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पतंजलि ने मल्टी नेशनल का बदला फंडा, अब आयुर्वेद पर फोकस कर मार्केट बचाने की स्ट्रैटजी

मल्टीनेशनल को भारतीय बाजार में अपनी पैठ बनाए रखने के लिए आयुर्वेद बेस्ड प्रोडक्ट की ब्रांडिंग के अलावा कोई चारा नहीं है।

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नई दिल्ली। एक समय अपनी साइंटिफिक रिसर्च और मार्केटिंग को जरिए भारतीय एफएमसीजी मार्केट पर कब्जा रखने वाली मल्टीनेशनल कंपनियों का अब फंडा बदल गया है। एचयूएल, प्रॉक्टर एंड गैंबल जैसी कंपनियां आयुर्वेद की ब्रांडिंग पर फोकस कर रही है। कंपनियां पतंजलि की बढ़ती पैठ की वजह से अपने हिट प्रोडक्ट में भी आयुर्वेद का तड़का लगा रही है। इसका ताजा उदाहण हाल ही में कॉलगेट के ऐड में दिखता है, जो कि कोलगेट वेदशक्ति के नए ब्रांडिंग से प्रमोट किया जा रहा है। ब्रांड गुरु के अनुसार पतंजलि ने इंडियन कस्टमर के बीच आयुर्वेद का बड़ा भरोसा तैयार कर लिया है। ऐसे में अगर मल्टीनेशनल को भारतीय बाजार में अपनी पैठ बनाए रखनी है तो उनके सामने आयुर्वेद बेस्ड प्रोडक्ट की ब्रांडिंग के अलावा कोई चारा नहीं है। इसी वजह से आज इस तरह के विज्ञापन बढ़ रहे हैं।

 

 

 

तेजी से बढ़ा रहा है आयुर्वेदिक हेल्थ प्रोडक्ट मार्केट

 

 

 

नील्सन 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक आयुर्वेदिक हेल्थ प्रोडक्ट का मार्केट साल 2021 तक 1अरब डॉलर का होगा। रिपोर्ट के अनुसार कस्टमर अब नेचुरल और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल पर्सनल केयर में ज्यादा कर रहे हैं। ज्यादातर लोगों का फोकस केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट की जगह हर्बल बेस्ड प्रोडक्ट की तरफ है।

 

 

 

कॉलगेट ने लिया आयुर्वेदिक विज्ञापन का सहारा

 

 

कॉलगेट पॉमोलिव ने अभी हाल में टूथपेस्ट केटेगरी मे कॉलगेट स्वर्ण वेदशक्ति नाम से टूथपेस्ट का विज्ञापन निकाला है। वह भी अपने विज्ञापन में आयुर्वेद पर फोकस कर रहा है क्योंकि उसे पतंजलि के टूथपेस्ट दंत कांति से टक्कर मिल रही है। कॉलगेट पॉमोलिव के आयुर्वेद पर फोकस करन का अहम कारण मार्केट शोयर खोना है। कोटक इक्विटिज के सर्वे के मुताबिक टूथपेस्ट सेगमेंट में मार्केट लीडर कहे जाने वाला कालगेट पॉमोलिव ने लगभग 1 फीसदी (60 बेसिस प्वांइट मार्केट शेयर) खोकर 57.3 फीसदी रह गया है। बाबा रामदेव के टूथपेस्ट दंतकाति का जून 2017 के अनुसार मार्केट शेयर 4.5 फीसदी तक पहुंच गया है।

 

 

 

HUL ने लॉन्च की आयुर्वेदिक पर्सनल केयर रेन्ज

 

 

