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बिज़नेस न्यूज़ » Industry » Companiesएक्सपोर्टर्स चुकाएंगे नीरव-मेहुल के फ्रॉड की कीमत, LOU बंद होने से 70% पर पड़ेगा डायरेक्ट इम्पैक्ट

एक्सपोर्टर्स चुकाएंगे नीरव-मेहुल के फ्रॉड की कीमत, LOU बंद होने से 70% पर पड़ेगा डायरेक्ट इम्पैक्ट

नई दिल्लीनीरव मोदी द्वारा​ किया गया  लेटर ऑफ अंडरटेकिग (एलओयू) का खेल अब पूरी एक्सपोर्ट इंडस्ट्री पर भारी पड़ने वाला है। आरबीआई ने पीएनबी में 13,000 करोड़ रुपए के फ्रॉड के बाद एलओयू और लेटर ऑफ कम्फर्ट (एलओसी) को जारी करने पर रोक लगा दी है। एक्सपोर्टर्स के अनुसार सरकार के इस फैसले से उन पर डबल अटैक हो गया है। उनका कहना है कि जीएसटी में रिफंड की समस्या से वह पहले से जूझ रहे हैं। अब नए फरमान से फंडिंग की नई समस्या खड़ी हो जाएगी, जिसका डायरेक्ट इम्पैक्ट 70 फीसदी एक्सपोर्टर्स पर पड़ने की आशंका है।

 

70 फीसदी एक्सपोटर्स पर पड़ेगा असर

 

एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट (ईपीसीएच) के चेयरमैन ओमप्रकाश प्रह्लाद ने moneybhaskar.com कहा कि बैंक के एलओयू और एलओसी जारी करने पर रोक लगाने का सीधा असर 70 फीसदी एक्सपोर्टर्स पर पड़ेगा। इसका इस्तेमाल ज्यादातर छोटे एक्सपोर्टर्स करते हैं क्योंकि वह कैश में पेमेंट नहीं कर पाते। एलओयू और एलओसी पर3 से 4 फीसदी कमीशन देना होता है जबकि दूसरे सोर्स से फंड्स महंगे पड़ते हैं। ऐसे में छोटे एक्सपोर्टर्स जिसे जीएसटी में बीते 9 महीने से रिफंड नहीं मिला है और वह LOU के जरिए पेमेंट कर रहे थे उनके लिए एक्सपोर्ट करना अब मुश्किल हो जाएगा।

 

इंपोर्टर्स करते थे एलओयू से पेमेंट

 

ज्यादातर गोल्ड, हैंडीक्राफ्ट, वुड इंपोर्टर एलओयू पर इंपोर्ट करते हैं जिसमें वह कैश पेमेंट नहीं करते और सिर्फ एलओयू देकर इंपोर्ट कर लेते हैं। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी ट्रेड फेडरेशन के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने moneybhaskar.com को कहा कि ऐसे में इंपोर्ट मुश्किल हो जाएगा कि क्योंकि कारोबारी के पास इतनी फंडिंग नहीं होती और अभी तक सभी ऐसे ही कारोबार करते आएं हैं। बैंक ने पहले ही ज्वैलरी सेक्टर के लिए फंडिंग मुश्किल कर दी है। बैंक के ऐसा करने से ज्वैलरी सेक्टर और इंपोर्टर के लिए पेमेंट करना, इंपोर्ट और कारोबार के विस्तार पर सीधा असर पड़ेगा क्योंकि उनके फंडिंग के दूसरे तरीके पहले से ही बहुत मंहगे हैं।

 

 

शिपिंग बिल पर देना होता है एलओयू

 

एशियन हैंडीक्राफ्ट प्राइवेट लिमिटेड के चेयरमैन और ईपीसीएच के एक्स प्रेजिडेंट राजकुमार मल्होत्रा ने moneybhaskar.com को बताया कि सेंट्रल जीएसटी टैक्स रूल 96A के तहत रजिस्टर्ड कारोबारी अगर गुड्स बिना आईजीएसटी की पेमेंट किए बगैर एक्सपोर्ट कर रहा है तो उसे बॉन्ड या लेटर ऑफ अंडरटेकिंग देना होता है। 1 करोड़ रुपए से अधिक टर्नओवर वाले बड़े एक्सपोर्टर को सिर्फ एलओयू भरना है। अब वह एक्सपोर्ट के समय एलओयू कैसे देगा जब बैंक जारी नहीं करेगा। ऐसे पूरा एक्सपोर्ट बंद हो जाएगा क्योंकि इतना कैश किसी के पास नहीं होता कि वह टैक्स पेमेंट भी करे और एक्सपोर्ट भी कर दे।

 

सरकार से मांगेंगे मदद

 

एक्सपोटर्स इस बारे में सरकार से मदद मांगने की तैयारी कर रहे हैं कि वह इसके बदले उन्हें दूसरे विकल्प उपलब्ध कराएं। ताकि, उन्हें फंडिंग की समस्या न हो।

 

आगे पढ़ें आरबीआई ने क्या किया...

 

 

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