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एनपीपीए ने 27 जरूरी दवाओं के दाम कम किए, डायबिटीज और बीपी की दवाएं शामिल

मरीजों को राहत देते हुए एनपीपीए ने गुरूवार को 27 जरूरी दवाओं की कीमतों में बदलाव किया है।

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नई दिल्ली. मरीजों को राहत देते हुए नेशनल फॉर्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने गुरूवार को 27 जरूरी दवाओं की कीमतों में बदलाव किया है। इनमें डायबिटीज और हाई बीपी में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। बता दें कि एनपीपीए समय-समय पर दवाओं का मैक्सिमम प्राइज तय करती है, जिससे मरीजों को महंगी दवाओं से छुटकारा मिल सके। 

 

 

अब तक 966 दवाओं के दाम कम हुए
एनपीपीए ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा, "ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) अमेंडमेंट ऑर्डर-2013 के तहत 27 दवाओं की कीमतें घटाई गई हैं। एनपीपीए ने नेशनल लिस्ट ऑफ इसेंन्शियल मेडिसिन 2015 के तहत अब तक 966 दवाओं के रेट घटाए हैं। नवंबर तक 874 दवाओं के रेट एनपीपीए ने तय किए थे।

 

मैन्युफैक्चरर्स ज्यादा कीमत नहीं ले सकते 
एनपीपीए ने कहा है, "मैन्युफैक्चरर्स तय कीमत से ज्यादा नहीं ले सकते हैं। अगर कंपनियां सीलिंग प्राइस और रूल्स का पालन नहीं करती हैं तो उन्हें वसूली गई एक्स्ट्रा कीमत ब्याज समेत जमा करानी पड़ेगी। कंपनियों को इन दवाओं की कीमतों में साल में 10% तक की ही बढ़ोतरी करने की इजाजत होगी।"

 

दवा की कीमतों में क्यों होता है बदलाव? 
- एनपीपीए ड्रग्स (प्राइस कंट्रोल) ऑर्डर-2013 के तहत शेड्यूल-1 में आने वाली जरूरी दवाओं की कीमत तय करता है। 
- सरकार जरूरत के हिसाब से जरूरी दवाओं की लिस्ट तैयार करती है, जिसमें समय-समय पर नई दवाओं को शामिल किया जाता है। लिस्ट को नेशनल लिस्ट ऑफ एसेन्शियल मेडिसिन (एनएलईएम) कहा जाता है। 
- इन लिस्ट में शामिल दवाइयों को काफी किफायती कीमत पर दिलाने की जरूरत होती है,  इसलिए समय-समय पर कीमतें कम की जाती हैं।
- इसका मकसद सभी ब्रांड की एक ही दवा की कीमत बराबर रखना है, जिससे कस्टमर्स अपनी सुविधा के अनुसार चुनाव कर सकें।  

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