देश के सबसे बड़ी और पुरानी एफएमसीजी कंपनी एचयूएल के लिए पतंजलि के आयुर्वेदिक क्रीम, फेसवॉश प्रोडक्ट खतरा साबित हो रहे थे जिसके कारण बीते साल कंपनी पर्सनल केयर रेन्ज में लीवर आयुष ब्रांड नाम से कई प्रोडक्ट लेकर आई है। इनका प्रमोशन प्राइस सेंसिटव कस्टमर के बीच आयुर्वेदिक प्रोडक्ट की तरह किया जा रहा है। इसमें नीम शैंपू, टरमिरक हैंड वॉश, टरमरिक फेस वॉश जैसे कई प्रोडक्ड शामिल है। एचयूएल ने अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग इलायची टूथपेस्ट, साफरन साबून और मेथी दाना शैंपू के तौर पर किया है। पतंजलि ने सौंदर्या, दंत कांति एडवांस जैसे प्रोडक्ट मार्केट में उतार चुकी है।

 

 

ज्योति लैब्रोटेरीज लाया नीम साबुन

 

 

ज्योति लेबोरेटरीज भी हर्बल और आयुर्वेदिक पर्सनल केयर प्रोडक्ट नीम साबून और टूथपेस्ट लेकर आया। कंपनी का फोकस पतंजलि की ही तरह आयुर्वेद प्रोडक्ट को लेकर आए बूम का फायदा उठाने का है। साबुन के केटेगरी में मार्गो का मार्केट शेयर 1.1 फीसदी है और ज्योति लेबोरेटरीज इस शेयर को 10 फीसदी तक लेकर जाना चाहता है। देश का साबुन केटेगरी का मार्केट 150 अरब रुपए का है।

 

आगे पढ़ें - पतंजलि मल्टी नेशनल के मार्केट में लगा रही है सेंध

 

 

पतंजलि मल्टी नेशनल के मार्केट में लगा रही है सेंध

 

 

बाबा रामदेव के पतंजलि के नूडल्स, बिस्किट, शैंपू, टूथपेस्ट, शहद जैसे 350 से अधिक प्रोडक्ट है। पतंजलि ने अपनी मार्केटिंग में आयुर्वेदिक बेस्ड और स्वदेशी पर ज्यादा फोकस किया है। इससे उनके प्रोडक्ट और ब्रांड दोनों को फायदा हुआ है। पतंजलि देश की सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली एफएमसीजी कंपनी बन चुकी है। साल 2016-17 में 10,000 करोड़ रेवेन्यू वाली कंपनी बन गई है। अर्न्स्ट एंड यंग के रीटेल और कन्ज्युमर प्रोडक्ट के नैशनल लीडर और पार्टनर पिनाकरंजन मिश्रा ने Moneybhaskar.com को कहा कि पतंजलि मौजूदा एफएमसीजी सेक्टर के मार्केट में तेजी से हिस्सेदारी बढ़ा रही है। जिसकी वजह से एफएमसीजी सेक्टर में एचयूएल, आईटीसी, पी एंड जी, नेस्ले मार्केट लीडर कंपनियों के लिए एक नया चैलेंज खड़ा हो गया है। इसी चैलेंज को देखते हुए कंपनियां अब आयुर्वेद पर फोकस कर रही है। जिससे अपने हिट ब्रांड को बचाया जा सके।

 

 

मल्टीनेशनल के सामने स्ट्रैटजी बदलने के अलावा कोई चारा नही

 

 

ब्रांड गुरू हरीश बिजूर ने moneybhaskar.com को बताया कि डाबर, नेस्ले, कॉलगेट पॉमोलिव, एचयूएल जैसी तमाम कंपनियों ने विज्ञापनों में आयुर्वेद पर ज्यादा फोकस कर रही है क्योंकि रामदेव और पतंजलि को प्रोडक्ट अन्य मल्टीनेशनल कंपनियों को बड़ा कंपिटिशन मिल रहा है। बाबा रामदेव अपने आप में एक बड़ा ब्रांड बन चुके हैं जिसे लोग आयुर्वेद से ही जोड़कर देखते हैं। ऐसे में मल्टीनेशनल के सामने अपने हिट प्रोडक्ट बचाने के लिए आयुर्वेद का ही सहारा लेना है। जो कि अब उनकी स्ट्रैटेजी में भी दिख रहा है।

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