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बिल गेट्स ने पढ़ी अपने दोस्‍त की किताब, कहा- लोग पढ़ लें तो बेहतर बन जाएगी दुनिया

यह किताब है 'फैक्‍टफुलनेस: टेन रीजन्‍स वी आर रॉन्‍ग अबाउट द वर्ल्‍ड एंड व्‍हाई थिंग्‍स आर बैटर दैन यू थिंक'...

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नई दिल्‍ली. ये तो सभी जानते हैं कि माइ‍क्रोसॉफ्ट के फाउंडर अरबपति बिल गेट्स किताबें पढ़ने के बेहद शौकीन हैं। वह अक्‍सर अपने द्वारा पढ़ी गई किताबों के बारे में और उनकी खास बातों या उनसे मिलने वाली सीख के बारे में लोगों को बताते रहते हैं। वैसे तो कई किताबें गेट्स की फेवरेट हैं लेकिन एक किताब ऐसी भी है, जिसके बारे में गेट्स का कहना है कि अगर उस किताब को लोग पढ़ लें तो ये दुनिया बेहतर बन जाएगी। यह किताब है बिल गेट्स के दोस्‍त हैन्‍स रॉसलिंग की 'फैक्‍टफुलनेस: टेन रीजन्‍स वी आर रॉन्‍ग अबाउट द वर्ल्‍ड एंड व्‍हाई थिंग्‍स आर बैटर दैन यू थिंक'। 

 

स्‍वीडिश स्‍टेटिस्टिीशियन व ग्‍लोबल हेल्‍थ एक्‍सपर्ट हैन्‍स रॉसलिंग अब इस दुनिया में नहीं हैं। वह इस किताब को पूरा करने से पहले ही 2017 में दुनिया छोड़ चुके थे। रॉसलिंग के बाद उनके बेटे और बहू ने इस किताब को पूरा किया।  

 

फैक्‍टफुलनेस में दुनिया को देखने के एक अलग फ्रेमवर्क को बताया गया है। इस किताब के बारे में गेट्स ने अपने ब्‍लॉग पर लिखा है कि इस किताब का ज्‍यादातर हिस्‍सा 10 प्रवृत्तियों के बारे में है। ये प्रवृत्तियां हमें दुनिया की वास्‍तविकता देखने से रोकती हैं। किताब में हर प्रवृत्ति के साथ अपने पूर्वाग्रहों से ऊपर कैसे उठा जाए, इसके बारे में प्रैक्टिकल एडवाइस यानी व्‍यावहारिक सलाह भी मौजूद है। 

 

इस थ्‍योरी को गेट्स मानते हैं सबसे महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा

गेट्स के मुताबिक, किताब में रॉसलिंग ने दुनियाभर में दौलत के चार लेवल बताए हैं। इनमें शुरुआत बहुत ज्‍यादा गरीबी से होती है, जिसके तहत आने वाले केवल 2 डॉलर या उससे भी कम पर जी रहे हैं। आखिरी लेवल केवल एक दिन में बहुत ज्‍यादा पैसा 32 डॉलर से भी ज्‍यादा खर्च करने वालों का है। वहीं रॉसलिंग का मानना है कि दुनिया में सबसे ज्‍यादा 300 करोड़ लोग लेवल 2 के हैं, जिनका खर्च 2 से 8 डॉलर प्रतिदिन के बीच में है। रॉसलिंग की इस थ्‍योरी को बिल गेट्स किताब का सबसे महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा मानते हैं। 

 

आगे पढ़ें- अमीर-गरीब का लेबल हटाकर इस फ्रेमवर्क को अपनाने की सलाह 

विकसित-विकासशील या अमीर-गरीब केवल दो लेबल काफी नहीं

किताब में रॉसलिंग ने लोगों को विकसित और विकासशील देशों के लेबल के बजाय इसी फ्रेमवर्क को इस्‍तेमाल करने के लिए प्रेरित किया है। इसकी वजह है कि अगर दुनिया को अमीर और गरीब देशों में बांट दिया जाए तो प्रगति कर पाना मुश्किल है। अगर दुनिया में केवल अमीर और गरीब दो ही विकल्‍प होंगे तो कोई भी किसी भी ऐसे व्‍यक्ति को जो अमीरों जैसी जिंदगी नहीं जी पाता है, उसे गरीब ही मानेगा। वहीं अगर चार लेवल होंगे तो लोगों को हर एवरेज पर्सन गरीबी के लेबल में नहीं आएगा।   

 

आगे पढ़ें- आसानी से समझा दी मुश्किल सी बात 

आसानी से समझ में न आने वाली चीज समझाती है यह किताब

गेट्स इस किताब के बारे में कहते हैं कि यह मेरी अब तक की पढ़ी सबसे ज्‍यादा शिक्षाप्रद किताबों में से एक है। यह एक ऐसी चीज को बताती है, जिसे समझना आसान नहीं है। अगर लाखों लोग इस किताब को पढ़ लें तो यह दुनिया बेहतर बन जाएगी। 

 

सोर्स- सीएनबीसी 

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