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PNB के एलओयू पर हांगकांग-यूएई की कंपनियों को मिला फायदा, सामने आए कई नाम

इन कंपनियों के तार नीरव मोदी और मेहुल चौकसी से जुड़े हुए हो सकते हैं...

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नई दिल्‍ली। PNB फ्रॉड मामले में जैसे जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इसकी कई परतें खुलने लगी है। सामने आई ताजा इन्‍फोर्मेशन के मुताबिक, PNB की ओर से जारी किए गए लेटर ऑफ अंडरटेकिंग यानी एलओयू से जिन कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया है, उनमें हांगकांग और यूएई की कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों के तार नीरव मोदी और मेहुल चौकसी से जुड़े हुए हो सकते हैं।   

इकोनॉमिक्‍स टाइम्‍स की रिपोर्ट के मुता‍बिक, जिन विदेशी कंपनियों को इस फ्रॉड के जरिए फायदा मिला उनके नाम औरा जेम कंपनी, सिनो ट्रेडर्स को, यूनिटी ट्रेडिंग, सनशाइन जेम्‍स, ट्राई कलर जेम्‍स और पैसेफिक डायमंड हैं। PNB के एलओयू पर इन कंपनियों को पिछले 7 साल के दौरान अन्‍य भारतीय बैंकों की ओर से फंड मुहैया कराया गया है। सीबीआई के समक्ष दर्ज कराई गई एफआईआर में पीएनबी ने इन विदेशी कंपनियों की रिपोर्ट की है। हालांकि यह नहीं पता चल पाया है कि इन कंपनियों को बैंकों से मिले पैसे का क्‍या किया। सीबीआई इस बात की भी जांच कर रही है कि इन कंपनियों के नीरव मोदी या मेहुल चौकसी से तार जुड़े हैं या नहीं। 

 

 

हांगकांग और यूएई से जुड़े तार 
पीएनबी की एफआईआर में जिन कंपनियों के नाम सामने आए हैं, उनका बेस हांगकांग और यूएई में बताया जा रहा है। पैसेफिक डायमंड, ट्राई कलर जेम्‍स और यूनीटी ट्रेडिंग का बेस जहां यूएई है। ये कंपनियां डामंड के अलावा अन्‍य कीमती रत्‍नों का कारोबार करती हैं। सामने आए अन्‍य नामों में सिनो ट्रेडर्स और सनशाइन जेम्‍स का बेस हांगकांग बताया जा रहा है। हालांकि इन कपनियों के बारे में ज्‍यदा जानकारी नहीं मिल पाई है। 

 

 

ये मामला सामने कैसे आया?

पंजाब नेशनल बैंक ने बुधवार को स्‍टॉक एक्‍सचेंज बीएसई को बताया कि उसने 1.8 अरब डॉलर (करीब 11,356 करोड़ रुपए) का संदिग्‍ध ट्रांजैक्‍शन पकड़ा है।  यह फ्रॉड कुछ चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को फायदा पहुंचाने के लिए किए गए थे। बैंक के अनुसार, ऐसा लगता है कि इन ट्रांजैक्‍शन के आधार पर विदेश में कुछ बैंकों ने उन्हें (चुनिंदा अकाउंट होल्‍डर्स को) कर्ज दिया है। ये अकाउंट्स कितने थे, कितने लोगों को फायदा हुआ? इस बारे में अभी तक खुलासा नहीं हुआ है। यह मामला 2011 से जुड़ा है।

 

 

कैसे हुआ फ्रॉड?
इस पूरे फ्रॉड को लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) के जरिए अंजाम दिया गया। यह एक तरह की गारंटी होती है, जिसके आधार पर दूसरे बैंक अकाउंटहोल्डर को पैसा मुहैया करा देते हैं। अब यदि अकाउंटहोल्डर डिफॉल्ट कर जाता है तो एलओयू मुहैया कराने वाले बैंक की यह जिम्मेदारी होती है कि वह संबंधित बैंक को बकाये का भुगतान करे। पीएनबी के कुछ अफसरों ने नीरव मोदी को गलत तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) दी। इसी एलओयू के आधार पर मोदी और उनके सहयोगियों ने दूसरे बैंकों से विदेश में कर्ज ले लिया। पीएनबी ने भले ही दूसरे लेंडर्स के नाम का उल्लेख नहीं किया, लेकिन समझा जाता है कि पीएनबी द्वारा जारी एलओयू के आधार पर यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक और एक्सिस बैंक ने भी क्रेडिट ऑफर कर दिया था।  

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