Home » Industry » CompaniesSuccess story of Anuj Rakyan Raw Pressery Juices

अनुज ने 4 साल में खड़ा किया 250 करोड़ का ब्रांड, कभी नीरव मोदी के यहां करते थे काम

अनुज राक्यान एक समय नीरवमोदी की कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट के रुप में ज्वैलरी बिजनेस का काम संभालते थे।

1 of

नई दिल्ली। अनुज राक्यान एक समय नीरवमोदी की कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट के रुप में ज्वैलरी बिजनेस का काम संभालते थे। लेकिन 4 साल पहने उन्होंने खुद का बिजनेस खड़ा करने का मन बनाया है और 1.5 करोड़ रुपए की शुरूआती लागत से आज 250 करोड़ रुपए का ब्रांड खड़ा कर दिया है। अनुज जूस को नए कॉन्सेप्ट में लेकर आए। वह जूस में हेल्थ पर खास तौर से फोकस करने वाले कस्टमर को टारगेट करते हुए बिजनेस में उतरें। अनुज ने Raw प्रैसरी ब्रांड की शुरूआत की। जिसकी इस समय जैकलीन फर्नाडिंस ब्रांड अम्बेस्डर है।

 

 

नीरव मोदी की कंपनी में रह चुके हैं वाइस प्रेसिडेंट

 

 

37 साल के राक्यान ने अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग का कोर्स किया। वह एक इन्वेस्टमेंट बैंकर और ब्रांड कन्सल्टेंट रह चुके है। भारत लौटकर अनुज नीरव मोदी ज्वेल्स कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट सेल्स की जॉब की। वह यह वेंचर शुरू करने से पहले 10 साल नौकरी कर चुके थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि पिछले अनुभवों ने इंफ्रास्ट्रक्चर, टीम, फाइनेंस के मामले में ऑर्ग्नाइज होना सिखा दिया है।

 

 

बिना प्रिजरवेटिव्स का ढूंढ रहे थे ड्रिंक

 

 

इंटरव्यू में अनुज ने Raw प्रैसरी के आइडिया के बारे में बताया कि वह ऐसा ड्रिंक ढूंढ रहे थे जो बिना प्रिजरवेटिव्स के हो लेकिन ऐसा कोई ड्रिंक नहीं मिला। तब उन्होंने अपनी मां के किचन में फ्रेश जूस बनाना शुरू किया। तब उन्हें फ्रेश जूस बेचने का आइडिया Raw प्रैसरी आया। उनके मुताबिक वह सुबह 4 बजे उठकर फ्रेश फ्रूट्स और सब्जियों के लिए मार्केट जाने के लिए तैयार थे। जूस बेचने के लिए टाइम ज्यादा महत्व रखता है क्योंकि समय से ज्यादा टाइम होने पर बैक्टीरिया होने का जोखिम ज्यादा होता है।

 

 

आगे पढ़े - शुरूआत में स्वयं खरीदीं सब्जियां

 

शुरूआत में स्वयं खरीदीं सब्जियां

 

 

राक्यान ने शुरुआत में ताजे फल और सब्जियों को खुद खरीदा और उनका जूस और स्मूदीज बनाया और अपने कुछ क्लाइंट को बेचा। फिर साल 2014 में ही रॉ प्रैसरी के जूस कोल्ड प्रेस टेक्नोलॉजी से बनने लगे जिसमें ऑक्सीडेशन कम होता है और फल और सब्जियों की न्यूट्रिशन वैल्यू बनी रहती है।

 

 

2,000 करोड़ का है जूस मार्केट

 

 

इंडिया में पैकेज्ड जूस मार्केट करीब 2,000 करोड़ रुपए का है। पैकेज्ड जूस मार्केट में डाबर का रियल और पेप्सिको का ट्रॉपिकाना मार्केट लीडर हैं। वाक्यान के मुताबिक उन्होंने 500 लोगों पर सर्वे किया जिसमें उन्हें यह समझ में आया कि ज्यादातर लोग फ्रेश फ्रूट जूस चाहते हैं। इंडिया में फ्रेश जूस का कॉन्सेप्ट सभी जानते हैं क्योंकि यहां नींबू पानी, गन्ने, गाजर का जूस रोड पर ही मिल जाता है। इंडिया में ज्यादातर लोग घर में ही जूस बनाते हैं।

 

 

मंगाई कोल्ड प्रेस जूस की मशीन

 

 

जूस निकालने की कोल्ड प्रेस मशीन काफी महंगी है। इस मशीनरी के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर भी काफी महंगा पड़ता है। अमेरिका की कंपनी सुजा, कोकाकोला, पेप्सी और स्टारबक्स सभी इस कोल्ड प्रेस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। अब ज्यादातर बड़ी कंपनियों को लगता है कि यही तकनीक ड्रिंक मार्केट का फ्यूचर है। उनकी यही मशीन महीने में 3.50 लाख लीटर जूस महीने में बना सकती है।

 

 

आगे पढ़े - कैसे की शुरुआत..

 

1.50 करोड़ से की शुरूआत

 

 

उन्होंने अपने इस प्रोजेक्ट में शुरूआत मे 80 लाख रुपए लगाए थे और उसके बाद उनकी परिवार और फैमिली ने उनकी मदद की। उन्होंने ये बिजनेस 1.50 करोड़ रुपए से शुरू किया था। इस बिजनेस में उनकी सबसे बड़ी प्रॉब्लम शेल्फ लाइफ की थी। । उनकी कंपनी ने 6 फ्लेवर्स से शुरू किया था। अब उनकी प्रोडक्ट रेन्ज में संतरा, गन्ने का जूस भी शामिल है।

 

 

21 दिन होती है उनके जूस की शेल्फ लाइफ

 

 

अभी Raw प्रैसरी का जूस दिल्ली, मुंबई और पुणे में मिलता है। इसके 70 फीसदी से अधिक कस्टमर 20 से 60 साल की उम्र के हैं। उनकी कंपनी का जूस 250 एमएल की बोतल में मिलता है जिसकी कीमत 150 रुपए है। अब उनकी रेन्ज में 30 से अधिक जूस, स्मूदीज और ऑल्मंड मिल्क शामिल है। उनके जूस की शेल्फ लाइफ 21 दिन तक होती है। कंपनी के साथ करीब 197 कर्मचारी काम कर रहे हैं। उन्हें बूटस्ट्रैप्ड और एंजेंल ने फंडिंग की है।

 

 

prev
next
मनी भास्कर पर पढ़िए बिज़नेस से जुड़ी ताज़ा खबरें Business News in Hindi और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट