन, ओबेरॉय ग्रुप जैसी कई कंपनियां शामिल है। अभी हाल में ही मोहन मेकिन के मालिक कपिल मोहन का निधन हो गया। आइए जानते हैं ब्रिटिशर्स की शुरू की ऐसी कंपनियां जिसे इंडियन चला रहे हैं, जो देश के बड़े ब्रांड में गिनी जाती हैं।

 

मोहन मेकिन

 

मोहन मेकिन की गिनती एशिया की सबसे बड़ी ब्रेवरीज कंपनी में होती थी। मोहन मेकिन की स्थापना 1855 में एडवर्ड डायर ने की थी। एडवर्ड डायर 1820 में ब्रेवरीज यूनिट लगाने के लिए इंग्लैंड से इंडिया आए। उन्होंनें 1855 में डायर ब्रेवरीज नाम से हिमाचल प्रदेश के कसौली में ब्रेवरीज यूनिट शुरू की। ये एशिया की पहली बीयर ब्रेवरीज ‘लॉयन’ बनाई। ये ब्रिटिश एडमिनिस्ट्रेशन के बीच काफी फेमस थी।

 

अन्य कारोबारी एचजी मेकिंन इंडिया आए और उन्होंनें शिमला और सोलन की ब्रेवरीज खरीद ली। फर्स्ट वर्ल्ड वार के बाद इस कंपनी को रिस्ट्रक्चर किया गया और इसका नाम डायर मेकिंन ब्रेवरीज रख दिया गया।

 

इंडियन ने खरीदी कंपनी

 

आजादी के बाद एनएन मोहन फंड जुटाकर लंदन गए और उन्होंने डायर मेकिन में हिस्सेदारी खरीद ली। 1949 में मैनेजमेंट की कमान एनएन मोहन ने अपने हाथ में ले ली। उन्होंने लखनऊ, गाजियाबाद और खोपली में ब्रेवरीज खोली। साल 1967 में कंपनी का नाम बदलकर मोहन मेकिन रख दिया गया। कसौली ब्रेवरीज अभी भी मोहन मेकिंन लिमिटेड के पास है। कंपनी की बागडोर एनएन मोहन के बेटे कपिल मोहन के हाथों में थी जिनका हाल में ही निधन हो गया। ओल्‍ड मॉन्‍क रम के जन्‍मदाता कपिल मोहन ही हैं।

 

- ओल्ड मोंक रम और गोल्डन ईगल बीयर मोहन मेकिंन के ब्रांड है।

 

 

आगे पढें – यूबी ग्रुप के बारे में

यूनाइटेड ब्रेवरीज (यूबी ग्रुप)

 

यूबी ग्रुप की नींव साल 1857 में स्कॉटलैंड के थॉमस लेशमैन ने की थी। ये ग्रुप साउथ इंडिया में बीयर बनाता था। ग्रुप ने ब्रिटिश ब्रेवरीज से बीयर बनाना सीखा। आजादी से पहले यूबी ग्रुप ब्रिटिश सैनिकों के लिए बल्क में बीयर बनाती थी। ये तब बीयर को ट्रांसपोर्ट करती थी।

 

साल 1947 में विट्टल माल्या इस कंपनी के पहले भारतीय डायरेक्टर बने। किंगफिशर ब्रांड की शुरूआत 60 के दशक में हुई। कंपनी ने दूसरी ब्रेवरीज कंपनी का अधिग्रहण करना शुरू कर दिया। मैकडॉवेल ग्रुप की दूसरी सब्सिडियरी कंपनी बन गई। इससे ग्रुप को अपना कारोबार वाइन और शराब कारोबार में बढ़ाने में मदद मिली है।

 

अपने पिता विट्टल माल्या के निधन के बाद विजय माल्या ने कंपनी को साल 1983 में ज्वाइन किया। किंगफिशर एयरलाइंस के लॉस में जाने के बाद विजय माल्या पर करीब 9,000 करोड़ रुपए का कर्जा हो गया। अब विजय माल्या लंदन में है और कंपनी की चेयरमैनशिप से इस्तीफा दे चुके हैं।

 

आगे पढें – ओबेरॉय ग्रुप के बारे में..

ओबेरॉय ग्रुप

 

ओबेरॉय ग्रुप ग्लोबल होटल कंपनी है, जिसका हेडऑफिस दिल्ली में है। ओबेरॉय ग्रुप की स्थापना साल 1934 में हुई थी। साल 1934 में राय बहादुर मोहन सिंह ओबेरॉय ने ब्रिटिशर्स से दो प्रॉपर्टी दिल्ली और शिमला में क्लार्क खरीदे थे। ओबेरॉय को उनके बेटों तिलक राज सिंह औ पृथ्वी राज सिंह ओबेरॉय ने कारोबार बढ़ाने में मदद की। ग्रुप ने देश और विदेश में प्रॉपर्टी खरीदी। अब कंपनी के चेयरमैन पृथ्वी राज सिंह ओबेरॉय हैं। अब कंपनी के पास 30 से अधिक लग्जरी होटल और दो रीवर क्रूज शीप है।

 

आगे पढें – रॉयल एनफील्ड के बारे में

रॉयल एनफील्ड

 

किसने खरीदी: आयशर मोटर्स

 

- साल 1893 में बनी ब्रिटिश कंपनी एनफील्ड साइकिल का ब्रांड नाम रॉयल एनफील्ड था।

 

- कंपनी इस ब्रांड नेम से मोटरसाइकिल, साइकिल आदि बनाती थी।

 

- पहली रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल साल 1901 में बनी।

 

- रॉयल एनफील्ड मोटरसाइकिल साल 1949 में भारत में बेच दी गई।

 

- रॉयल एनफील्‍ड दुनिया की सबसे पुरानी मोटरसाइल कंपनी है।

 

- साल 1955 में एनफील्ड साइकिल कंपनी और मद्रास मोटर्स इंडिया ने पार्टनरशिप कर चेन्नई में फैक्ट्री लगाई।

 

- यहां 350 सीसी की रॉयल एनफील्ड बुलेट मोटर साइकिल बनाई गई।

 

- अब रॉयल एनफील्ड एक बड़ा ब्रांड बन चुकी है।

 

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट