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अब नहीं जाना पड़ेगा बूचड़ खाना, ऑनलाइन मंगा सकेंगे मीट

2.5 लाख करोड़ के नॉनवेज मार्केट में एंट्री कर रहे हैं सेलर्स

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नई दिल्ली। ऑनलाइन कपड़े और ग्रोसरी खरीदने के बाद अब आप मटन, चिकन और सीफूड भी ऑनलाइन खरीद पाएंगे। जी हां यह कोई मजाक नहीं है बल्कि सच है। देश के कुछ सेलर्स 35 अरब डॉलर (2.5 लाख करोड़) के नॉनवेज मार्केट में अपने पैर जमाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। साथ ही सेलर्स का यह भी कहना है कि नॉनवेज की ऑनलाइन बिक्री कर वह  लोगों के नजरिए को भी बदलना चाहते हैं। मेट्रो शहरों में ऑनलाइन नॉनवेज बेचने  वाली कंपनियों में जैप्पफ्रेश, फ्रेशटूहोम और जलोन्गी प्रमुख हैं।  

 

ऑनलाइन मांस स्टोर ज़ैप्पफ्रेश के वरिष्ठ सलाहकार विनोद सावनी ने कहा, नए युग के ऑनलाइन मटन विक्रेता लोग गैर-शाकाहारी उत्पादों को खरीदने के तरीके को बदल रहे हैं। इसलिए असंगठित बाजार को व्यवस्थित करने का एक बड़ा अवसर है। इसके साथ ही असंगठित बाजार को यह  सुनिश्चित करने की जरूरत है कि उनकी ओर से भेजा जा रहा नॉनवेज फ्रैश और अच्छी गुणवत्ता का हो।  यह सभ ऑन लान कंपनियां कटा हुआ, मेरीनेटेड, रेडी-टू-कूक नॉनवेज बेचते हैं। इससे ग्राहकों को काफी आसानी होती है क्योंकि उन्हें नॉनवेज को खुद साफ नहीं करना पड़ता। ये ऑनलाइन साइट्स नॉनवेज को अच्छे से साफ करके भी बेचती हैं।

 

अगली स्लाइड में पढ़ें क्यों नॉनवेज बेचने वाले को बिना किसी प्रोफेशन के तौर पर देखा जाता है

लिसियस हर महीने लगभग 200 टन मटन बेचती है

ऑनलाइन नॉनवेज सेलर लिसियस के को-फाउंडर अभय हंजुरा ने बताया कि नॉनवेज इंडस्ट्री को कई तरह के सांस्कृतिक पाखंड़ों के साथ जोड़कर देखा जाता है। एक नॉनवेज बेचने वाले को बिना किसी प्रोफेशन के तौर पर देखा जाता है। उन्होंने बताया कि हम बहुत से लोगों को नौकरी देते हैं। आपको बता दें कि लिसियस हर महीने बेंगलुरू, हैदराबाद, और एनसीआर में  लगभग 200 टन मटन बेचती है। अभय हंजुरा और कंपनी के दूसरे को-फाउंडर विवेक गुप्ता के माता-पिता शाकाहारी हैं।  हंजुरा ने बताया कि हमने जो बिजनेस लाइन चुनी है, उसे लेकर विवेक के पैरेंट्स की ही तरह मेरे माता-पिता भी काफी नाराज हुए थे। वे इस सेक्टर में हमारे जाने के विचार के खिलाफ थे।  

 

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80 फीसदी भारतीय रोज नॉनवेज खाते हैं
सावनी ने बताया कि पहले उन्हें लगता था कि भारत शाकाहारियों का देश हैं लेकिन फिर उन्होंने महसूस किया कि 80 फीसदी भारतीय नॉनवेज खाते हैं उन्हें लगा किलोग रोज नॉनवेज नहीं खाते जिससे प्रति दिनकी खपत कम हो सकती है, लेकिन आश्चर्य की न बात यह है कि 80 फीसदी भारतीय रोज नॉनवेज खाते हैं। आपको बता दें कि लिसियस, जैपफ्रेश, फ्रेशटूहोम और जलोंगी उन ऑनलाइन सेलर्स में शामिल हैं, जो पूरी तरह से असंगठित इस सेक्टर में सहूलियत और हाइजीन लाने की कोशिश कर रहे हैं। 

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