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OYO रुम का बिजनेस पार्टनर बनेगा सॉफ्टबैंक, कभी फाउंडर रितेश बेचते थे सिम कार्ड

रितेश 22 साल की उम्र में ही अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हो गए थे। ओयो रूम्स की वैल्युएशन करीब 8,500 करोड़ रुपए है।

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नई दिल्ली। ओयो रुम की सफलता को देखते हुए अब दुनिया का सबसे बड़ा इन्वेस्टर सॉफ्टबैंक उसके साथ हाथ मिलाने की तैयारी कर रहा है। बैंक के सीईओ मासायोशी सन ने हाल ही में ओयो रुम के फाउंडर रितेश अग्रवाल की तारीफ करते हुए, उनसे पार्टनरशिप करने के संकेत दिए हैं। 23 साल के रितेश 22 साल की उम्र में ही अरबपतियों की लिस्ट में शामिल हो गए थे। उनकी सफलता की कहानी भी काफी अलग है। बिना किसी बड़ी डिग्री के उन्होंने ये मुकाम हासिल किया है। रितेश एक समय उड़ीसा के एक छोटे से शहर में सिम कार्ड बेचा करते थे।

 

 

 

 

मासायोशी सन ने जनरल मीटिंग में की तारीफ

 

मासायोशी सन ने अपनी 38वीं जनरल मीटिंग में भी ओयो रूम्स की तारीफ करते हुए कहा कि इसके 23 साल के फाउंडर रितेश अग्रवाल ने 19 साल की उम्र में बिजनेस शुरू किया और चार साल में ही उनकी कंपनी तेजी से ग्रोथ करने लगी है। 23 साल के रितेश अग्रवाल जो अरबपति कारोबारियों की लिस्ट में 22 साल की उम्र में शामिल हो चुके हैं। उनकी कंपनी ओयो रूम्स वैल्युएशन करीब 8,500 करोड़ रुपए है। रितेश ने साल 2013 में ओयो रूम्स की शुरूआत की थी।

 

चीन में फैलाएंगे बिजनेस

 

 

ओयो रूम ने चीन में अपनी सर्विस शुरू कर रही है। ऐसा काफी कम हुआ है जब किसी इंडियन कन्ज्यूमर टेक्नोलॉजी कंपनी दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी चीन में बिजनेस किया हो।

 

 

आगे पढ़ें - कैसे मिला आइडिया..

टीवी रिमोट कंट्रोल से मिला आइडिया

 

 

रितेश अग्रवाल उड़ीसा के छोटे से शहर बिसम कटक से हैं जो नक्सली प्रभावित इलाका है। रितेश को ओयो रूम खोलने का आइडिया टीवी के रिमोट कंट्रोल से आया है। उनका मानना था जैसे टीवी को रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है। ऐसा ही कुछ होटल के लिए भी किया जा सकता है। जिससे घर बैठे कस्टमर को होटल मिल सके। इसी आइडिया से ओयो रुम की शुरुआत हुआ है।

 

 

शुरूआत में बनाया ओरावल स्टे

 

 

रितेश अग्रवाल बिजनेस फैमिली से हैं जो साल 2011 में दिल्ली आए थे। उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज का एंट्रेस एग्जाम छोड़कर यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन के इंडिया कैपंस में एनरोल कराया। उन्होंने तब 18 साल की उम्र में ओरावल स्टे बनाया जो एयरबीएनबी का इंडियन वर्जन था। लेकिन वहां उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिल रही थी। इसे देखते हुए वह करीब 100 से अधिक बेड एंड ब्रेकफास्ट कमरों में ठहरे। तब जाकर उन्हें समझ में आया कि समस्या पोर्टल के साथ है क्योंकि वह स्टैंडर्डाइज्ड नहीं है।

 

 

आगे पढ़ें - शुरआत में किया हाउसकीपिंग का काम..

 

 

मिली पीटर थील फैलोशीप

 

 

उसी दौरान रितेश अग्रावल पहले ऐसे इंडियन बने जिन्हें 1 लाख डॉलर की थील फैलोशिप मिली। थील फेसबुक के शुरूआती इन्वेस्टर मे से एक रहे हैं। पीटर थील पे-पाल के को-फाउंडर भी रहे हैं। थील फैलोशीप ऐसे कारोबारियों को मिलती है जो 20 साल की उम्र तक कॉलेज छोड़कर बिजनेस करना चाहते हैं। उन्होंने थील फैलोशीप का ज्यादातर पैसा ओयो रूम्स में लगा दिया।

 

 

शुरुआत में किया हाउसकीपिंग से लेकर सीईओ का काम

 

 

अपने शुरूआती अनुभवों के बारे में उन्होंने बताया कि जब उन्होंने गुड़गांव में पहला होटल शुरू किया था तब वह हाउसकीपिंग, सेल्स, सीईओ सभी का काम करते थे। वह ओयोरूम्स की ड्रेस पहनकर ड्युटी करते और कस्टमर को कमरा दिखाते। उन्हें कई बार टिप मिली और कमरे से भी निकाला गया लेकिन वह कस्टमर के साथ हमेशा अच्छे से पेश आए।

 

आगे पढ़ेंIIM और IIT पास आउट को करते हैं हेड

 

IIM और IIT पास आउट को करते हैं हेड

 

 

रितेश अग्रवाल कॉलेज ड्रॉपआउट है लेकिन वह 20 आईआईएम और 200 आईआईटी की टीम हेड करते हैं। सॉफ्टबैंक ने ओयो रूम्स में विजन फंड के जरिए 93 अरब डॉलर इन्वेस्ट किए हैं। ओयो रूम्स के पास एक लाख कमरे हैं। हर महीने उनके साथ 10 हजार कमरे जुड़ रहे हैं। ओयो रूम्स नेक्स्ट जेनरेशन होटल चेन है जो इंटरनेट सर्विस का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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